फ़िरदौस ख़ान
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी फ़िलहाल अमेरिका के दौरे पर हैं. उन्होंने बुधवार रात न्यूयॉर्क के ऐतिहासिक टाइम्स स्क्वायर के पास एक होटल में भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित किया. ग़ौरतलब है कि वे इससे पहले प्रिंसटन और बर्कले यूनिवर्सिटी में भी भाषण दे चुके हैं. राहुल गांधी अपने भाषण में  जहां भारत से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं, वहीं उनका हल भी बता रहे हैं. वे बता रहे हैं कि किस तरह बेरोज़गारी और सांप्रदायिकता जैसी समस्याओं से निपटा जा सकता है, किस तरह देश का विकास किया जा सकता है. किस तरह देश दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बना सकता है.
टाइम्स स्क्वायर में अप्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा,
मैं मंच पर मौजूद सभी लोगों का स्वागत करता हूं और इस हॉल में मौजूद आप में से हर एक का स्वागत करता हूं.
आपको पता है कि कई साल पहले सैम भारत आए थे और उन्होंने अभी आपको इंदिरा गांधी जी द्वारा उनके प्रेजेंटेशन को सुनने की बात बताई. मुझे लगता है, सैम ने 1982- 1979 की बात है. मुझे लगता है कि आप दोबारा 1982 में आएं. तो वे 1982 में जब आए, तो उस वक़्त मैं 12 साल का था और एक सुबह मेरे पिता ने मुझसे कहा कि एक प्रेज़ेंटेशन होने वाला है और तुम्हें आना है.
तब प्रेज़ेंटेशन क्या होता है, मुझे ये नहीं पता था. मैंने सोचा कि मुझे कोई ईनाम मिलेगा. ख़ैर, मैं वहां गया और मेरी बहन और मैं कमरे में पीछे की तरफ़ चुपचाप बैठ गए. और हम वहां 6 घंटे तक बैठे रहे. और सैम और मेरे पिता कंप्यूटर पर चर्चा करते रहे. मुझे नहीं पता था कि ये कंप्यूटर क्या चीज़ है. हक़ीक़त में 1982 में कोई भी नहीं जानता था कि कंप्यूटर होता क्या है. मेरे लिए ये एक बॉक्स था, जिसमें टीवी स्क्रीन लगी हुई थी. मेरे लिए यह उस पर एक टीवी स्क्रीन के साथ एक छोटे से बॉक्स की तरह दिखता था. और सच कहूं तो मुझे वो प्रेज़ेंटेशन पसंद नहीं आया, क्योंकि बच्चे के तौर पर मुझे वहां 6 घंटे तक बैठना अच्छा नहीं लगा. और 4-5 साल बाद मैंने उस प्रेज़ेटेशन का नतीजा देखना शुरू किया. प्रधानमंत्री कार्यालय में टाईप राइटर होता था और हर कोई टाईप राइटर का इस्तेमाल करना चाहता था.
सैम और मेरे पिता ने पीएमओ में कहा कि अब हमें कंप्यूटर का इस्तेमाल करना होगा. और हर किसी ने उस वक़्त कहा,  नहीं. हमें अपना टाईप राइटर ही पसंद है, हमें कंप्यूटर नहीं चाहिए. तब सैम और मेरे पिता ने अपनी विशिष्ट शैली में कहा कि ठीक है. आप अपना टाईप राइटर रखें, लेकिन जो हम करना चाहते हैं, वो एक महीने के लिए टाईप राइटर की जगह कंप्यूटर का इस्तेमाल है. और एक महीने के बाद हम आपको आपका टाईप राइटर वापस दे देंगे. उन लोगों ने उन्हें एक महीने के लिए कंप्यूटर दिया और एक महीने बाद उन लोगों ने कहा कि ठीक है. अब हम आपको आपका टाईप राइटर वापस लौटा रहे हैं, तब हर किसी ने लड़ना शुरू कर दिया कि नहीं, हमें अब टाईप राइटर वापस नहीं चाहिए, हमें कंप्यूटर चाहिए.

विचारों को भारत में आने में वक़्त लगता है, लेकिन जब विचार अच्छा हो, तो भारत उसे तेज़ी से समझता है और उसे तेज़ी से अपनाता है. और दुनिया को दिखा देता है कि इसका बेहतर ढंग से इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है. मैं कार में सैम से बात कर रहा था और मैंने उन्हें एक बात कही और उन्होंने कहा कि ओह !
