फ़िरदौस ख़ान
कहते हैं, ज़बान शीरी, तो मुल्कगिरी यानी जिसकी ज़बान में मिठास होती है, वो मुल्क पर हुकूमत करता है. भाषा का दरख़्त दिल में उगता है और ज़ुबान से फल देता है. जैसा दरख़्त होगा, वैसे ही उसके फल होंगे.  इंसान की पहचान ग़ुस्से की हालत में ही होती है यानी ग़ुस्से में वह सब कह देता है, बोल देता है, जो उसके दिल में होता है, ग़ुस्से में इंसान का अपने दिमाग़ पर क़ाबू नहीं होता. किसी भी इंसान की भाषा उसके किरदार का आईना हुआ करती है. उसकी भाषा से, उसके शब्दों से न सिर्फ़ उसके विचारों का पता चलता है, बल्कि उसके संस्कार भी प्रदर्शित हो जाते हैं. अच्छे लोग, संस्कारी लोग ग़ुस्से में भी अपशब्दों को इस्तेमाल नहीं करते.

दरअसल, भाषा एक आग है. वह सभ्यता की बुनियाद है, तो बर्बादी की जड़ भी है. भाषा बहता शीतल जल भी है, जो वीरानों को आबाद कर देता है, उनमें फूल खिला देता है. भाषा सैलाब भी है, जो अपने साथ न जाने कितनी आबादियां बहा ले जाता है. ख़ुशहाल बस्तियों को वीरानियों में बदल देता है. ये इंसान के अपने हाथ में है कि वह भाषा रूपी इस आग का, इस पानी का किस तरह इस्तेमाल करता है. ये भाषा ही तो है, जो दोस्तों को दुश्मन बना देती है और दुश्मनों को दोस्त बना लेती है. ये भाषा ही तो है, जिसके ज़ख़्म कभी नहीं भरते, हमेशा हरे रहते हैं, जबकि बड़े से बड़े ज़ख़्म भर जाते हैं, तीर-तलवार के ज़ख़्म भी वक़्त के साथ कभी न कभी भर जाया करते हैं.

भारत जैसे देश में जहां पत्थर तक को पूजा जाता है, तिलक लगाकर उसका अभिनंदन किया जाता है,  जहां कण-कण में ईश्वर के अस्तित्व को माना जाता है, वहां अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल हज़ारों बरसों की संस्कृति पर कुठाराघात करता है. बेशक हमारा भारत एक लोकतांत्रिक देश है. और किसी भी लोकतांत्रिक देश में, प्रजातांत्रिक देश में सबको अपनी बात कहने की आज़ादी होती है, अपने विचारों को व्यक्त करने की स्वतंत्रता होती है. लोकतंत्र के नाम पर, प्रजातंत्र के नाम पर, अभिव्यक्ति के नाम पर क्या किसी व्यक्ति को किसी दूसरे व्यक्ति के बारे में अपशब्द बोलने की आज़ादी दी जा सकती है ? क़तई नहीं, क्योंकि ऐसा करना सामाजिक अपराध माना जाएगा. अपशब्दों के ज़रिये किसी का चरित्र हनन करना, किसी के मान-सम्मान को चोट पहुंचाना, किसी भी सूरत में सही नहीं कहा जा सकता. इस बारे में कोई भी दलील काम नहीं करेगी. ठीक है, आपको किसी से शिकायत है, किसी से नाराज़गी है, आप किसी से ग़ुस्सा हैं, तो आप सभ्य भाषा में भी अपनी बात रख सकते हैं.

यह बेहद अफ़सोस और शर्म की बात है कि भारतीय राजनीति में अमर्यादा का समावेश होता जा रहा है. जहां सत्ता हासिल करने के लिए राजनेता साम-दाम-दंड-भेद का इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं भाषा के मामले भी रसातल में जा रहे हैं. राजनेताओं की भाषा दिनोदिन अमर्यादित होती जा रही है. ताज़ा मिसाल भारतीय जनता पार्टी में देखने को मिली है. हुआ यूं कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जब पंजाब नेशनल बैंक के घोटाले पर सवाल दाग़े, तो भारतीय जनता पार्टी के सांसद ब्रज भूषण शरण ने उनके बारे में विवादित बयान दिया. उन्होंने राहुल गांधी के बारे में न सिर्फ़ विवादित बयान दिया, बल्कि अपशब्दों का इस्तेमाल तक कर डाला. इससे पहले इसी पार्टी की केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया था. ख़बरों के मुताबिक़  मेनका गांधी ने बहेड़ी में जनता दरबार लगाया था.  इस दौरान वह आग बबूला हो गईं और उन्होंने अधिकारियों को जनता के सामने ही डांट-फटकार लगाई. वह यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने एक इंस्पेक्टर से उसके मोटापे पर अभद्र टिप्पणी करते हुए कहा कि उसकी कोई इज़्ज़त नहीं है. वह एक बुरा आदमी है और उसकी आमदनी से ज़्यादा संपत्ति की जांच कराई जाएगी.

