जगदीश्‍वर चतुर्वेदी
मानव सभ्यता का चरमोत्कर्ष है डिजिटल संस्कृति। संस्कृति के नए सोपानों और नई ऊँचाईयों को डिजिटल संस्कृति का स्पर्श करते सहज ही देखा जा सकता है। डिजिटल संस्कृति हमारी संस्कृति का महासमुद्र है। मानव सभ्यता का सबसे बड़ा खजाना है।

इंटरनेट का आनंद लेते हुए हम भूल गए कि इंटरनेट का पैराडाइम ही बदल गया है। ब्लॉगिंग, सोशल नेटवर्किंग, ईमेल, चैट, वेबसंचार, फेसबुक, ट्विटर, डिजिटल फिल्म, डिजिटल संचार, डिजिटल रेडियो, डिजिटलजनित वर्चुअल रिश्ते, वर्चुअल खबर आदि की आनंद यात्रा में पता नहीं कब पैराडाइम ही बदल गया।

हमारा समाज धीरे-धीरे डिजिटल संस्कृति और सभ्यता में दाखिल होता चला जा रहा है। चारों ओर इंटरनेट ने सूचनाओं और संवाद का विस्फोट पैदा कर दिया है। भूमंडल में ग्लोबल-लोकल डिजिटल मंडल का नया संसार बन गया है। इस डिजिटल संसार ने हमारी वास्तव जिंदगी पर गहरा असर डाला है।

डिजिटल संस्कृति ने ज्यादा से ज्यादा डिजिटल संचय करने की आदत पैदा की है। आज प्रत्येक व्यक्ति ज्यादा से ज्यादा डिजिटल सामग्री का संचय करना चाहता है। हाल ही में एक रिसर्च सामने आई है जिससे पता चला है कि हम जैटाबाइट के युग में दाखिल हो चुके हैं। रिसर्च से पता चला है कि सन् 2009 में डिजिटल संसार में बासठ प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यानी पिछले साल आठ लाख पेटाबाइटस की वृद्धि हुई।

एक पेटाबाइटस में दस लाख गीगाबाइटस या 0.8 जेटाबाइटस होते हैं। ये सूचनाएं कुल मिलाकर 75 बिलियन आईपेड में स्टोर हो सकने वाली सामग्री के बराबर है।

डिजिटल संस्कृति के आने के पहले और बाद में मनुष्य की ज्ञान संपदा और उसके संचय की प्रवृत्ति में मूलगामी बदलाव आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल संस्कृति के आने के पहले समस्त मानव जाति के द्वारा जितनी भाषाओं का इस्तेमाल किया जाता था और उसके पास जितनी ज्ञानराशि थी उसको डिजिटल रुप में मात्र पांच हजार पेटाबाइटस में संचित किया जा सकता है। यह डिजिटल संस्कृति के युग के आने बाद जितना कंटेंट पैदा हुआ है उसके एक प्रतिशत अंश से भी कम है। सन् 2010 की 1 जनवरी को जब कम्प्यूटर खोले गए तो देखा गया कि डिजिटल संस्कृति आने के बाद सारी दुनिया की मानव जाति के पास 1.2 जेटाबाइटस सामग्री संचित हुई है।

बिट्स और बाइटस के बारे में हाल ही में प्रकाशित चौथे विश्व सर्वेक्षण से पता चला है कि हम अब जेटाबाइटस के युग में पहुँच गए हैं। यह सर्वेक्षण आईडीसी ने किया और इसे ईएमसी फर्म ने प्रायोजित किया है। यह सर्वेक्षण बताता है कि विश्व तेजी से डिजिटल संस्कृति में शामिल हो रहा है। समस्त पुराना मीडिया अपने को डिजिटल में रुपान्तरित कर रहा है। लाइब्रेरी भी डिजिटल में जा रही हैं।

इसका अर्थ है कि डिजिटल में कंटेंट संचय की अनंत संभावनाएं हैं। हम धीरे -धीरे डिजिटल संस्कृति के आदि हो जाएंगे। खासकर मोबाइल फोन, डिजिटल कैमरा आदि आने के बाद डिजिटल संचय में जबर्दस्त उछाल आया है। पहले जो व्यक्ति एक फोटो खींचकर काम चलाता था अब 20 फोटो खींचता हैं उन्हें डिजिटल रुप में संचित और प्रचारित भी करता है। आश्चर्य की बात है कि अमेरिका में डिजिटल संस्कृति पैदा हुई लेकिन चीन ने डिजिटल संस्कृति के मामले में अमेरिका को काफी पीछे छोड़ दिया है। आज चीन में अमेरिका से ज्यादा साधारण लोग डिजिटल उपकरणों का आम जीवन में ज्यादा इस्तेमाल करते हैं।

