स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. हिरण (हांगुल) की संख्या वर्ष 1965 के 180 -250 से घटकर 2006 में 117-119 रह गई । पर्यावरण के क्षरण, अन्य जंगली जानवरों द्वारा शिकार, शिकारियों द्वारा शिकार आदि हांगुल की तादाद घटने के प्रमुख कारण हैं.

सरकार ने हिरणों समेत सभी वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। हिरणों को ऊंची सुरक्षा प्रदान करते हुए इस संकटापन्न प्रजाति को वन्यजीव (सुरक्षा) अधिनियम, 1972 की अनुसूची में शामिल किया गया है। जरूरतों के मुताबिक इसमें समय-समय पर संशोधन किया गया। हिरण समेत वन्यजीवों तथा उनके पर्यावासों के संरक्षण के लिए संरक्षित क्षेत्र स्थापित किया। वन्यजीवों व उनके उत्पादों के अवैध व्यापार को रोकने के लिए वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो स्थापित किया गया। राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों से वन्य जीव बहुल क्षेत्रों के पास गश्ती बढाने के अनुरोध किए गए। उन्हें समेकित वन्यजीव पर्यावास विकास, बाघ परियोजना , हाली परियोजना आदि के तहत वित्तीय एवं प्रौद्योगिकी मदद दी जाती है। जम्मू कश्मीर सरकार को हांगुल के संरक्षण के लिए 99 लाख रुपए दिए गए। इसी तरह मणिपुर सरकार को मणिपुरी हिरण के संरक्षण के लिए 33.96 लाख रुपए दिए गए।

एक नज़र

ई-अख़बार

Blog

  • सब मेरे चाहने वाले हैं, मेरा कोई नहीं - हमने पत्रकार, संपादक, मीडिया प्राध्यापक और संस्कृति कर्मी, मीडिया विमर्श पत्रिका के कार्यकारी संपादक प्रो. संजय द्विवेदी की किताब 'उर्दू पत्रकारिता का भवि...
  • रमज़ान और शबे-क़द्र - रमज़ान महीने में एक रात ऐसी भी आती है जो हज़ार महीने की रात से बेहतर है जिसे शबे क़द्र कहा जाता है. शबे क़द्र का अर्थ होता है " सर्वश्रेष्ट रात " ऊंचे स्...
  • राहुल ! संघर्ष करो - *फ़िरदौस ख़ान* जीत और हार, धूप और छांव की तरह हुआ करती हैं. वक़्त कभी एक जैसा नहीं रहता. देश पर हुकूमत करने वाली कांग्रेस बेशक आज गर्दिश में है, लेकिन इसके ...

एक झलक

Like On Facebook

Search

Subscribe via email

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

इसमें शामिल ज़्यादातर तस्वीरें गूगल से साभार ली गई हैं