ग़ज़ल
पत्थर शीशे जैसे दिल से, टकराए, टकराने दे,
अक्स किसी का टुकड़े-टुकड़े, हो जाए, हो जाने दे,

इंतज़ार करके हमने तो, पूरा अपना फ़र्ज़ किया,
वापस जाकर फिर भी कोई, ना आये, ना आने दे !

मुश्किल तो यह है, मुश्किल से, मुश्किल की पहचान हुई,
ऐसी मुश्किल में भी कोई, मुस्काये, मुस्काने दे !

दिल का हाल जुबां-चेहरे पर, आ जाए तो हर्ज़ नहीं,
मेरे हाल-चाल से वो जी, बहलाए, बहलाने दे !

मेरी उम्मीदे-ज़मीन पर, कब्ज़ा कर ले और वहां,
ताजमहल अपनी यादों का, बनवाये, बनवाने दे !

हमने इस दुनिया में रहकर, सारे मंज़र देख लिए,
कोई खुद को पाक-साफ़ जो, बतलाये, बतलाने दे !

सच पूछो तो, इस दुनिया को, पता नहीं है जीवन का,
बात पते की, कोई पंडित, समझाए, समझाने दे !
-अतुल मिश्र

1 Responses to पत्थर शीशे जैसे दिल से, टकराए, टकराने दे, अक्स किसी का टुकड़े-टुकड़े, हो जाए, हो जाने दे,

  1. हमने इस दुनिया में रहकर, सारे मंज़र देख लिए,
    कोई खुद को पाक-साफ़ जो, बतलाये, बतलाने दे !

    -बेहतरीन गज़ल!!

     

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26 रबी अल-अव्वल, हिजरी सन् 1431, 11 मार्च, 2010 गुरुवार, तिथि संवत : चैत्र कृष्ण एकादशी, संवत् 2066, शाके 1931, रवि उत्तरायने, वसंत ऋतु. पापमोचनी एकादशी. सूर्योदय कालीन नक्षत्र : उत्तराषाढ़ा सायं 7.21 तक, पश्चात श्रवण नक्षत्र, परिघ योग तथा बालवकरण. ग्रह विचार : सूर्य-बुध, गुरु-कुंभ, शुक्र-मीन, केतु-मिथुन, मंगल-कर्क, शनि-कन्या, राहु-धनु तथा चंद्रमा-मकर राशि में. चौघड़िया मुहूर्त : प्रात: 6.39 से 8.09 तक शुभ, प्रात: 11.07 से 12.37 तक चंचल, दोपहर 12.37 से 2.06 तक लाभ, सायं 5.05 से 6.34 तक शुभ, सायं 6.34 से 8.05 तक अमृत, रात्रि 8.05 से 9.35 तक चंचल. राहुकाल : दोपहर 2.06 से 3.35 तक. शुभ अंक 8, शुभ रंग नीला

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