स्टार न्यूज़ एजेंसी 
एक अनुमान के मुताबिक दुनिया में करीब 50 लाख लोगों की सिगरेट पीने की वजह से समय से पहले ही मौत हो जाती है.
हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल कहते हैं कि अधिकतर धूम्रपान संबंधी होने वाली मौतों की वजहों में अथीरोस्लेरोटिक कार्डियोवैस्कुर डिसीज, लंग कैंसर और क्रोनिक ऒब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीज हैं.
धूम्रपान को बंद कर देने का सम्बंध पुरुष और महिला दोनों के लिए फायदेमंद हैं और यह सभी उम्र में लागू होता है.
सभी धूम्रपान करने वालों में व्यवहार के तरीके और फार्माकोलॊजिक थेरेपी दोनों को एक साथ अपनाया जाना चाहिए. दोनों को एक साथ अपनाना बेहतर होता है और महज एक को अपनाने से उतना फायदा नहीं होता है जितना कि दोनों को एक साथ लेने से होता है.
ज्यादातर धूम्रपान करने वालों का उपचार वैरेनिकलाइन यानी फार्माकोलॊजिक थेरेपी से किया जाना चाहिए.
ब्यूप्रोपियन या निकोटीन रीप्लेसमेंट थेरेपी भी इसका विकल्प हो सकती है. जो मरीज फार्माकोलोजिक नहीं ले सकते हैं, वे इनके विकल्पों को चुन सकते हैं.
जो मरीज इसे छोड़ने में सफल नहीं हो पाते हैं, वे अन्य विकल्प का चुनाव भी कर सकते हैं. ऐसे वैकल्पिक मरीजों को निकोटीन रीप्लेसमेट थेरेपी को एक साथ लेना चाहिए, जिसमें ब्यूप्रोपीन और/या निकोटीन रीप्लेसमेंट थेरेपी के कई फार्मूले शामिल हैं.
व्यक्तिगत तौर पर जो इसमें सफल नहीं हो पाते हैं वे क्लेनीडाइन या नॊट्रिप्टीलाइन को चुन सकते हैं.
जो मरीज सफलतापूर्वक धूम्रपान को छोड़ने में कामयाब हो जाते हैं, लेकिन उनमें फिर से इसकी संभावना रहती है, तो वे फार्माकोलॊजिक एजेंट ले सकते हैं जो वे पहले ही ले चुके हैं.

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