प्रस्तुति : सरफ़राज़ ख़ान
नारियल का पेड़ प्राचीनतम पौध प्रजातियों में से एक से संबंधित है. यह पेड़ पूरे उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में पाया जाता है. नारियल का पेड़ पूरे विश्व में व्यापक रूप से उगने वाला पेड़ है जो जीवन के लिए प्रत्येक आवश्यक चीजें हमें प्रदान करता है. नारियल का पेड़ पूरी तरह सुडौल और गोलाकार होने के साथ-साथ 20 से 30 मीटर ऊंचा होता है जो लगभग 100 वर्षों तक जिंदा रहकर प्रतिवर्ष 70 से लेकर 100 नारियल पैदा करता है. इंडोनेशिया, फिलीपीन, भारत और श्रीलंका नारियल के प्रमुख उत्पादक हैं और इन देशों के लिए यह आय के प्रमुख स्रोतों में से एक है. खाद्य और पेय के अलावा नारियल के पेड़ के विभिन्न हिस्सों का इस्तेमाल पायदान, दरी, फर्नीचर, चारकोल आदि बनाने में किया जाता है.

नारियल रेशे को इसके फल के छिलके से निकाला जाता है. इसके बाद निकाले गए रेशे को धुनकर धागा तैयार किया जाता है और नारियल रेशे के विभिन्न उत्पादों को तैयार करने के लिए करघे पर बुनाई की जाती है. नारियल रेशे के विशेष गुणों के कारण इसके उत्पाद पर्यावरण हितैषी और जैविक अवमूल्यन के गुणों से युक्त होते हैं.

नारियल रेशा
नारियल के फल के छिलके में विभिन्न लंबाई वाले 20 से 30 प्रतिशत रेशे पाए जाते हैं. छिलके को पीसकर रेशे प्राप्त किए जाते हैं. नारियल के फल का छिलका काफी मजबूत होता है और समुद्री जल से इसे कोई नुकसान नहीं होता जिसके कारण यह फल कई महीने तक सुरक्षित रहता है तथा बीज के उगने के लिए आवश्यक अन्य पोषक तत्व भी इसमें मौजूद रहते हैं. इन्हीं गुणों के कारण नारियल रेशा पायदान, चटाइयां, बगीचे में इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुएं, एक्वेरियम फिल्टर, रस्सियां आदि बनाने के लिए उपयुक्त है. नारियल रेशे के दो प्रकार हैं- पहला उजला रेशा और दूसरा भूरा रेशा.
उजला रेशा
नदी अथवा जल से भरे गङ्ढे में 8-10 महीने तक अपरिपक्व-मुलायम छिलकों को डालकर छोड़ दिया जाता है और इस प्रक्रिया के माध्यम से उजला रेशा प्राप्त किया जाता है. इस प्रक्रिया के दौरान सूक्ष्मजीव रेशे के आस-पास के वानस्पतिक ऊतकों को तोड़कर अलग हटाते हैं. इसके बाद छिलके को हाथ से पीटकर अथवा मशीन के द्वारा लंबे रेशों को अलग किया जाता है और फिर उन्हें सुखाकर साफ किया जाता है. इस प्रकार साफ किए गए रेशे कताई के लिए तैयार हो जाते हैं , तकली से कताई करके इनका धागा बनाया जाता है ताकि रस्सी, चटाई एवं दरी जैसे विभिन्न उत्पाद तैयार किए जा सकें.
 भूरा रेशा
पूरी तरह परिपक्व नारियल फल के छिलके को तीन से पांच दिनों तक जल में डुबाकर रखा जाता है और इसके बाद उसे हाथ से अथवा मशीन की सहायता से तोड़कर भूरा रेशा प्राप्त किया जाता है. अगली प्रक्रिया में लंबे रेशों को छोटे रेशों से अलग किया जाता है. ये रेशे काफी लचीले होते हैं और टूटे बिना ही मुड़ सकते हैं. भूरे रेशे का इस्तेमाल मुख्य रूप से ब्रशों और बगीचों में इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुओं को तैयार करने में किया जाता है.
 नारियल रेशे के गुण
नारियल का रेशा किसी अन्य प्राकृतिक रेशे की तुलना में अधिक मजबूत होता है और आयतन में किसी फैलाव के बिना ही अधिकतम 200 प्रतिशत जल अवशोषित करता है. यह एक बहुविध प्राकृतिक रेशा है जो 10 से 20 एमएम व्यास वाले और 1.3 एमएम से कम लंबाई वाले धागों से बना होता है. अत्यधिक आर्द्रता की स्थिति में अपने वजन के 15 प्रतिशत तक नमी धारण करते हुए यह आर्द्रता घटाने वाले एक कारक के रूप में काम करता है. अपनी सतह पर सल्फर डायऑक्साइड और कार्बन डायऑक्साइड जैसी भारी गैसों को अवशोषित करके यह कमरे की हवा को शुध्द रखता है. नारियल का रेशा ज्वलन को कम करने वाला होता है और आसानी से जलता नहीं है. यह ताप और ध्वनि का एक बेहतरीन अवरोधक है.

