फ़िरदौस ख़ान
नई दिल्ली. जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल की चौथी मूल्यांकन रिपोर्ट के मुताबिक हिमालय के ग्लेशियर विश्व के किसी अन्य भाग के ग्लेशियरों की तुलना में तेजी से घट रहे हैं और यदि वर्तमान दर जारी रही तो साल 2035 तक उनके अदृश्य हो जाने के आसार हैं और अगर पृथ्वी वर्तमान दर पर गर्म रहती है तो शीघ्र ही यह गर्मी अत्यधिक बढ़ जाएगी।

हालांकि भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण द्वारा किए गए अध्ययनों से मालूम हुआ है कि अधिकांश हिमालय ग्लेशियर घटने के चरण से गुजर रहे हैं, जो एक विश्व व्यापी घटना है। ग्लेशियरों का घटना ग्लेशियरों के आकार एवं अन्य कारणों से परिवर्तन की प्राकृतिक चक्रीय प्रक्रिया का एक भाग है। ये परिवर्तन ग्लोबल वार्मिंग सहित विभिन्न कारणों से होने बताए गए हैं। ग्लेशियरों के घटने के तत्काल प्रभाव पर कोई अध्ययन नहीं किए गए हैं। हिमालय ग्लेशियरों के पिघलने के कारणों और प्रभावों को स्पष्ट रूप से स्थापित करने के लिए और अध्ययन किए जाने अपेक्षित हैं।

पर्यावरण और वन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयराम रमेश ने आज राज्य सभा में बताया कि जलवायु परिवर्तन पर एक राष्ट्रीय कार्य योजना जून, 2008 में शुरू की गई थी, जिसमें इसके 8 राष्ट्रीय मिशनों में से हिमालय पारि-प्रणाली को बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय मिशन की संकल्पना की गई है। यह मिशन मौसम को समझने और हिमालय ग्लेशियरों के घटने की समस्या के समाधान के बारे में जानकारी प्राप्त करेगा।

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