ग़ज़ल
ज़िन्दगी का उधार है हम पर,
सच तो यह है कि भार है हम पर,

ज़िन्दगी का पता नहीं लेकिन,
मौत को ऐतबार है हम पर !

दर्द तो बेहिसाब है, लेकिन,
बस, ज़रा सा करार है हम पर !

आइना सामने दिखाने से,
सख्त नाराज़ यार है हम पर !

इश्क में आह भी नहीं होती,
जाने कैसा बुखार है हम पर ?

अर्सों पहले जो नज़रे-मय पी थी,
आज तक भी खुमार है हम पर !

हम उसे सिर्फ एक पल देखें,
जिसका जादू सवार है हम पर !
-अतुल मिश्र

एक नज़र

कैमरे की नज़र से...

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