लिगनिन और सेल्यूलोज नारियल रेशे के प्रमुख घटक हैं. इसके रेशे में 45 प्रतिशत लिगनिन पाया जाता है जो इसे प्राकृतिक रेशों में से सबसे मजबूत बनाता है. टिकाऊ होने के साथ-साथ इसका जैविक अवमूल्यन आसानी से हो जाता है. कीट-रोधी होने के साथ-साथ यह फफूंद-रोधी और सड़नरोधी भी है. यही कारण है कि नारियल रेशे का बहुविध औद्योगिक इस्तेमाल होता है.
नारियल रेशे का इस्तेमाल
नारियल रेशे की विशेषताओं के कारण कृषि और मृदा संरक्षण सहित विभिन्न क्षेत्रों में इसका व्यापक इस्तेमाल किया जाता है.
नारियल की रस्सी
नारियल की रस्सी सामान्य रूप से दो लड़ियों वाली होती है जिसे हाथ से अथवा कताई मशीनों के इस्तेमाल से तैयार किया जाता है. इस्तेमाल में लाए गए रेशे की गुणवत्ता, ऐंठन की प्रकृति, अशुध्दता आदि के आधार पर इनकी कई श्रेणियां होती हैं और यह कई रूपों में पायी जाती हैं जिनका इस्तेमाल विभिन्न औद्योगिक और कृषि संबंधी कार्यों में होता है.
नारियल रेशा एक जैविक रेशा
नारियल रेशा एक जैविक अवशिष्ट है जो पर्यावरण अनुकूल होने के साथ ही बड़े पैमाने पर मृदा क्षरण और मृदा अपरदन का प्राकृतिक समाधान है. नारियल रेशा एक ऐसा जैविक रेशा है जो काफी मजबूत होने के साथ-साथ काफी मात्रा में जल का अवशोषण करता है. नारियल रेशे में नमी काफी समय तक कायम रहती है और यह जल अवशोषित करके और मिट्टी को सूखने से बचाकर नई वनस्पति के पनपने और उसके विकास में सहायक होता है. नारियल रेशे का जैविक आवरण चार से पांच वर्षों के लिए पौधों को मिट्टी का सहारा प्रदान करता है. नदी के किनारों को बचाने, सड़क निर्माण करने और भूमि में सुधार लाने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है.
नारियल रेशे का मज्जा
इसका मज्जा वह पदार्थ है जो नारियल रेशे को छिलके में जोड़ता है . अब तक इसे एक समस्यामूलक कचरा माना जाता था किन्तु हाल में इसकी मांग काफी बढ़ी है, क्योंकि इसका इस्तेमाल मिट्टी की उर्वरता को सुधारने और पौधों को विकसित करने के लिए किया जाता है . नारियल रेशे का मज्जा अपने वजन की तुलना में 8 से 10 गुणा अधिक जल अवशोषित कर सकता है और इस गुण के कारण पौधशाला में इसका इस्तेमाल किया जाता है. कॉयर बोर्ड द्वारा विकसित एक सरल प्रौद्योगिकी के माध्यम से नारियल के मज्जे को जैविक खाद (सी-पॉम) के रूप में बदला जा सकता है. इस प्रकार कम्पोस्ट किए गए नारियल रेशे का मज्जा मिट्टी के जैविक अवयव के रख-रखाव के लिए किफायती होने के साथ-साथ जैविक कार्बन का स्रोत है, जिसका जैविक खेती में व्यापक इस्तेमाल हो सकता है.

