महिलाओं के साथ अमानवीयता के मामले में सऊदी अरब सर्वोपरि है.  सऊदी अरब एक ऐसा देश है, जहां पीड़ितों के साथ अमानवीय बर्ताव किया जाता है और दोषियों के साथ रहमदिली बरती जाती है.
यहां का क़ानून भी दरिन्दों का ही साथ देता है. सुनने में ये बात अजीब लगे, लेकिन सौ फ़ीसद सही है. अरब की एक अदालत ने बलात्कार पीड़ित एक युवती को 200 कोड़े मारने और जेल भेजे जाने की सज़ा सुनाई है. उसका क़ुसूर सिर्फ़ इतना था कि उसने अपने साथ हुए बलात्कार के बारे में मीडिया को बताया था.

19 वर्षीय शिया युवती कार में बैठी थी, तभी दो युवक आए और कार को लेकर सुनसान इलाक़े में चले गए, जहां सात लोगों ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया. जब उसने इस घटना की शिकायत पुलिस में की, तो अदालत ने सुनवाई के बाद युवती को 90 कोड़े मारने की सज़ा सुनाई. अदालत का कहना था कि युवती एक ऐसे व्यक्ति की कार में बैठी थी, जिससे उसका कोई रिश्ता नहीं था. मामले की ख़बर मीडिया में पहुंची, तो उसकी सज़ा में 110 कोड़े और बढ़ा दिए गए. 90 कोड़े मारने की सज़ा सुनने के बाद युवती ने मीडिया से बातचीत की, जिसे अदालत ने अवमानना माना और उसकी सज़ा को बढ़ा दिया है. अदालत ने कहा कि वह फ़ैसले के ख़िलाफ़ जनरल कोर्ट में जा सकती है, लेकिन उसे मीडिया से बात करने का अधिकार नहीं है.

अदालत ने बलात्कारियों के साथ रहम बरतते हुए उन्हें पांच साल की सज़ा सुनाई है, जबकि सऊदी क़ानून के मुताबिक़ ऐसे मामले में सज़ा-ए-मौत का प्रावधान है.


ग़ौरतलब है कि सऊदी क़ानून के मुताबिक़ महिलाएं परिवार के किसी पुरुष के साथ ही घर से बाहर निकल सकती हैं. बलात्कार मामले में पीड़िता को ही चार गवाह पेश करने होते हैं. अगर वह ऐसा नहीं कर पाती तो बदचलनी का आरोप लगाकर उसे ही सज़ा दी जाती है.


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