स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने आज लोकसभा में वर्ष 2010-11 का आम बजट पेश करते हुए कहा कि वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के तंत्र को सुदृढ बनाने तथा सांस्थानिक रूप देने की दृष्टि से सरकार का एक शीर्ष स्तरीय वित्तीय स्थायित्व और विकास परिषद की स्थापना करने का प्रस्ताव है। विनियामकों की स्वायत्तता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, यह परिषद बड़े पैमाने पर वित्तीय एकीकरण की कार्यप्रणाली सहित अर्थव्यवस्था के वृहद विवेक सम्मत परीक्षण की निगरानी करेगी और अंतरविनियामक समन्वय संबंधी मसलों का समाधान करेगी। सरकार वित्तीय बोधगम्यता और वित्तीय समावेशन पर भी ध्यान केन्द्रित करेगी।
वित्त मंत्री ने कहा कि वर्ष 2008 के दौरान सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के 4 बैंकों में पूंजी से जोखिम भारित आस्ति अनुपात का वहनीय स्तर बनाए रखने के लिए टीयर वन कैपिटल के बतौर 1900 करोड़ रुपये दिए थे। इसमें अब 1200 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि दी जा रही है। प्रणब मुखर्जी ने वर्ष 2010-11 के लिए 16,500 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव किया है, ताकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक 31 मार्च, 2011 तक न्यूनतम 8 प्रतिशत टीयर-1 पूंजी हासिल कर सकें।
वर्ष 2006-07 में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का अंतिम पूंजीकरण किया गया था। अब क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को मजबूत बनाने हेतु वित्त मंत्री ने और पूंजी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव किया है ताकि इन बैंकों के पास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को वर्ध्दित ऋण प्रदान करने हेतु पर्याप्त पूंजी आधार हो।
वित्त मंत्री ने सदन को बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक निजी क्षेत्र के भागीदारों को कुछ अतिरिक्त बैंकिंग लाइसेंस देने पर विचार कर रहा है। इसके अतिरिक्त गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों पर भी विचार किया जा सकता है, बशर्ते वे भारतीय रिजर्व बैंक के पात्रता मानदंडों की पूर्ति करें।
