जय गोपालरु
”सूर्य” अक्षय ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है। ”सूर्य” हमारे लिए प्रकृति का एक अनुपम वरदान है। ”सूर्य” न केवल हमें रोशनी प्रदान करता है, अपितु हमारे जीवन में ऊर्जा का संचार भी करता है। ”सूर्य” में निहित असीमित सौर ऊर्जा प्रदूषण रहित है एवं नि:शुल्क रूप से हमें प्राप्त है।

सौर ऊर्जा के माध्यम से मेगावॉट स्तरीय विद्युत उत्पादन
सौर ऊर्जा के दोहन हेतु दो प्रकार की तकनीक प्रचलित है। प्रथम सौर थर्मल तकनीक, जिसमें सौर ऊर्जा के माध्यम से बॉयलर में पानी को गर्म किया जाता है व इस गर्म पानी से भाप उत्पन्न होती है। इस प्रकार उपलब्ध भाप से स्टीम टरबाईन के माध्यम से अलटरनेटर चलाकर विद्युत उत्पादित की जाती है।

द्वितीय तकनीक में सौर फोटोवोल्टीक प्रणाली से सौर पैनल्स के माध्यम से सीधे ही विद्युत उत्पादित की जाती है। सौर सेल्स में डी.सी. विद्युत का प्रवाह होता है, जिसे बैट्रियों में संगृहीत कर लिया जाता है व आवश्यकतानुसार संगृहीत डी.सी. विद्युत का उपयोग कर लिया जाता है। यदि डी.सी. विद्युत के स्थान पर ए.सी. विद्युत की आवश्यकता हो, तो सोलर सैल्स के द्वारा उत्पादित डी.सी. विद्युत को ”पॉवर कंडिशनिंग यूनिट” के माध्यम से ए.सी. विद्युत में परिवर्तित कर इसे प्रसारण तंत्र (ग्रिड) में प्रवाहित कर दिया जाता है।

सौर ऊर्जा की प्रतिस्पर्धात्मक लागत तथा वृहद स्तर पर विद्युत उत्पादन संभावना के कारण विश्व एक महत्वपूर्ण तकनीकी क्रांति की ओर अग्रसर हो रहा है। फॉसिल फ्यूल के 50 वर्ष के बाद समाप्त होने तथा पूर्णत: सीमित भंडार के दृष्टिगत परंपरागत ऊर्जा स्रोतों से विद्युत उत्पादन की दर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। दूसरी तरफ तकनीकी अनुसंधान तथा विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में सौर ऊर्जा की प्रचुर उपलब्धता के कारण सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन की दर में आमूलचूल परिवर्तन संभव है। ऐसा अनुमान है कि आगामी लगभग 10 से 15 वर्षो में सौर ऊर्जा उत्पादन लागत परम्परागत ऊर्जा उत्पादन लागत से कम हो जाएगी। जन सामान्य द्वारा उपयोग में लाये जाने वाले प्रमुख अक्षय ऊर्जा उपकरण और घरेलू प्रकाश संयंत्र, सोलर कुकर, सोलर लालटेन, सोलर टॉर्च, सोलर जल तापीय संयंत्र (गीजर्स), सोलर पंप आदि होते हैं।

राजस्थान में न केवल देश की अपेक्षा सर्वाधिक सौर उष्मा उपलब्ध है, अपितु यहां अत्यधिक सस्ती भूमि की भी बहुलता है। प्रदेश में 1,00,000 मेगावॉट से भी अधिक संभावित सौर विद्युत क्षमता स्थापना के कारण राजस्थान देश के सर्वोत्तम ”सौर हब” के रूप में उभरकर सामने आ सकता है।

इसी कारण केन्द्र और राजस्थान सरकार राज्य में 3 से 5 हजार मेगावॉट तक का सौर ऊर्जा पॉवर प्लान्ट लगाने पर विचार कर रहे हैं। केन्द्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री डॉ0 फारूख अब्दुल्ला, ने जयपुर में 20 अगस्त, 2009 को राजीव गांधी अक्षय ऊर्जा दिवस के राष्ट्रीय समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कहा कि राजस्थान अक्षय ऊर्जा स्त्रोतों के बारे में हिन्दुस्तान को एक नया रास्ता दिखा सकता है।

