वॉशिंगटन. पहली मुस्लिम मिस यूएसए का खिताब जीतने वाली रीमा फकीह इस्लाम धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपनाने जा रही हैं. उन्हें 2010 में मिस यूएसए का ख़िताब मिला था. उन्होंने ट्विटर पर इसकी घोषणा की है.
मूल रूप से लेबनान की रीमा फकीह ने अपने प्रेमी वसीम सलीबी से शादी करने के लिए इस्लाम धर्म छोड़ा है. उनके प्रेमी भी ईसाई हैं और पेशे से म्यूजिक प्रड्यूसर हैं. उन्होंने न्यू टेस्टामेंट से एक वर्स भी ट्विटर पर शेयर किया है.

जब उन्होंने मिस यूएसए का ख़िताब जीता था, तो अपनी स्पीच में कहा था, मैं कहना चाहती हूं कि मैं सबसे पहले अमेरिकी हूं. मैं अरब-अमेरिकन, लेबनीज-अमेरिकन और मुस्लिम अमेरिकन हूं.
फकीह अपने कॉलेज के दिनों में मुस्लिम धर्म से जुड़ पाईं. मिस फकीह ने बताया- मैं अपने कॉलेज के दिनों में इस्लाम को क़रीब से जान पाई. जब मैं मिशिगन यूनिवर्सिटी गई, तो मुझे रमज़ान और अन्य बहुत सी चीज़ों के बारे में ज़्यादा कुछ नहीं पता था. मिशिगन यूनिवर्सिटी में मुस्लिम समुदाय की मौजूदगी काफ़ी संख्या में है, इसलिए मेरे पिता चाहते थे कि मैं इस अवसर का लाभ उठाते हुए इस्लाम को अच्छी तरह समझूं.

फकीह शिया परिवार में बड़ी हुई हैं. पूर्व मिस यूएसए ने कहा कि धर्म के मामले में उनके परिवार का दृष्टिकोण उदार है. उन्होंने मुस्लिम और ईसाई धर्म में से एक का पक्ष लेने से इनकार करते हुए कहा कि वह दोनों धर्म के त्योहार मनाएंगी.
उन्होंने कहा- धर्म मुझे और मेरे परिवार को परिभाषित नहीं करता है. हम सभी धर्मों का समान रूप से सम्मान करते हैं. हम ईस्टर पर चर्च जाया करते थे. हम हमेशा क्रिसमस सेलिब्रेट करते थे. इसके साथ ही इस्लाम के कुछ त्योहार भी मनाते थे.

उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई बेरूत के नज़दीक कैथोलिक स्कूल में की थी. उनकी बड़ी बहन के पति भी ईसाई हैं. उनकी बहन और उनके दो बच्चों ने भी ईसाई धर्म अपना चुके हैं.
मिस अमेरिका का ख़िताब जीतने के बाद फकीह तब काफ़ी विवादों में आ गई थीं, जब एक रेडियो स्टेशन के स्ट्रिपर 101 कॉन्टेस्ट की उनकी कुछ तस्वीरें वायरल हो गई थीं. साल 2012 में उन्हें शराब पीकर ड्राइविंग करने का भी आरोप लगा था.

एक नज़र

कैमरे की नज़र से...

Loading...

ई-अख़बार

Like On Facebook

Blog

  • फ़ासला रहे तुमसे... - *फ़्रिरदौस ख़ान* गुज़श्ता वक़्त का वाक़िया है... हमारे घर एक ऐसे मेहमान को आना था, जिनका ताल्लुक़ रूहानी दुनिया से है... हम उनके आने का बड़ी बेसब्री से इंतज़ार कर ...
  • सबके लिए दुआ... - मेरा ख़ुदा बड़ा रहीम और करीम है... बेशक हमसे दुआएं मांगनी नहीं आतीं... हमने देखा है कि जब दुआ होती है, तो मोमिनों के लिए ही दुआ की जाती है... हमसे कई लोगों न...
  • लोहड़ी, जो रस्म ही रह गई... - *फ़िरदौस ख़ान* तीज-त्यौहार हमारी तहज़ीब और रवायतों को क़ायम रखे हुए हैं. ये ख़ुशियों के ख़ज़ाने भी हैं. ये हमें ख़ुशी के मौक़े देते हैं. ख़ुश होने के बहाने देते हैं....

एक झलक

Search

Subscribe via email

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

इसमें शामिल ज़्यादातर तस्वीरें गूगल से साभार ली गई हैं