मैंने तो इसके बारे में कभी सोचा ही नहीं. आप सभी एनआरआई हैं. कांग्रेस आंदोलन, मूल कांग्रेस आंदोलन, एक एनआरआई आंदोलन था.  महात्मा गांधी एक प्रवासी भारतीय थे.  जवाहरलाल नेहरू इंग्लैंड से वापस लौटे थे. अम्बेडकर,  आज़ाद, पटेल ये सभी एनआरआई थे. उनमें से हर कोई बाहरी दुनिया में गया था. बाहरी दुनिया को देखा था.  भारत वापस लौट आया और जो कुछ विचार उन्हें हासिल हुआ, उससे भारत को बदल दिया. मैं इससे भी आगे जाऊंगा. भारत में सबसे बड़ी कामयाबी, हालांकि भाजपा के मित्र कहते हैं कि कुछ भी नहीं हुआ, लेकिन भारत में हमारी सबसे बड़ी सफ़लताओं में से एक दुग्ध क्रांति है. भारत में अधिकांश लोग दूध पीते हैं, उसे कुरियन नाम के व्यक्ति जो खुद एनआरआई थे, ने मुमकिन कर दिखाया. वे अमेरिका से वापस आए और उन्होंने भारत को बदल दिया.
सैम एक और मिसाल हैं. और इस तरह की हज़ारों-हज़ार मिसालें हैं, जिनके बारे में हमें पता नहीं है. तो इससे पहले कि मैं अपने भाषण की गहराई में जाऊं.  मैं आपको बताना चाहता हूं कि मैं सेंट फ्रांसिस्को, लॉस एंजिल्स, वाशिंगटन, न्यूयॉर्क में गया. मैंने प्रिंसटन और बर्कले में लोगों को संबोधित किया और जहां भी मैं गया, आप लोगों की वजह से मुझे एक हिन्दुस्तानी होने पर गर्व महसूस हुआ. इस देश में आप लोग हर जगह हैं. यहां भारतीय व्यक्ति है, जो अमेरिका के लिए काम कर रहा है. भारत के लिए काम कर रहा है, शांति से रह रहा है और इस देश और भारत देश का निर्माण कर रहा है.
तो मैं आपको यह बताकर अपनी बात की शुरुआत करना चाहता हूं कि हक़ीक़त में आप हमारे देश की रीढ़ हैं.
कुछ लोग भारत को एक भौगोलिक संरचना के तौर पर देखते हैं. वे भारत को ज़मीन के एक टुकड़े के रूप में देखते हैं. मैं भारत को ज़मीन के एक टुकड़े के रूप में नहीं देखता. मैं भारत को विचारों के एक समूह के तौर पर देखता हूं. तो मेरे लिए, कोई भी व्यक्ति, जो भारत के विचारों को तैयार करता है, वह भारतीय है. हमारे देश में कई सारे मज़हब हैं. हमारे देश में कई सारी अलग-अलग भाषाएं हैं. उनमें से हर कोई मिलजुल कर ख़ुशी से रहता है. और वे ऐसा करने में इसलिए कामयाब हुए हैं, क्योंकि इसकी वजह कांग्रेस पार्टी के विचार हैं.
सैम पित्रोदा ने अभी कहा कि कांग्रेस 130 साल पुरानी है. ये सही बात है. कांग्रेस का संगठन 100 साल से थोड़ा ज़्यादा पुराना है. लेकिन भारत में कांग्रेस के विचार हज़ारों साल पुराने हैं.
सैम ! हम सिर्फ़ एक संगठन का प्रतिनिधित्व नहीं करते, बल्कि हम एक दर्शन का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो हज़ारों साल पुराना है. और मैं आपको थोड़ा बताता हूं कि वो दर्शन क्या है? गांधी जी ने हक़ीक़त में किसके लिए लड़ाई लड़ी? हमारा स्वतंत्रता संग्राम किस लिए था? कुरियन जी ने क्या काम किया?
सैम पित्रोदा ने क्या किया और हज़ारों प्रवासी भारतीयों ने क्या किया? ये सभी सच के लिए खड़े हुए. इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि उनके सामने क्या खड़ा है. जब वे किसी चीज़ पर भरोसा करते हैं और उन्हें यक़ीन होता है कि ये सच है, तो वे इसके लिए खड़े हो जाते हैं और इसके लिए उन्हें क़ीमत चुकानी पड़ती है. यही कांग्रेस का विचार है.
मेरे इस सफ़र के दौरान मैंने काफ़ी बातचीत की. मैं प्रशासन के काफ़ी लोगों से मिला. मैंने डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों पार्टियों के लोगों से मुलाक़ात की. मैं कई दोस्तों से मिला.  एनआरआई दोस्तों से मिला. और मैं आपको बताना चाहता हूं कि मैं हैरान रह गया, क्योंकि इससे पहले कि मैं उन्हें कुछ बता पाता कि मैं किस बारे में चिंतित हूं, उन लोगों ने मुझे ठीक वही बात कह दी. और सबसे बड़ी बात ये थी कि ज़्यादातर लोगों ने मुझे बताया कि भारत में प्रबल रहने वाली सहिष्णुता का क्या हुआ? भारत में सद्भावना का क्या हुआ?
