बर्लिन (जर्मनी). इस्लामिक स्टेट (आईएस) के क़हर से लाखों लोग पश्चिमी एशिया छोड़कर यूरोपीय देशों में शरण ले रहे हैं. यूरोपीय देशों ख़ास जर्मनी में शरणार्थी धर्म परिवर्तन को मजबूर हैं. ऐसा करके वे यूरोपीय लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश कर रहे हैं. उनका मानना है कि ऐसा करने से वे आम यूरोपीय लोगों का भरोसा जीतने में कामयाब हो जाएंगे और आम लोगों के बीच उन्हें बेहतर ज़िन्दगी जीने में मदद मिलेगी.
धर्म परिवर्तन करने वाले ज़्यादातर लोग ईरान और अफ़ग़ानिस्तान से हैं. वहीं, सीरिया और अन्य आंतरिक युद्ध प्रभावित देशों के लोग भी ईसाई मज़हब को अपना रहे हैं. ख़ास बात तो ये है कि इनमें से ज़्यादातर लोग ईसाई मज़हब को समझने के लिए तीन माह का कोर्स भी कर रहे हैं. वैसे भी अकेले जर्मनी में इस साल आठ लाख लोगों के बतौर शरणार्थी पहुंचने की उम्मीद है.
धर्म परिवर्तन की ये ख़ास मुहिम बर्लिन के ट्रिनिटी चर्च में जारी है. धर्म परिवर्तन कर ईसाई बन रहे लोगों का मानना है कि उन्हें धर्म परिवर्तन की वजह से भविष्य में देश निकाला नहीं मिलेगा. ट्रिनिटी चर्च में ईरान से आए जत्थे में से मोहम्मत अली जनूबी कहते हैं कि धर्म परिवर्तन से वो आम लोगों में घुलमिल सकेंगे.
धर्म परिवर्तन का काम करा रहे पादरी ने जब मोहम्मत अली जनूबी से पूछा कि क्या वो धर्म परिवर्तन को तैयार हैं, तो जनूबी ने जवाब दिया, हां! वैसे, इसी हफ़्ते 20 हज़ार से अधिक लोग शरणार्थी बनकर जर्मनी पहुंचे हैं.
जर्मनी की चालंसर एंजेला मॉर्केल का कहना है कि हम लोगों की मदद करेंगे. इसके लिए जर्मनी ने 6 बिलियन डॉलर जारी किए हैं, ताकि शरणार्थियों की मदद की जा सके.

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