तिरुवनंतपुरम (केरल). मलप्पुरम ज़िले के शिक्षक अब्दुल मलिक स्कूल जाने के लिए रोज़ाना 100 मीटर नदी तैरकर पार करते हैं. ख़ास बात यह है कि 19 साल में उन्होंने एक बार भी ड्यूटी मिस नहीं की.
क़रीब 40 वर्षीय अब्दुल पडिंजत्तेमुरी में प्राइमरी टीचर हैं. वे बताते हैं, "नौकरी लगने के बाद मैं दो-तीन साल तक सड़क के रास्ते स्कूल गया. लेकिन इसमें 24 किलोमीटर ज्यादा दूरी तय करनी पड़ती थी. तीन बसें बदलनी पड़तीं और घर से भी जल्दी निकलना होता था. एक दिन सहकर्मी बापुत्ती की सलाह पर मैंने तैरकर स्कूल जाना शुरू किया. परिवार वाले कुछ डरे, लेकिन मुझे खुद पर भरोसा था. मैं कपड़े, टॉवेल और किताबें पॉलिथिन में बांधकर अपने साथ ले जाता हूं. नदी के उस पार पहुंचकर कपड़े बदल लेता हूं.'
अब्दुल को नदी पार करते समय स्कूल के छात्र उत्सुकता से देखते थे. ऐसे में उन्होंने उनकी उत्सुकता को अभ्यास में बदलने का फैसला किया. पहले एक-दो बच्चों ने तैरना शुरू किया, आज अब्दुल कई बच्चों को तैरने की ट्रेनिंग दे रहे हैं. छात्रों का कहना है कि अब्दुल सर ने उन्हें सेहतमंद रहना भी सिखाया है. नदी से वर्षों पुराना नाता रहा तो उन्होंने इसे साफ़ रखने का भी फ़ैसला किया. अब्दुल अपने छात्रों के साथ स्कूल आते-जाते नदी से कचरा-पॉलिथिन भी साफ़ करते हैं. लोगों को भी ऐसा करने का संदेश देते हैं.
अब्दुल ने राजनेताओं का ध्यान भी अपनी ओर खींचा. उन्हें सम्मानित भी किया, लेकिन वे इस नदी पर पुल बना पाने में अपनी मजबूरी बताते हैं. स्थानीय पंचायत का कहना है कि इस नदी पर पहले ही तीन पुल हैं. जिस रास्ते से अब्दुल जाते हैं, वहां से ज़्यादा आवाजाही नहीं है. ऐसे में नया पुल बनाना फिलहाल मुमकिन नहीं है.
ग़ौरतलब है कि अब्दुल साल 2029 में नौकरी से रिटायर होंगे. उनका अनुमान है कि तब तक वे क़रीब 1000 घंटे पानी में बिता चुके होंगे. 35 साल की नौकरी में क़रीब 700 किलोमीटर की दूरी तैर कर पार कर चुके होंगे, जो इंग्लैंड और फ्रांस के बीच इंग्लिश चैन की दूरी के बराबर होगा. तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता उन्हें सम्मानित कर चुकी हैं.

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