फ़िरदौस ख़ान
देश की नदियां दिनोदिन प्रदूषित होती जा रही हैं. जल प्रदूषण रोकने के लिए क़ानून तो बने, लेकिन उन पर अमल नहीं किया गया. मुंबई का कचरा समुद्र और कालू नदी में बहाया जा रहा है. इसी तरह दिल्ली की गंदगी यमुना, कोलकाता की हुगली और दामोदर में, चेन्नई की कुअम में, बनारस, हरिद्वार, कानपूर की गंदगी गंगा में डाली जा रही है. नतीजतन, गंगा, यमुना, कृष्णा, कावेरी, नर्मदा, गोदावरी सहित देश की 27 नदियां जल प्रदूषण की चपेट में हैं. जल प्रदूषण सेहत के लिए बेहद ख़तरनाक है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ दुनिया भर में हर साल डेढ़ करोड़ लोग प्रदूषित जल के कारण मौत के शिकार हो जाते हैं. भारत में प्रति लाख पर तक़रीबन 360 लोगों की मौत हो जाती है. अस्पतालों में दाख़िल होने वाले मरीज़ों में से 50 फ़ीसद मरीज़ ऐसे होते है, जिनकी बीमारी की वजह दूषित पानी होता है. अविकसित देशों की हालत तो और भी ज़्यादा बुरी है, क्योंकि यहां 80 फ़ीसद बीमारियों का कारण दूषित पानी है. जल प्रदूषण से इंसान ही नहीं, जलीय जीव-जंतु, जलीय पादप और पशु-पक्षी भी बुरी तरह प्रभावित होते हैं.
जल प्रदूषण का असर लोगों की रोज़मर्राह की ज़िन्दगी पर भी पड़ रहा है. हाल में यमुना के पानी में अचानक अमोनिया की मात्रा बढ़ने की वजह से दिल्ली के वज़ीराबाद और चंद्रावल जल शोधन संयंत्रों को बंद कर बंद करना पड़ा. इन संयंत्रों के बंद होने से 222 एमजीडी (मिलियन गैलन प्रतिदिन) पेयजल की आपूर्ति रुक गई. वज़ीराबाद जल शोधन संयंत्र की क्षमता 124 एमजीडी और चंद्रावल जल शोधन संयंत्र की क्षमता 98 एमजीडी है.
इसकी वजह से दिल्ली के एनडीएमसी सहित उत्तरी दिल्ली, उत्तर-पश्चिम दिल्ली, मध्य दिल्ली और पश्चिमी और दक्षिणी दिल्ली के कई इलाक़े प्रभावित हो गए, जिनमें चांदनी चौक, आज़ाद मार्केट, सदर बाज़ार, दरियागंज,  जामा मस्जिद, सिविल लाइंस, सुभाष पार्क, मुखर्जी नगर, शक्ति नगर, आदर्श नगर, मॉडल टॉउन, जहांगीरपुरी, वज़ीरपुर इंडस्ट्रीयल एरिया, पंजाबी बाग़, गुलाबी बागग़, हिन्दूराव, झंडेवालान, मोतिया ख़ान, पहाड़गंज, करोलबाग़, ओल्ड राजेंद्र नगर, नया बाज़ार, ईस्ट और वेस्ट पटेल नगर, मल्कागंज और वज़ीराबाद आदि शामिल हैं.

दिल्ली जल बोर्ड के मुताबिक़ पानीपत ड्रेन से प्रदूषित पानी नदी में गिरने की वजह से अमोनिया की मात्रा बढ़ गई. ग़ौरतलब है कि अमोनिया एक तीक्ष्ण गंध वाली रंगहीन गैस है. यह हवा से हल्की होती है और इसका वाष्प घनत्व 8.5 है. यह जल में अति विलेय है. अमोनिया के जलीय घोल को लिकर अमोनिया कहा जाता है. यह प्रकृति क्षारीय होती है. कई रसायनों और रासायनिक खादों को बनाने में अमोनिया का इस्तेमाल किया जाता है. बर्फ़ के कारख़ाने में शीतलक के रूप में अमोनिया का इस्तेमाल होता है. अमोनिया गैस बहुत ज़हरीली होती है. इसे सूंघने पर इंसान की जान तक जा सकती है.

