स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. सरकार ने विद्युत क्षेत्र में आयोजना आवंटन को दुगने से अधिक बढाक़र 5130 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव किया है। वर्ष 2009-10 की तुलना में आयोजना आवंटन में 2230 करोड़ रुपये की वृध्दि की गई है।
वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने आज लोकसभा में वर्ष 2010-11 का आम बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार विद्युत क्षेत्र में क्षमता वर्ध्दन को उच्च प्राथमिकता देती है। इसके लिए मेगापावर पॉलिसी को संशोधित किया गया है और उसे राष्ट्रीय विद्युत नीति 2005 तथा टेरिफ नीति 2006 के अनुरूप बनाया गया है। इससे वितरण इकाइयों के जरिये उत्पादन लागत तथा खरीदी गई विद्युत की लागत कम करने में मदद मिलेगी। फिलहाल देश की 75 प्रतिशत बिजली कोयला आधारित है। कैप्टिव माइनिंग हेतु कोयला ब्लॉकों का आवंटन करने के लिए प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव है, जिससे इन ब्लॉकों में उत्पादन में पारदर्शिता और वर्ध्दित भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी।
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार कोयला क्षेत्र में एकसमान व्यवस्था बनाने के लिए 'कोयला विनियामक प्राधिकरण' की स्थापना के लिए कदम उठाना चाहती है, जिससे कोयले के किफायती मूल्य निर्धारण और निष्पादन मानक की बैंचमाकिर्गं जैसे मसलों का समाधान करने में आसानी होगी।
जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन में भारत को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस मिशन के तहत वर्ष 2022 तक 20,000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य है। वित्त मंत्री ने नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय हेतु योजना परिव्यय में 61 प्रतिशत वृध्दि का प्रस्ताव किया है। वर्ष 2009-10 में 620 करोड़ रुपये की तुलना में वर्ष 2010-11 में 1,000 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है।
जम्मू-कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र में ऊर्जा की कमी की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि यहां की जलवायु बहुत अधिक प्रतिकूल है। इस समस्या के समाधान के लिए वित्त मंत्री ने 500 करोड़ रुपये की लागत से सौर, लघु जल एवं अति लघु विद्युत परियोजनाओं की स्थापना करने का प्रस्ताव किया है।

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