कई सारी चुनौतियां हैं, जिनका भारत को सामना करना पड़ रहा है. सबसे बड़ी चुनौती, और मैं आपको इसके आंकड़े दूंगा. हर दिन 30 हज़ार युवा नौकरी बाज़ार में शामिल होते हैं.इसका मतलब है कि 24 घंटे में 30 हज़ार नये भारतीय नौकरी के लिए बाज़ार में आते हैं. आज उनमें से केवल 450 को ही नौकरी मिल रही है. मैं बेरोज़गारों के बारे में बात नहीं कर रहा हूं. मैं बता रहा हूं कि हर एक दिन 30 हज़ार नये लोग आते हैं और सिर्फ़ 450 लोगों को ही नौकरी मिलती है. हमारे देश के सामने ये सबसे बड़ी चुनौती है. और इस चुनौती को लोगों को एकजुट करने और इस समस्या का समाधान करके एकीकृत दृष्टिकोण के निर्माण से संबोधित किया जा सकता है.
हम भारत में हर किसी चीज़ पर चर्चा करते हैं. भारत में बांटने वाली राजनीति चल रही है, लेकिन भारत का सामना जिस असली चुनौती से है, वो नौकरी के लिए आने वाले 30 हज़ार युवाओं और उनमें से केवल 450 को नौकरी मिलने को लेकर है.
अगर ऐसे ही चलता रहा, तो आप कल्पना कर सकते हैं कि क्या नतीजे होंगे. भारत अगर अपने युवाओं को रोज़गार नहीं दे पाता, तो वो उन्हें कोई दृष्टिकोण नहीं दे सकता. इस समस्या को हल करने के लिए कांग्रेस पार्टी के पास दूरदृष्टि है. और मैं इस विज़न के बारे में थोड़ा आपको बताना चाहता हूं.
इस वक़्त पूरा फ़ोकस 50-60 काफ़ी बड़ी कंपनियों पर है. मेरा मानना है कि अगर आपको भारत में लाखों-करोड़ों रोज़गार पैदा करने हैं, तो ये छोटे और मध्यम कारोबार को सशक्त बनाकर ही किया जा सकता है. ये काम उद्यमियों को सशक्त बनाकर किया जा सकता है. दूसरा, मैं आपको एक और आंकड़ा बताता हूं. भारत में 40 फ़ीसद सब्ज़ियां सड़ जाती हैं. कृषि को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए. यहां पंजाब के लोग भी हैं.
आप समझ सकते हैं कि मैं हक़ीक़त में क्या कह रहा हूं. कृषि हमारी सामरिक संपत्ति है. हमें कृषि का विकास करने की ज़रूरत है. हमें शीत भंडारण श्रृंखला विकसित करने की ज़रूरत है. हमें खेतों के पास फ़ूड प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की ज़रूरत है और हमें भारतीय कृषि को सशक्त बनाने की ज़रूरत है. अगर हम अपने किसानों को सशक्त बनाते हैं, तो हमें लाखों नौकरियां मिल सकती हैं.
स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं बदलने वाली हैं और बर्कले में मैंने अपने भाषण में ये बात कही थी. आज स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी सभी जानकारियां डॉक्टरों को याद हैं. आने वाले कल में ये सारी जानकारियां कंप्यूटर पर होने जा रही हैं. भारत में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है. हम हृदय शल्य चिकित्सा, नेत्र शल्य चिकित्सा सहित काफ़ी तादाद में शल्य क्रियाएं करते हैं. हमें इन सबकी गहरी समझ है कि इन्हें कैसे किया जा सकता है. स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भारत के लिए बड़ा मौक़ा है. हम दुनिया के स्वास्थ्य सेवा केंद्र बन सकते हैं. लेकिन हमें आज इसके लिए योजना बनानी होगी. और मैं केवल स्वास्थ्य पर्यटन के बारे में बात नहीं कर रहा हूं. मैं ऐसी मान्यता प्रणाली के निर्माण के बारे में बात कर रहा हूं, जिससे भविष्य में चिकित्सा प्रक्रियाओं का बड़ा हिस्सा हमारे देश में किया जाएगा.
