मलिक असगर हाशमी
मुंबई एटीएस के प्रमुख पी. रघुवंशी उर्दू मीडिया के निशाने पर हैं। एक तेल कंपनी के डिपो और कुछ महत्वपूर्ण ठिकाने को उड़ाने के आरोप में पकड़े गए दो युवकों के मामले में अखबारों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनके पिछले रिकार्ड के आधार पर उन्हें मुस्लिम विरोधी ठहराने और हिंदू आतंकियों के प्रति नरम रुख अपनाने का दोषी ठहराया जा रहा है।

उर्दू अखबार ऐसा इसलिए दावे से कह रहे हैं कि हेमंत करकरे से पहले जब रघुवंशी एटीएस प्रमुख थे तो उन्होंने मालेगांव ब्लास्ट के आरोपियों को एक तरह से बरी ही कर दिया था। बम प्लांट के आरोप में पकड़े गए आतिफ अमीन और मोहम्मद साजिद के मामले में जिस तरह एटीएस प्रमुख ने उतावलापन दिखाया, उससे गृह मंत्रालय और महाराष्ट्र सरकार भी खासे नाराज हैं। दोनों संदिग्ध आतंकियों के मामले में रघुवंशी ने मीडिया को उनके किसी अंकल से रिश्ता होने का खुलासा कर दिया था।

उर्दू मीडिया ने गृहमंत्री पी. चिदंबरम के हवाले से कहा कि जांच के दौरान ऐसी बातों से इस पर नकारात्मक असर पड़ेगा। दूसरी तरफ अखबारों में छपी रिपोर्ट और लेख बताते हैं कि जिन्हें साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है, वे मामूली खानदान के छोटा-मोटा रोजगार करने वाले लड़के हैं। उनमें से एक फुटपाथ पर रुमाल बेचने का कारोबार करता है।

उन्हें दोबारा पुलिस रिमांड पर लेने के लिए पेश करने वाले दिन उर्दू अखबारों ने उनके बीवी-बच्चों के बिलखते फोटो पहले पेज पर छापे थे। कई अखबार तो इस संवेदनशील मामले में कुछ ज्यादा ही उतावलापन दिखाते हुए केंद्र और प्रदेश सरकारों पर आरोप लगा रहे हैं कि अब भी मुस्लिम नौजवानों को आतंकी बताने का खेल बंद नहीं हुआ है।

‘सियासत’ दहशतगर्दी का शुबह में कहता है-दहशतगर्दी के नाम पर बेकसूर मुस्लिम नौजवानों की गिरफ्तारी इंटेलीजेंस और पुलिस का शगल बन गया है। ‘रोशनी’ अपने संपादकीय ‘ये क्या हो रहा है..?’ में कहता है ऐसा खेल पिछले दो दशक से घाटी में भी खेला जा रहा है।

यहां बताते चलें कि मुंबई में संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी के दौरान अहमदाबाद से हिजबुल मुजाहिदीन से रिश्ता रखने के आरोप में बशीर अहमद बाबा उर्फ पेप्सी हमलावर को गिरफ्तार किया गया था। इस आरोप का उसके रिश्तेदारों और मुहल्ले वालों ने खंडन किया है। वे उसकी गिरफ्तारी के विरोध में और इस मामले में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के हस्तक्षेप की मांग को लेकर श्रीनगर में शांतिपूर्ण मार्च कर चुके हैं।

मुंबई में पकड़े गए संदिग्धों के आरोप में भी देश भर के मुस्लिम संगठन एकजुट होते दिख रहे हैं। लखनऊ में आयोजित किए गए एक सियासी जलसे में बेकसूर मुसलमानों को फंसाने का विरोध किया गया। आजमगढ़ के मुस्लिम तंजीमों का आरोप है कि बड़ी संख्या में इसी आरोप में उनके शहर के नौजवान गुजरात सहित विभिन्न जेलों में बंद हैं।

‘ऐतमाद’, ‘अमेरिका की निसाबी कुतुब में मुखालफत इस्लाम मजामीन’ में कहता है दस किताबों की श्रृंखला ‘द वर्ल्ड ऑफ इस्लाम’ के माध्यम से मुसलमानों की छवि खराब करने की मुहिम चलाई जा रही है। ‘हमारा समाज’ ने वजारत दाखला संजीदा में एटीएस प्रमुख पी. रघुवंशी को आड़े हाथ लेते हुए कहा है उनकी ही रहनुमाई में मुंबई हज हाउस के इमाम गुलाम यहिया को आतंकी के आरोप में चार साल तक जेल काटनी पड़ी। आरोप सिद्ध नहीं होने पर वे कोर्ट से बरी कर दिए गए। अखबार दावे से कहता है कि आतंकी के आरोप में गिरफ्तार किए गए 99 प्रतिशत मुसलमानों को आरोप सिद्ध नहीं होने पर छोड़ना पड़ा।

‘राष्ट्रीय सहारा’ ने शाही इमाम मौलाना बुखारी और बाटला हाऊस मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि इससे भी साबित हो गया कि बेकसूरों को मारा और पकड़ा जा रहा है। एक अखबार पी. रघुवंशी और महाराष्ट्र पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहता है, वे इतने ही तेज-तर्रार हैं तो अब तक पुणे जर्मन बेकरी के आरोपियों को क्यों नहीं ढूंढ़ पाए।

बात जब मुसलमानों की हो तो भला यह सियासत से कैसे अछूती रह सकती है। सपा नेता और मुंबई से विधायक अबु आजमी के आतंकी मंसूबा बनाने के दोनों आरोपियों के घर जाने और उनके परिवार वालों से मिलने को लेकर महाराष्ट्र में बवाल मचा हुआ है। आजमी कह रहे हैं वे मुसीबतजदा परिवार से मिल गए थे, जबकि दूसरी पार्टियां उनकी भूमिका और मिलने के मकसद की जांच कराने की मांग कर रही हैं।
(लेखक हिन्दुस्तान से जुड़े हैं)

एक नज़र

ई-अख़बार

Blog

  • सब मेरे चाहने वाले हैं, मेरा कोई नहीं - हमने पत्रकार, संपादक, मीडिया प्राध्यापक और संस्कृति कर्मी, मीडिया विमर्श पत्रिका के कार्यकारी संपादक प्रो. संजय द्विवेदी की किताब 'उर्दू पत्रकारिता का भवि...
  • रमज़ान और शबे-क़द्र - रमज़ान महीने में एक रात ऐसी भी आती है जो हज़ार महीने की रात से बेहतर है जिसे शबे क़द्र कहा जाता है. शबे क़द्र का अर्थ होता है " सर्वश्रेष्ट रात " ऊंचे स्...
  • राहुल ! संघर्ष करो - *फ़िरदौस ख़ान* जीत और हार, धूप और छांव की तरह हुआ करती हैं. वक़्त कभी एक जैसा नहीं रहता. देश पर हुकूमत करने वाली कांग्रेस बेशक आज गर्दिश में है, लेकिन इसके ...

एक झलक

Like On Facebook

Search

Subscribe via email

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

इसमें शामिल ज़्यादातर तस्वीरें गूगल से साभार ली गई हैं