चांदनी
नई दिल्ली. बहुत ज्यादा शोर से सिर्फ माहौल ही नहीं गड़बड़ाता बल्कि इससे हमेशा के लिए सुनने की क्षमता भी गायब हो सकती है।


हार्ट केयर फाउंडेशन   ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल  के मुताबिक़ रूल ऑफ थंब : एमपी3 इस्तेमाल करने वालों को चाहिए कि वे क्षमता के हिसाब से 60 फीसदी से अधिक गति से इसे न सुनें खासकर तब जब आप इसे 'इयर बड' से सुन रहे हों जैसे कि आइपॉड्स। अगर आप हेडफोन का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो अधिकतम 70 फीसदी तक की क्षमता में इसे सुन सकते हैं। इसका खुलासा जर्नल पीडियाट्रिक्स, मार्च 2008 के अंक में किया गया है।


एमपी3 प्लेयर में धमाका होने से सुनने की क्षमता को नुकसान हो सकता है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों पर नजर रखें कि कहीं उनमें इस तरह की समस्या तो नहीं पनप रही है।

लम्बे समय तक 85 डेसिबेल से अधिक ध्वनि को सुनने से धीरे-धीरे सुनने की क्षमता खत्म हो सकती है। सामान्य तौर पर होने वाली बातचीत की क्षमता करीब 60 डेसिबल होती है। कई व्यक्तिगत स्टीरियो सिस्टम की अधिकतम क्षमता 100 डेसिबल से ऊपर होती है। रॉक कंसर्ट और पटाखों की ध्वनि 140 डेसिबल या इससे भी अधिक होती है। शोर का स्तर अगर 120 से 140 डेसिबल के बीच हो तो इससे दिक्कत होने लगती है।

एमपी3 प्लेयर निर्माण करने वाली कंपनियों को चाहिए कि वे उपकरण में ध्वनि की गति का सूचक बनाएं जिससे डेसिबल की स्थिति का पता लगाया जा सके, उदाहरण के तौर पर फ्लैशिंग लाइट के जरिए डैंजर जोन के बारे में बताया जाए।

आमतौर पर सुनने की क्षमता का नुकसान धीरे-धीरे होता है और इसमें किसी भी तरह का दर्द नहीं होता। आप किसी भी तरह के शोर का जब सामना करते हैं तो इसकी गूंज कुछ देर तक आपके कानों में गूंजती रहती है। इससे आप दूसरों की बातचीत को सुनने में भी परेशानी हो सकती है। कुछ घंटों या दिनों के बाद ऐसे लक्षण खत्म

हो जाते हैं। फिर भी, अगर आप दोबारा ऐसे शोर का सामना करते हैं तो इससे आप हमेशा के लिए अपनी श्रवण शक्ति को खो सकते हैं।

सुनने की क्षमता को खोने में जितनी तेज ध्वनि होती है, उससे उतना ही कम समय लगता है। 75 डेसिबल या इससे कम की ध्वनि को आप लम्बे समय तक भी सुनते हैं तो इससे सुनने की क्षमता को खोने का खतरा नहीं होता। इससे बचने का बढ़िया उपाय यही है कि 'बहुत ज्यादा शोर' या फिर उसके 'बहुत करीब होकर सुनना' या फिर 'लम्बे समय तक सुनना' से अपने आपको बचाएं।

औसतन एक फैक्टरी में ध्वनि 85 डेसिबल की होती है और अगर आप आठ घंटे तक लगातार इसमें लिप्त रहते हैं तो इससे आप बहरेपन के शिकार हो सकते हैं। अन्य उच्च स्तर की ध्वनि में शामिल हैं: आठ घंटे तक मोटरसाइकिल को पास करने से भी बहरेपन की समस्या संभव है। सब-वे ट्रेन या डीजल ट्रक की 100 डेसिबल की ध्वनि का सामना दो घंटे तक करते हैं तो इससे सुनने की क्षमता खो सकते हैं। इसके अलावा अगर आप हेलीकॉप्टर ओर पॉवर मूवर की 105 डेसिबल का एक घंटा तक सामना करते हैं या फिर आटो हॉर्न ,प्रोपेलर एयरक्राफ्ट, और एयर रेड सायरन, लाइव रॉक म्यूजिक के 90 से लेकर 130 डेसिबल की ध्वनि को 20 मिनट तक सामना करते हैं तो इससे बहरेपन की समस्या संभव है।

अगर आप 110 से लेकर 120 डेसिबल क्षमता का संगीत सुनते हैं तो इससे डेढ़ घंटे में आप अपनी सुनने की क्षमता खो सकते हैं।

आइपॉड के लिए दिशा-निर्देश


  • व्यक्ति नियमित तौर पर आइपॉड से स्टॉक इयरफोन का इस्तेमाल करके70 फीसदी वॉल्यूम को4.6 घंटे तक रोजानासुरक्षित तरीके से संगीत का आनंद ले सकता है।
  •  आइपॉड से फुल वॉल्यूम का संगीतस्टॉक इयरफोन से5 मिनट से अधिक समय तक सुनने से श्रवणशक्ति को खोने का खतरा बढ़ सकता है।
  • एक दिन में90 मिनट तक सुरक्षित तरीके से80 फीसदी कीअधिकतम वॉल्यूम तक आइपॉड से इयरफोन के जरिए संगीत का मजा ले सकते हैं। इस स्तर परसुनने से बहरेपन की कोई खास समस्या नहीं होती है।
  •  सबसे बढ़िया सुनने की सीमा एकदिन में दो घंटे50 फीसदी की वॉल्यूम में सुनना है।

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