स्टार न्यूज़ एजेंसी
लंदन (ब्रिटेन). भारत और ब्रिटेन के बीच संयुक्त आर्थिक और व्यापार आयोग (जेईटीसीओ) के छठे अधिवेशन के दौरान आज लंदन में दोनों देशों ने व्यापार और निवेश प्रवाहों को प्रभावित करने वाले पर्यावरण विनियमन में और सुधार की जरूरत के बारे में सहमति हुई। जींसों और सेवाओं, दोनों के लिए बाजार पहुंच के मुद्दे पर दोनों पक्षों ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रवाहों को बढ़ाने की अपनी प्रतिबध्दता की फिर से पुष्टि की। केन्द्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री आनंद शर्मा और ब्रिटेन सरकार के ब्यापार, नवसृजन एवं कौशल मंत्री लॉर्ड पीटर मांडेलसन ने इस अधिवेशन में भाग लिया। ब्रिटेन भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में से एक है और ब्रिटेन के साथ वर्ष 2008-09 में द्विपक्षीय व्यापार में 12 अरब अमरीकी डालर की वृध्दि दर्ज की गई है।
इस अवसर पर आनंद शर्मा ने कहा कि भारत में चलाए जा रहे व्यापक आधारभूत विकास कार्यक्रम के बल पर वहां विदेशी निवेश के काफी अवसर बने हैं। उन्होंने कहा कि भारत सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से आधारभूत विकास के क्षेत्र में ब्रिटेन के अनुभवों को महत्त्व देता है, जो भारत के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की स्थापना के संदर्भ में लाभदायक हो सकता है। जेईटीसीओ की अगली बैठक एक वर्ष के बाद नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी।

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