सालगिरह की नज़्म

Posted Star News Agency Tuesday, June 19, 2018 ,

मेरे महबूब !
आज तुम्हारी सालगिरह है... ये दिन मेरे लिए भी बहुत ख़ास है...बिलकुल ईद की तरह... क्योंकि अगर तुम न होते तो...मैं भी कहां होती... तुम्हारे दम से ही मेरी ज़िन्दगी में मुहब्बत की रौशनी है...और अगर ये रौशनी न होती, तो ज़िन्दगी कितनी अधूरी होती, लाहासिल होती...

तुम्हारे लिए एक दुआ...
मेरे महबूब !
तुम्हारी ज़िन्दगी में
हमेशा मुहब्बत का मौसम रहे...
मुहब्बत के मौसम के
वही चम्पई उजाले वाले दिन
जिसकी बसंती सुबहें
सूरज की बनफ़शी किरनों से
सजी हों...
जिसकी सजीली दोपहरें
चमकती सुनहरी धूप से
सराबोर हों...
जिसकी सुरमई शामें
रूमानियत के जज़्बे से
लबरेज़ हों...
और
जिसकी मदहोश रातों पर
चांदनी अपना वजूद लुटाती रहे...
तुम्हारी ज़िन्दगी का हर साल
और
साल का हर दिन
और
हर दिन का हर लम्हा
मुहब्बत के नूर से रौशन रहे...
यही मेरी दुआ है
तुम्हारे लिए...
-फ़िरदौस ख़ान

एक नज़र

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