स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. न्यूमोनिया के पहले 24 घंटों में एक्स-रे नॉर्मल हो सकता है. यह जानकारी मूलचंद अस्पताल में कल 150 से अधिक डॉक्टरों को संबोधित करते हुए हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने दी.

उन्होंने कहा कि न्यूमोनिया समुदाय में हो सकता है और इसके लिए अस्पताल की ज़रूरत होती है. समुदाय में न्यूमोनिया होता है और न्यूमोनिया समुदाय में किसी को भी हो सकता है. भले ही उसका इससे स्वास्थ्य संबंधी संपर्क न हो और इसका आसान-सी एंटीबायोटिक्स से इलाज किया जा सकता है. अगर किसी व्यक्ति को अस्पताल में दाखिल होने के 48 घंटों के बाद या फिर 48 घंटों के एंडोट्रैकियल इन्टयूबेषन के बाद न्यूमोनिया होता है तो उसे अस्पताल में होने वाले या वेंटिलेटर सम्बंधी न्यूमोनिया के नाम से जाना जाता है और इसमें महंगी एंटीबायोटिक्स की जरूरत होती है।

उन्होंने कहा कि एचसीएपी स्वास्थ्य सेवा संबंधी न्यूमोनिया होता है और यह गैर अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों में होता है, लेकिन तब होता है जब आप हेल्थकेयर के गहरे सम्पर्क में आते हैं। अब यह एक नई अवधारणा है और आम लोगों को इस बारे में अनिवार्य रूप से जानना चाहिए कि वे यूं ही अस्पताल के चक्कर न लगाएं, क्योंकि एक बार न्यूमोनिया होने पर महंगे एंटीबायोटिक्स की जरूरत पड़ सकती है।

एचसीएपी की आशंका उसमें होती है अगर एक मरीज ने पिछले एक महीने में इंट्रावीनस थेरेपी ली हो; और वह अपने जख्म को दिखाने के लिए डॉक्टर के पास जा रहा हो; इंट्रावीनस केमोथेरेपी ली हो; हीमोडायलसिस क्लीनिक के लिए अस्पताल जाता हो। उसमें भी इसकी आशंका होती है जो एक्यूट केयर फेसिलिटीज के लिए पिछले तीन महीनों में अस्पताल में दाखिल हुआ हो।

गैर जटिल कम्युनिटी एक्वायर्ड न्यूमोनिया (सीएपी) का उपचार क्लीनिक पर किया जा सकता है और इसमें मौत की दर बहुत कम होती है, लेकिन जिनमें अस्पताल में दाखिल होने की जरूरत होती है, उनमें मृत्यु दर 37 फीसदी होती है। उच्च आशंका वाले कम्युनिटी एक्वायर्ड न्यूमोनिया के मरीजों को फॉर्मूला सीयूआरबी 65 याद रखना चाहिए - यहां सी से मतलब कंफ्यूजन (एनॉक्सिया) से है, यू से तात्पर्य यूरिया का 20 (प्री रीनल एजोटेमिया) से अधिक होना, आर का मतलब रेस्पायरेटरी रेट 30 (एनॉक्सिया) से ज्यादा होना और बी का मतलब ब्लड प्रेषर नीचे का 60 ( CO2 रीटेंशन) से कम होना है।

समुदाय में कोई भी मरीज जिसे न्यूमोनिया हो और उसने 72 घंटे तक पर इस पर ध्यान नहीं दिया तो उसे उच्च आषंकित मरीज के तौर पर उपचार किया जाना चाहिए। न्यूमोनिया के मरीजों में मृत्यु दर तब कम होती है जब वे लोग न्यूमोनिया/फ्लू का टीका पहले ही लगवा चुके हों। समुदाय से होने वाले न्यूमोनिया के उपचार के लिए इसके लक्षण और एक्स-रे का ही प्रयोग किया जाना चाहिए। लेकिन अगर स्वास्थ्य कर्मियों से सम्बंधी न्यूमोनिया हो तो ऐसे मामले में स्प्यूटम कल्चर एग्जामिनेषन की जरूरत होती है।

सांस न आना या खांसी का लगातार आते रहने में एक्स-रे को उपचार के तौर पर न अपनाएं। खांसी न्यूमोनिया से हो सकती है और यह एक हफ्ते में खत्म हो जाती है और एक्स-रे की जरूरत चार हफ्तों में हो सकती है जो किसी एक नॉर्मल भी हो सकता है और वयस्कों में 12 हफ्तों में भी सामान्य हो सकता है। अगर जरूरी हो तो अस्पताल से छुट्टी मिलने के हफ्ते भर बाद दोबारा से एक्स-रे करवाएं। मगर इसके अगले एक्स-रे के लिए 8 से 12 हफ्तों की जरूरत होती है जिनसे से न्यूमोनिया का समाधान निकाला जाता है और इसमें कुपोशण के षिकार लोग शामिल नहीं होते।

सामान्य स्वास्थ्य कर्मियों से सम्बंधित न्यूमोनिया जिसमें एमडीआर आषंकित नहीं होता तो उसका उपचार आईवी 2 जी ऑफ सेफ्ट्रियाक्सोन या लीवोफ्लोंक्सिन 750 एमजी रोजाना या एम्पिसिलिन सल्बैक्टम 3 जी इन्ट्रावीनस हर छह घंटो में ली जानी चाहिए। सबसे बढ़िया उपचार रोजाना 750 एमजी की लीवोफ्लोक्सेसिन रोजाना दी जानी चाहिए।

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