डॉ अब्दुल्ला ने कहा कि जर्मनी तथा कई अन्य यूरोपीय देशों में घरों की छतों पर फोटोवोल्टीक सैल के माध्यम से सौर ऊर्जा पैदा की जा रही है। घर की जरूरत को पूरा करने के बाद बची बिजली को ऊर्जा ग्रिड को बेच दिया जाता है, जिससे व्यक्तिगत एवं देश दोनों को फायदा होता है। उन्होंने कहा कि वे अपने 5 साल के केन्द्रीय मंत्री के रूप में कार्यकाल के दौरान राजस्थान में हर गांव में अक्षय ऊर्जा स्त्रोतों से बिजली पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

इस अवसर पर राजस्थान के मुख्य मंत्री श्री अशोक गहलोत ने कहा कि जैसलमेर तथा बाड़मेर में पवन ऊर्जा से 735 मेगावॉट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। इस वर्ष इसमें 300 मेगावॉट की और वृध्दि की जाएगी। राज्य में 66 मेगावॉट सौर ऊर्जा के 11 प्लान्ट्स स्वीकृत किए गए हैं तथा सौर ऊर्जा में राज्य की सबसे आगे निकलने की संभावना है।

जयपुर शहर को सोलर सिटी के रूप में विकसित करने की नगर निगम की परियोजना को केन्द्र सरकार ने हरी झण्डी दे दी है। इस परियोजना का पूरा खर्च केन्द्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय देगा। इस परियोजना का मूल ध्येय जयपुर शहर के पर्यावरण में सुधार के साथ ही विद्युत खर्च में कमी लाना है। योजना के प्रथम चरण में शहर के 700 पार्को में सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था के लिए सोलर लाइटें लगवाने व योजना के द्वितीय चरण में प्रमुख सड़कों व अन्य स्थानों पर लाइटें लगवाने का प्रस्ताव है, जिससे दो करोड़ रूपये प्रतिमाह बचेंगे।

ऐसे गांव, जहां पर्यावरणीय दृष्टिकोण से कभी भी विद्युत लाईन डालने की अनुमति प्रदान नहीं की जा सकती अथवा सूदूर स्थित इलाकों में छितरी बसावट में रहने वाले लोगों तक विद्युत लाईन डालकर बिजली पहुंचाया जाना राज्य सरकार के लिए ना-मुमकिन सा प्रतीत होता है। राजस्थान में ऐसे गांवों को सौर ऊर्जा की अनेक योजनाओं के अंतर्गत जगमग किया जा रहा है।

ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यक्रम
ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में सौर घरेलू प्रकाश संयंत्र, सौर पथ प्रकाश संयंत्र एवं एस पी वी पम्प आदि उपकरणों की स्थापना की जाती है। इस योजना के तहत वर्तमान में सौर घरेलू प्रकाश संयंत्र की लागत का लगभग एक तिहाई हिस्सा अनुदान के रूप में उपलब्ध करवाया जा रहा है। इस योजना के तहत वर्ष 2009 तक प्रदेश के लगभग 1,00,000 ग्रामीण घरों में सौर घरेलू प्रकाश उपकरणों की स्थापना की जा चुकी है।

दूरस्थ ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यक्रम
दूरस्थ ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत दूर स्थित अविद्युतीकृत ग्रामों का गैर परम्परागत ऊर्जा स्त्रोतों से विद्युतीकरण किया जाता है। इस योजना के अंतर्गत सोलर घरेलू विद्युत उपकरण (माडल-प्प्, 37 वॉट) लगाने हेतु उपकरण की बैंच मार्क कीमत की लगभग 90 प्रतिशत राशि अनुदान के रूप में उपलब्ध कराई जाती है। वर्ष 2009 तक इस योजना के तहत लगभग 300 ग्रामों के 12,000 घरों को सौर घरेलू प्रकाश उपकरणों से विद्युतीकृत किया जा चुका है।