यह कोई पहला मामला नहीं है, जब चाल, चरित्र और चेहरे की बात करने वाली भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इस तरह अमर्यादित व्यवहार किया है. ऐसा भी नहीं है कि सिर्फ़ भारतीय जनता पार्टी के नेता ही अमर्यादित और विवादित बयान देते हैं, इस मामले में इस मामले में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी आदि के नेता भी पीछे नहीं हैं. कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी में फ़र्क़ ये है कि कांग्रेस का कोई नेता विवादित बयान देता है, तो पार्टी उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई करती है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में विवादित बयान दिया, तो कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया. हालांकि मणिशंकर अय्यर ने इसके लिए माफ़ी भी मांग ली थी और कहा था कि उनका ऐसा कोई इरादा नहीं था. अनुवाद की ग़लती की वजह से ऐसा हुआ. राहुल गांधी कहते हैं कि कांग्रेस के संस्कार ऐसे नहीं हैं कि वह किसी के बारे में अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करे. हम कांग्रेसी हैं और किसी भी हालत में अपने संस्कार नहीं छोड़ सकते.

इसके बरअक्स भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक हैं, जो आए-दिन विवादित और अमर्यादित बयान देते रहते हैं. बयानों पर हंगामा होने के बाद माफ़ी मांगना तो दूर की बात है, वे कुतर्कों से अपने बयानों को सही ठहराने में जुट जाते हैं. पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भारतीय सेना के बारे में विवादित बयान दिया था. इससे पहले भी वह इस तरह के विवादित बयान देते रहे हैं. विवादित बयानो के मामले में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े साधु-संत भी पीछे नहीं हैं. इस मामले में साध्वियां भी कम नहीं हैं. उनके विवादित बयान भी सुर्ख़ियों में रहते हैं.

आख़िर क्यों कोई अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करता है. क्या सहनशीलता नाम की कोई चीज़ बाक़ी नहीं रह गई है कि लोग अपनी ज़रा सी आलोचना भी सहन नहीं कर पाते. जीवन में सबकुछ अपनी मर्ज़ी का तो नहीं हो सकता. सृष्टि की तरह ही जीवन के भी दो पहलू हैं, दो पक्ष हैं. हमारी संस्कृति में तो निंदक नियरे रखने की बात कही गई है. संत कबीर कहते हैं-
निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय
बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय
यानी जो हमारी निंदा करता है, उसे अपने ज़्यादा से ज़्यादा करीब रखना चाहिए. वह तो बिना साबुन और पानी के हमारी कमियां बताकर हमारे स्वभाव को साफ़ करता है.

यह बेहद चिंता का विषय है कि सियासत में भाषाई मर्यादा ख़त्म होने लगी है. देश के प्रधानमंत्री से लेकर कार्यकर्ता तक सब ऐसी भाषा इस्तेमाल करने लगे हैं, जिसे किसी भी हाल में सभ्य नहीं कहा जा सकता. देश में ऊंचे ओहदों पर बैठे लोगों को कम से कम अपने ओहदे का ही ख़्याल कर लेना चाहिए.
शायद ऐसे ही लोगों के लिए संत कबीर कह गए हैं-
ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय
औरन को शीतल करै, आपहु शीतल होय

एक नज़र

कैमरे की नज़र से...

Loading...

ई-अख़बार

Blog

  • आलमे-अरवाह - मेरे महबूब ! हम आलमे-अरवाह के बिछड़े हैं दहर में नहीं तो रोज़े-मेहशर में मिलेंगे... *-फ़िरदौस ख़ान* शब्दार्थ : आलमे-अरवाह- जन्म से पहले जहां रूहें रहती हैं दहर...
  • अल्लाह और रोज़ेदार - एक बार मूसा अलैहिस्सलाम ने अल्लाह तआला से पूछा कि मैं जितना आपके क़रीब रहता हूं, आप से बात कर सकता हूं, उतना और भी कोई क़रीब है ? अल्लाह तआला ने फ़रमाया- ऐ म...
  • राहुल ! संघर्ष करो - *फ़िरदौस ख़ान* जीत और हार, धूप और छांव की तरह हुआ करती हैं. वक़्त कभी एक जैसा नहीं रहता. देश पर हुकूमत करने वाली कांग्रेस बेशक आज गर्दिश में है, लेकिन इसके ...

Like On Facebook

एक झलक

Search

Subscribe via email

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

इसमें शामिल ज़्यादातर तस्वीरें गूगल से साभार ली गई हैं