डिजिटल संस्कृति का 70 प्रतिशत कंटेंट निजी तौर पर व्यक्तियों के द्वारा पैदा किया जाता है लेकिन इसके संचय और संरक्षण का दायित्व कारपोरेट कंपनियों के ऊपर है। इसके कारण सूचना का वस्तुकरण और लोकतांत्रिकीकरण हुआ है। डिजिटल संस्कृति की अधिकांश सामग्री अनिर्देशित ढ़ंग से तैयार की गई है, अतः उसकी आसानी से इंडेक्सिंग, छटाई, वर्गीकरण आदि करना संभव नहीं है।

संक्षेप में जान लें कि ये बिटस और बाइटस क्या हैं- कम्प्यूटर में शून्य और एक का बायनरी सिस्टम है, जैसे ऑफ/ऑन स्विच होता है। एक बिट सिर्फ शून्य होगा या एक होगा। एक बाइटस में आठ बिटस होते हैं। ये दोनों पदबंध को सबसे पहले 1950 के दशक में आईबीएम के वार्नर बुचोल्ज ने ईजाद किया।

कम्प्यूटर के द्वारा जो भी काम किया जाता है उसका गणित बिठाया जाता है उसमें सबसे छोटी ईकाई है बिट्स।बिटस को जब हजार गुना कर दें तो किलोबाइटस हो जाता है। मसलन् 1,000 बाइट्स एक किलोबाइट्स (केबी) के बराबर है। 2 केबी में टाइप किए एक पन्ने के बराबर सामग्री आती है। 1,000 केबी एक मेगाबाइटस (एमबी) के बराबर है। इसी तरह 1,000 मेगाबाइटस (एमबी) एक गीगाबाइटस (जीबी) के बराबर , एक जीवी आईपोड में 240 गाने भरे जा सकते हैं।

1,000 जीबी एक टेराबाइटस (टीबी) के बराबर और 1,000 टीबी एक पेटाबाइटस ( पीबी) के बराबर ,1,000 पीबी एक इक्साबाइटस (इबी) के बराबर होता है।

आज तक मनुष्य जाति के द्वारा जितने शब्द बोले गए हैं वे 5 इक्साबाइटस के डाटा के बराबर हैं। 1,000 इबी एक जेटाबाइटस के बराबर है। एक जेटाबाइटस में 1,000,000,000, 000,000,000,000 बाइटस होते हैं। डाटा की भाषा में यह अमेरिका के अकादमिक पुस्तकालयों में संचित सामग्री से 5 लाख गुना ज्यादा है। अभी तक कोई कम्प्यूटर नहीं आया है जो इतना डाटा एक साथ संचित कर सके।
(लेखक वामपंथी चिंतक और कलकत्‍ता वि‍श्‍ववि‍द्यालय के हि‍न्‍दी वि‍भाग में प्रोफेसर हैं)

एक नज़र

कैमरे की नज़र से...

Loading...

ई-अख़बार

Like On Facebook

Blog

  • दोस्तों और जान-पहचान वालों में क्या फ़र्क़ होता है... - एक सवाल अकसर पूछा जाता है, दोस्तों और जान-पहचान वालों में क्या फ़र्क़ होता है...? अमूमन लोग इसका जवाब भी जानते हैं... कई बार हम जानते हैं, और समझते भी हैं, ...
  • दस बीबियों की कहानी - *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* कहते हैं, ये एक मौजज़ा है कि कोई कैसी ही तकलीफ़ में हो, तो नीयत करे कि मेरी मुश्किल ख़त्म होने पर दस बीबियों की कहानी सुनूंगी, त...
  • राहुल ! संघर्ष करो - *फ़िरदौस ख़ान* जीत और हार, धूप और छांव की तरह हुआ करती हैं. वक़्त कभी एक जैसा नहीं रहता. देश पर हुकूमत करने वाली कांग्रेस बेशक आज गर्दिश में है, लेकिन इसके ...

एक झलक

Search

Subscribe via email

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

इसमें शामिल ज़्यादातर तस्वीरें गूगल से साभार ली गई हैं