स्टैण्ड एलोन सोलर फोटोवोल्टीक पॉवर प्लांट/प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना (पीएम जी वाई)
सौर फोटोवोल्टीक पध्दति पर आधारित इस विद्युत गृह में एक बैट्री बैंक होता है जो इस विद्युत गृह के लिए लगाए गए सौर पैनल्स से चार्ज होता है, जिससे यह सौर किरणों के उपलब्ध न होने (जैसे रात्रि में) या आसमान में बादलों की अवस्था में भी विद्युत उपलब्ध करा सकता है। इस विद्युत गृह में एक खुले क्षेत्र में सौर पैनल्स दक्षिण दिशा को आमुख करके एक विशेष कोण पर लगाये जाते हैं। इनसे प्राप्त डी सी विद्युत को एक पॉवर कंडीशनिंग यूनिट (पी सी यू) द्वारा ए.सी. विद्युत में बदला जाता है, जिससे पारंपरिक विद्युत से चलने वाले उपकरण चलाये जा सकते हैं। इस प्रकार के विद्युत गृह पर लगभग 4 लाख रूपये प्रति किलोवॉट लागत आती है।

सभी सोलर फोटोवोल्टीक उपकरण निर्मात्री कम्पनियां ऐसे विद्युत गृह स्थापित कर सकती हैं। इस विद्युत गृह को गांवों में सर्वसाधारण के उपयोग के लिए लगाने पर भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा इस विद्युत गृह पर लगने वाली लागत का आधा हिस्सा अनुदान में उपलब्ध करवाया जाता है।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वर्ष 2001-02 में ” प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना ” का शुभारंभ किया गया था, जिसके अंतर्गत सौर ऊर्जा के माध्यम से ग्रामों के विद्युतीकरण का कार्य प्रारम्भ किया गया। इस योजना में सौर फोटोवोल्टीक पध्दति पर आधारित 10-10 किलोवॉट क्षमता के स्टैंड एलोन पॉवर प्लांट स्थापित किए जाते हैं एवं प्रत्येक गांव में इच्छुक लाभार्थी को विद्युत कनेक्शन देने हेतु एल टी लाइन बिछाई जाती है। इस योजना में प्रत्येक लाभार्थी को अधिकतम 100 वॉट का कनेक्शन प्रदान किया जाता है, जिससे वह अपने घर में लाईट, पंखा, टी.वी. आदि चला सकता है। इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2004 तक प्रदेश के 83 गांवों के लगभग 2500 घरों को सौर ऊर्जा से रोशन किया जा चुका है।

सौर फोटोवोल्टीक ग्रिड इंटर एक्टिव कार्यक्रम
सौर फोटोवोल्टीक ग्रिड इंटर एक्टिव कार्यक्रम के तहत किसी परिसर विशेष अथवा छत पर सोलर पैनल्स की स्थापना कर दी जाती है। सौर पैनल्स पर सूर्य का प्रकाश पड़ने पर इससे विद्युत का उत्पादन होता है। इस प्रकार इस पैनल्स से उत्पादित विद्युत को ग्रिड में डाल दिया जाता है। राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम द्वारा 5 किलोवॉट क्षमता का एक सौर फोटोवोल्टीक ग्रिड इंटर एक्टिव विद्युत गृह स्वयं के कार्यालय भवन पर एवं 25-25 किलोवॉट क्षमता के दो ग्रिड इंटर एक्टिव सौर फोटोवोल्टीक विद्युत गृह नये विधान सभा भवन व राजकीय सचिवालय की छत पर स्थापित किए गए हैं, जो सफलतापूर्वक कार्य कर रहे हैं। 100 किलोवॉट क्षमता की एक ग्रिड इंटर एक्टिव परियोजना झुन्झुनू जिले के गोरीर गांव में स्थापित की गई है। इस परियोजना पर 235 लाख रूपये का व्यय हुआ है। भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा इस परियोजना की लागत की दो तिहाई राशि केन्द्रीय सहायता के रूप में उपलब्ध कराई गई है।

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