नारियल रेशे की चटाई
नारियल रेशे की चटाइयां हथकरघों, बिजली से चलने वाले करघों (पावरलूम) पर बनाई जाती हैं. सामान्य तौर पर निर्मित चटाइयों में फाइबर मैट, क्रील मैट, रॉड मैट, कारनेटिक मैट आदि शामिल हैं. नारियल रेशे की बुनी हुई और विभिन्न डिजाइनों में तैयार की गई चटाइयां पायदानों के रूप में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध हैं. इन चटाइयों को फिसलन मुक्त बनाने के लिए इनमें लैटेक्स लगाया जाता है.

नारियल रेशे की दरी
नारियल रेशे की दरियां पारंपरिक हथकरघा अथवा पावरलूम पर बनायी जाती हैं और ये विभिन्न डिजाइनों और रंगों में उपलब्ध हैं. मुख्य रूप से इनका इस्तेमाल फर्श को ढकने के साथ -साथ छत और दीवार में लगाने के लिए भी किया जाता है.
बगीचे की वस्तुएं
बगीचे में काम आने वाले अधिकांश उत्पाद नारियल रेशे से तैयार किए जा सकते हैं. नारियल रेशे से बने गमले, लटकती हुई सजावटी टोकरियों आदि का इस्तेमाल सामान्य रूप से बगीचे में किया जाता है. पहले इनके स्थान पर प्लास्टिक की बनी चीजें प्रयोग में लाई जाती थीं जिनके कारण पर्यावरण संबंधी कठिनाइयां उत्पन्न होती थीं. नारियल की भूसी का इस्तेमाल बागवानी संबंधी विभिन्न कार्यों में किया जाता है.
कॉयर कंपोजिट
कॉयर कंपोजिट की मजबूती और टिकाऊपन के कारण लकड़ी के एक विकल्प के तौर पर इसका व्यापक इस्तेमाल किया जाने लगा है. कॉयर कंपोजिट पर्यावरण अनुकूल और किफायती होता है. कॉयर कंपोजिटों का इस्तेमाल रूफ शीट, फर्नीचर ट्रे, दरवाजे, खिड़की, पैकिंग बॉक्स आदि बनाने में किया जाता है.

चूंकि नारियल का रेशा जैविक अपशिष्ट होने के साथ-साथ पर्यावरण अनुकूल भी है, इसलिए विशिष्ट रासायनिक और भौतिक गुणों के कारण यह बहुविध इस्तेमाल के लिए उपयुक्त पाया गया है. नारियल का रेशा सबसे मजबूत प्राकृतिक रेशा है और यह एकमात्र ऐसा रेशा है जो खारे जल का भी प्रतिरोधक है. नारियल रेशा एक जैविक रेशा है जो मृदा क्षरण और मृदा अपरदन का प्राकृतिक समाधान है तथा इसके मज्जे का इस्तेमाल मिट्टी की उर्वरता बढाने में किया जाता है. कॉयर कंपोजिट को लकड़ी के एक विकल्प के रूप में बेहतर ढंग से स्वीकार किया गया है, जिसके प्रयोग से वनों के घटते क्षेत्रफल को रोका जा सकता है.

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