फ़िरदौस ख़ान
लगातार बढ़ती आबादी ने बहुत-सी समस्याएं पैदा की हैं. साधन सीमित हैं. ज़मीन को खींच कर बड़ा तो नहीं किया जा सकता है. बस्तियां बस रही हैं और खेत लगातार छोटे होते जा रहे हैं. खाद और रसायनों का इस्तेमाल करके आख़िर कब तक कृषि भूमि का दोहन किया जा सकता है. रसायनों के ज़्यादा इस्तेमाल से खेत भी बंजर होने लगे हैं. जब तक बढ़ती आबादी पर क़ाबू नहीं पाया जाता, तब तक साधन कम ही पड़ते रहेंगे. अगर हमें जल, जंगल और ज़मीन को बचाना है, तो किसी भी हाल में बढ़ती आबादी पर रोक लगानी ही होगी. यह तभी हो सकता है, जब सख़्ती बरती जाए. सनद रहे, जनसंख्या विस्फोट एक बड़ी समस्या है. यह कहना ग़लत न होगा कि यह अनेक समस्याओं की जड़ है. सरकार को चाहिए कि वह दो से ज़्यादा बच्चे पैदा करने वालों को अनुदान जैसी हर सरकारी सुविधा से वंचित कर दे. या ऐसा ही कोई और सख़्त क़दम उठाए.

ग़ौरतलब है कि आबादी बहुत तेज़ी से बढ़ रही है. जनगणना के धर्म आधारित ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक़ साल 2001 से 2011 के बीच की दहाई में मुसलमानों की आबादी में 24.6 फ़ीसद की बढ़ोतरी हुई और उनकी आबादी 17.22 करोड़ हो गई, वहीं इसी दौरान हिंदुओं की आबादी में 16.8 फ़ीसद इज़ाफ़ा हुआ और उनकी आबादी 96.63 करोड़ हो गई. ईसाइयों की आबादी 15.5 फ़ीसद की दर से बढ़ी है. इनकी तादाद 02.78 करोड़ है. इसी तरह सिखों की आबादी 08.4 फ़ीसद बढ़ी और इनकी आबादी 02.08 करोड़ है. बौद्धों की आबादी में 06.1 फ़ीसद की बढ़ोतरी हुई है और इनकी आबादी 00.84 करोड़ है. जैन समुदाय की आबादी 5.4 फ़ीसद बढ़ी है और इनकी आबादी 00.79 करोड़ ओ गई है.

जनगणना के धर्म आधारित ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक़ बीते 10 सालों के दौरान मुसलमानों की आबादी 13.8 करोड़ से बढ़कर 17.22 करोड़ हो गई, जबकि हिंदुओं की आबादी में 0.7 फ़ीसद की गिरावट दर्ज की गई और आबादी 96.63 करोड़ हो गई. जनगणना के आंकड़े एकत्रित करने के चार साल से अधिक ज़्यादा वक़्त के बाद मंगलवार को धर्म आधारित आंकड़े जारी किए गए, वहीं जाति आधारित जनगणना के आंकड़े अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं.

महापंजीयक और जनगणना आयुक्त द्वारा जारी 2011 के धार्मिक जनगणना आंकड़ों के मुताबिक़ देश में 2011 में कुल आबादी 121.09 करोड़ थी. इसमें मुस्लिम आबादी 17.22 करोड़ (14.2 फ़ीसद) और हिंदू आबादी 96.63 करोड़ (79.8 फ़ीसद ) रही. जनसंख्या के आंकड़ों के मुताबिक़ 2001 से 2011 के बीच मुस्लिम आबादी में बढ़ोतरी हुई और हिंदू आबादी में गिरावट आई. ग़ौरतलब है कि साल 2001 के आंकड़ों के मुताबिक़ भारत की कुल आबादी 102 करोड़ थी, जिसमें हिंदुओं की आबादी 82.75 करोड़ (80.45 फ़ीसद) और मुस्लिम आबादी 13.8 करोड़ (13.4 फ़ीसद) थी. क़ाबिले-ग़ौर है कि साल 1981-1991 में मुसलमानों की आबादी बढ़ने की दर 32.9 फ़ीसद थी, जो 1991-2001 में घटकर 29.3 फ़ीसद हो गई और 2001-11 के ताज़ा आंकड़ों में ये दर घटकर 24.6 फ़ीसद हो गई है. साल 1981-1991 में हिंदुओं की आबादी बढ़ने की दर 22.8 फ़ीसद थी, जो 1991-2001 में घटकर 20 फ़ीसद हो गई और 2001-11 के ताज़ा आंकड़ों में ये दर घटकर 16.8 फ़ीसद हो गई. इस तरह से साल 1981 से मुसलमानों की बढ़ने की दर 32.9 फ़ीसद से घटकर 24.6 फ़ीसद पर आ गई, जबकि हिंदुओं की बढ़ने की दर 22.8 फ़ीसद से घटकर 16.8 फ़ीसद पर आ गई.

तस्वीर गूगल से साभार

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