मेरी तपस्या की अवधि लम्बी रही,
रहा घनघोर अँधेरा ,
सुबह -
नए प्रश्न की शक्ल लिए
खड़ी रही..........
वो तो चाँद से दोस्ती रही
इसलिए सितारों का साथ मिला -
तपस्या पूरी हुई,
सितारे आँगन में उतर आए !


(2)
तुमने मुझे 'अच्छी'कहा
तो घटाएं मेरे पास आकर बैठ गयीं,
मेरी सिसकियों को अपने जेहन में भर लिया....
सारी रात घटाएं रोती रहीं,
लोग कहते हैं -
' अच्छी बारिश हुई '


(3)
घर तो यहाँ बहुत मिले
पर,
हर कमरे में कोई रोता है !
मेरे पास कोई कहानी नहीं,
कोई गीत नहीं,
मीठी गोली नहीं,
चाभीवाले सपने नहीं....
कैसे चुप कराऊँ ?
सपने कैसे दिखाऊं? -
कोई सोता भी तो नहीं.........


(4)
समुद्र मंथन से क्या होगा !
क्या होगा अमृत पाकर?
क्या मन की दीवारें गिर जायेंगी?
क्या जीने से उकताहट नहीं होगी?
क्या अमृत तुम्हारा स्वभाव बदल देगी?
............... इन प्रश्नों का मंथन करो
संभव हो - तो,
कोई उत्तर ढूंढ लाओ !
-रश्मि प्रभा

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