मैं आईआईटी के लिए भी इसी तरह का दृष्टिकोण आपको बता सकता हूं. मैं बर्कले में गया. कल मैं प्रिंस्टन में था. अमेरिकी विश्वविद्यालय ज्ञान नेटवर्क हैं. सूचनाएं उनके भीतर दौड़ती हैं. वे कारोबार से जुड़े हुए हैं, वे अर्थव्यवस्था से जुड़े हुए हैं. हमारे आईआईटी शानदार संस्थान हैं, लेकिन वे नेटवर्क नहीं हैं. अगर हम अपने आईआईटी को अपने उद्योगों से जोड़ते हैं, अगर हम अपने आईआईटी को दुनियाभर के कारोबारों से जोड़ते हैं, तो वे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों के साथ प्रतिस्पर्धा करना शुरू कर देंगे. ये सारी चीज़एं हैं, जो की जा सकती हैं.
लेकिन मैं वापस अपने भाषण की शुरुआत में जाना चाहता हूं. आपको शामिल होने की ज़रूरत है. आपके पास ज़बरदस्त ज्ञान है, आपके पास शानदार समझ है, आप विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हैं. मैं आपको आगे आने और आगे बढ़ने के दृष्टिकोण पर कांग्रेस पार्टी के साथ काम करने के लिए आमंत्रित करना चाहता हूं. हम आपकी मदद लेना चाहते हैं और देखिए, सैम पित्रोदा ने अकेले दूरसंचार उद्योग को बदल कर रख दिया.हम एक सैम पित्रोदा को नहीं चाहते. हम कम से कम 10-15 सैम पित्रोदा चाहते हैं, क्योंकि भारत में काफ़ी काम करना है. अख़िर में मैं आपसे कहना चाहता हूं कि भारत ने हमेशा दुनिया को दिखाया है कि भाईचारे के साथ कैसे रहना है.
भारत हज़ारों सालों से एकता और शांति के साथ रहने के लिए दुनियाभर में जाना जाता है. इसे चुनौती दी जा रही है. हमारे देश में ऐसी ताक़तें हैं, जो देश को बांट कर रही हैं और देश के लिए यह बहुत ख़तरनाक है. और ये विदेशों में हमारी साख को बर्बाद कर रही हैं.
डेमोक्रेटिक पार्टी के, रिपब्लिकन पार्टी के काफ़ी सारे लोगों ने मुझसे पूछा कि हमारे देश में क्या हो रहा है. हम हमेशा विश्वास करते थे कि आपका देश एकजुटता से काम करता है. हम हमेशा मानते थे कि आपका देश शांतिपूर्ण है, आपके देश में क्या हो रहा है? और इसी चीज़ के ख़िलाफ़ हमें लड़ना है. दुनिया में भारत की प्रतिष्ठा बेहद अहम है. दुनिया बदल रही है और लोग हमारी तरफ़ देख रहे हैं. चीन उभर रहा है, अमेरिका के साथ हमारे संबंध हैं. हिंसक दुनिया के कई देश भारत की तरफ़ देख रहे हैं, और कह रहे हैं कि इक्कीसवीं सदी में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का जवाब भारत दे सकता है. इसलिए हम अपनी सबसे ताक़तवर संपत्ति खो नहीं सकते. हमारी सबसे बड़ी संपत्ति ख़ुशी, शांति और प्यार से रहने वाली 130 करोड़ जनता है. और पूरी दुनिया ने हमें इस चीज़ के लिए सम्मान दिया है. और यही वो चीज़ है, जिसे हम कांग्रेस के लोग, हममें से हर एक को बचाना है.एक देश के रूप में भारत सभी लोगों के लिए है. इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि वे कौन हैं, मैं अपने सिख भाइयों को देख सकता हूं, मैं विभिन्न राज्यों के लोगों को देख सकता हूं.
भारत अकेले आप में से किसी से संबंधित नहीं है, बल्कि भारत इस पूरे कमरे से जुड़ा हुआ है. भारत का रिश्ता हम सभी से है और यही कांग्रेस पार्टी है. मैं एक बार फिर से आप सभी का बहुत धन्यवाद करना चाहता हूं.
और मैंने सैम को बताया है, सैम ! आप जब भी चाहें कि मैं अमेरिका आऊं, आप जहां कहीं भी मुझे बुलाना चाहें बस मुझे एक फ़ोन कर दें, मैं हाज़िर हो जाऊंगा. और आख़िरी बात मैंने आज सैम को बताया.
उन्होंने तस्वीरों के बारे में कहा और मैंने कुछ सीखा है. सैम, हमारे यहां व्यक्तिगत तस्वीरें चलती हैं, तो मुझे लगता है कि अगली बार हमारे पास काफ़ी वक़्त होगा, ताकि हम एक दूसरे के साथ सेल्फ़ी और फ़ोटो ले सकें.
आपका बहुत धन्यवाद.
आप सभी को शुभकामनाएं


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