स्टार न्यूज़ एजेंसी 
कम कार्बोहाइड्रेट वाली ख़ुराक जिसमें पशु की चर्बी और प्रोटीन की मात्रा अधिक होने से टाइप 2 डायबिटीज का ख़तरा नहीं बढ़ता है. यह बात अमेरिकन जर्नल ऒफ़ क्लीनिकल न्यूट्रीशन में प्रकाशित एक अध्ययन में कही गई है. एक ऐसी ख़ुराक जिससे बचाव के साथ ही प्रभावी असर होता है, वह है- शाकाहारी भोजन, जिसमें कार्बोहाइड्रेट कम के साथ ही सब्ज़ियों के वसा व प्रोटीन की मात्रा अधिक हो.

हार्ट केयर फ़ाउंडेशन ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल के मुताबि़क़ अध्ययन में वर्तमाल में चल रहे विरोधाभास के बारे में भी सुझाव दिए गए हैं, जिसमें कहा गया है कि कम वसा वाले भोजन लेने से टाइप 2 डायबिटीज़ से बचा जा सकता है. रिफ़ाइंड कार्बोहाइड्रेट की उच्च ख़ुराक को लम्बे समय तक लेने का संबंध आयुर्वेदिक पाठ में मधुमेह रोगियों के रूप में दिया गया है. भारतीय भोजन की संस्कृति में हो चुकी तब्दीली इसकी मुख्य वजह है. अब रोटी की जगह मैदा, गुड़ की जगह चीनी और ब्राउन राइस की जगह व्हाइट राइस का चलन बढ़ गया है, जिसकी वजह से देश में मधुमेह के मामलों में तेज़ी से इज़ाफ़ा होता जा रहा है. रिफ़ाइंड कार्बोहाइड्रेट को जब पशु की चर्बी के साथ लेते हैं, तो यह न सिर्फ़ मधुमेह रोगियों के लिए नुक़सानदायक होता है, बल्कि हृदय रोगी भी इससे अछूते नहीं रहते.

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