इससे पहले जनवरी और 27 दिसंबर में भी यमुना में अमोनिया की मात्रा बढ़ गई थी, जिससे वज़ीराबाद और चंद्रावल जल शोधन संयंत्रों को बंद कर गया था. दिल्ली के बहुत से इलाक़े जल संकट से जूझ रहे हैं. पिछले काफ़ी अरसे से जो जल आपूर्ति की जा रही है, उसका पानी पीने के क़ाबिल नहीं है. पानी को कुछ देर रखने के बाद देखें, तो बर्तन की तली में गंदगी की एक पर्त जम जाती है. जो लोग पैसे वाले हैं, उन्होंने आरओ लगवा रखे हैं, कुछ लोग बाज़ार से पानी की बोतलें ख़रीदते हैं. जो ये सब नहीं कर सकते, वो पानी को उबालकर, छानकर इस्तेमाल कर रहे हैं. महिलाओं का कहना है कि गैस भी कोई सस्ती नहीं है. पानी गर्म करने की वजह से उनका सिलेंडर जल्द ख़त्म हो जाता है.

यमुना में अमोनिया का स्तर बढ़ने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने दिल्ली जल बोर्ड को फटकार लगाते हुए जवाब तलब किया था. एक रिपोर्ट के आधार पर ग्रीन बेंच ने दिल्ली जल बोर्ड से पूछा था कि अमोनिया स्तर बढ़ने के मामले पर आपका पक्ष क्या है? इस संबंध में अभी तक आपने क्या किया? बोर्ड के वकील इन सवालों का संतोषजनक जवाब न दे सके. इसके बाद बेंच ने पर्यावरण मंत्रालय, जल संसाधन मंत्रालय और दिल्ली जल बोर्ड के आला अधिकारियों को तलब किया था.  बेंच ने इस मामले में निर्मल यमुना पुनरुद्धार योजना-2017 के चेयरमैन एवं दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ को भी तलब किया था. क़ाबिले-ग़ौर है कि निर्मल यमुना पुनरुद्धार योजना के लिए बनाई गई प्रधान समिति में पर्यावरण मंत्रालय के सचिव, जल संसाधन मंत्रालय के संयुक्त सचिव, दिल्ली के मुख्य सचिव, डीडीए के वाइस चेयरमैन, दिल्ली नगर निगमों के कमिश्नर्स, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के राज्य सचिव को शामिल किया गया था. पिछले दिनों आई एक रिपोर्ट में कहा गया था कि यमुना में अमोनिया का स्तर 2 से 2.5 पार्ट्स प्रति मिलियन (पीपीएम) पाया गया है. इसके बाद दिल्ली जल मंत्री कपिल मिश्रा ने केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती को पत्र लिखकर बताया था कि अगर अमोनिया की मात्रा 0.5 पीपीएम या उससे ज़्यादा हुई, तो यह पानी सेहत के लिए काफ़ी नुक़सानदएह हो सकता है. अगर उच्च अमोनिया युक्त पानी में शोधन के लिए क्लोरीन मिलाया जाए, तो यह कैंसर पैदा कर सकता है.

एनजीटी ने बीते साल दिल्ली सरकार और संबंधित प्राधिकरणों से यमुना के शोधन मामले में एसटीपी, सीईटीपी के लिए ख़र्च की गई रक़म का हिसाब मांगा था. वहीं दिल्ली जल बोर्ड ने बताया था कि उसका सालाना बजट 1400 करोड़ रुपये का है. यमुना की सफ़ाई के तमाम सरकारी दावों के बावजूद यह नदी एक गंदे नाले में तब्दील हो चुकी है. कुछ ही दिनों बाद गर्मी का मौसम शुरू हो जाएगा. दिल्ली को ज़्यादा पानी की ज़रूरत होगी. अगर यही हाल रहा, तो एक प्रदूषित यमुना लोगों के गले कैसे तर कर पाएगी.

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