फ़िरदौस ख़ान
उत्तराखंड में सिर्फ़ कांग्रेस की ही जीत नहीं हुई है, बल्कि यहां लोकतंत्र की जीत हुई है, जनता की भावनाओं की जीत हुई है. देवभूमि की जनता ने लोकतांत्रिक तरीक़े से कांग्रेस को चुना था, उसे सत्ता सौंपी थी. लेकिन विपक्ष में बैठी भारतीय जनता पार्टी ने साज़िश करके राज्य में राष्ट्रपति शासन लगवा दिया. कांग्रेस ने हार नहीं मानी और अपना संघर्ष जारी रखा. आख़िरकार जीत सच की ही हुई. राज्य में कांग्रेस फिर से सत्ता में आ गई है. इससे जहां कांग्रेस ख़ेमे में जश्न का माहौल है, वहीं भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा है और पार्टी की ख़ासी किरकिरी भी हुई है.

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर कल राज्य विधानसभा में शक्ति परीक्षण कराया गया था, जिससे कांग्रेस सरकार की बहाली तय मानी जा रही थी, सिर्फ़ औपचारिक ऐलान बाक़ी था. सर्वोच्च न्यायालय ने आज शक्ति परीक्षण के नतीजे का ऐलान कर दिया. अदालत ने बताया है कि हरीश रावत के पक्ष में 33 विधायकों ने मतदान किया, जबकि भाजपा के पक्ष में 28 विधायकों ने अपना मत दिया. क़ाबिले-ग़ौर है कि शक्ति परीक्षण के दौरान अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल को छोड़कर सभी 61 विधायकों ने हाथ उठाकर अपने वोट दर्ज कराए. हालांकि मतदान के बाद बाहर आकर कांग्रेस और भाजपा विधायकों ने साफ़ इशारा कर दिया था कि कांग्रेस के पक्ष में 33 और भाजपा के पक्ष में 28 मत पड़े हैं. कांग्रेस और भाजपा दोनों के विधायकों ने कहा कि दोनों दलों के एक-एक विधायक ने क्रॊस मतदान किया. घनसाली से भाजपा विधायक भीम लाल आर्य ने रावत के समर्थन में मतदान किया, जबकि सोमेश्वर से कांग्रेस विधायक ने विश्वास मत के विरोध में अपना वोट दिया था.

अदालत में केंद्र सरकार ने यू टर्न लेते हुए कहा कि राज्य से राष्ट्रपति शासन हटाया जाएगा. इसी के साथ मामले ख़त्म हो गया है, लेकिन अदालत ने कहा है कि मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी. अदालत ने केंद्र सरकार को राष्ट्रपति शासन हटाने की मंज़ूरी दे दी है. अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति शासन हटने के बाद हरीश रावत बतौर मुख्यमंत्री अपना दायित्व संभाल सकते हैं. साथ ही राष्ट्रपति शासन हटाने के आदेश की प्रति अदालत में रखने का निर्देश दिया. इसके फ़ौरन बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई, जिसमें उत्तराखंड से राष्ट्रपति शासन हटाने की सिफ़ारिश करने का फ़ैसला लिया गया.
 ग़ौरतलब है कि राज्य में 27 मार्च को राष्ट्रपति शासन लगाया गया था, जिसे पहले नैनीताल उच्च न्यायालय की एकल पीठ और फिर दो न्यायाधीशों की पीठ ने हटाने और हरीश रावत को बहुमत साबित करने का निर्देश दिया था. इसे केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी. सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले का हल निकालने के लिए विधानसभा में शक्ति परीक्षण कराने का निर्देश दिया था. इस शक्ति परीक्षण में बहुजन समाज पार्टी और पीडीएफ़ ने हरीश रावत का साथ दिया.
हरीश रावत का कहना है कि वह सारी बातें भूलकर नई शुरुआत करेंगे. उन्होंने शक्ति परीक्षण में साथ देने के लिए बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मुख्यमंत्री का भी आभार जताया है.

राज्य में कांग्रेस की जीत पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए इसे लोकतंत्र की बताया है. कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा राज्य की निर्वाचित सरकार को गिराने की हर मुमकिन कोशिश के बाद उत्तराखंड में लोकतंत्र की जीत हुई है. उम्मीद है कि इस नतीजे से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पार्ती की हार से सबक़ मिल गया लेंगे. उन्होंने कहा कि देश की जनता हमारे पुरोधाओं द्वारा निर्मित लोकतंत्र नामक संस्था का क़त्ल बर्दाश्‍त नहीं करेगी. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी इसे उत्तराखंड में लोकतंत्र की जीत क़रार दिया है. 

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