फ़िरदौस ख़ान
नई दिल्ली.  स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने अपने भाषण में जहां सरकार की उपलब्धियां गिनवाईं , वहीं बढ़ती महंगाई का भी ज़िक्र किया. पेश हैं प्रधानमंत्री के भाषण की मुख्य विशेषताएं... 
1- विश्व के अन्य देशों की तुलना में हमारी अर्थव्यवस्था की वृध्दि दर बेहतर हो गई है। इससे हमारी अर्थव्यवस्था की मजबूती का पता चलता है।
2- आज भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के नाते हम अनुकरण के लिए अनेक देशों के वास्ते उदाहरण बन चुके हैं।
3- हमारे नागरिकों को यह अधिकार है कि उनकी आवाज सुनी जाए। हमारे देश को पूरी दुनिया में आदर के साथ देखा जाता है। अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य में हमारे दृष्टिकोण को तवज्जो दी जाती है।
4- हमारे श्रमिकों, दस्तकारों और किसानों की मेहनत ने हमारे देश को आज इस मुकाम तक पहुंचाया है। मैं खासतौर पर अपने सैनिकों को सलाम करता हूं जिनकी बहादुरी हमारी सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
5- हम नए भारत का निर्माण कर रहे हैं जिसमें हर नागरिक की भागीदारी होगी, एक ऐसा भारत जो समृध्द होगा और जिसमें सभी नागरिक सम्मान और प्रतिष्ठा का जीवन जीने में समर्थ होंगे।
6- एक ऐसा भारत जहां सभी समस्याएं लोकतांत्रिक तरीकों से हल की जाएंगी। ऐसा भारत जिसमें हर नागरिक के बुनियादी अधिकारों की रक्षा की जाएगी।
7- पिछले कुछ वर्षों में हमने अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले हर नागरिक को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम के जरिए 100 दिन के रोज़गार का आश्वासन हासिल है। सूचना का अधिकार कानून ज्यादा जागरूक बनने में हमारे नागरिकों की मदद कर रहा है।
8- इस साल हमारी सरकार ने शिक्षा का अधिकार कानून लागू किया है जो हर भारतीय को देश की आर्थिक प्रगति के लाभ में हिस्सा दिलाने और इसमें योगदान भी करने में मदद करेगा।
9- हमारे देश में महिलाओं की बराबर भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए हमने संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण के प्रयास शुरू किए हैं। इसके अलावा स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है।
10- हमारी अनेक ताकतों के बावजूद हमारे समक्ष कुछ गंभीर चुनौतियां भी हैं। हमारा समाज प्राय: धर्म, राज्य, जाति अथवा भाषा के नाम पर विभाजित हो जाता है। हमें वचन लेना होगा कि हम किसी भी परिस्थिति में अपने समाज में विभाजन की अनुमति नहीं देंगे।
11-  सहनशीलता और उदारता हमारी परंपराओं का अंग रही हैं। हमें इन परंपराओं को मजबूत बनाना चाहिए।  आर्थिक रूप से प्रगति करने के साथ-साथ हमारे समाज को भी संवेदनशील बनना चाहिए। हमें अपने दृष्टिकोण को आधुनिक और प्रगतिशील बनाना चाहिए।
12- पिछले कुछ वर्षों में हमारी कृषि की विकास दर में उल्लेखनीय वृध्दि हुई है लेकिन हम अपने लक्ष्य को हासिल करने से अभी दूर हैं। हमें कृषि की विकास दर 4 प्रतिशत करने की ज़रूरत है।
13- हमारी सरकार ऐसी खाद्य सुरक्षा चाहती है जिसमें हमारा कोई भी नागरिक भूखा रहे। इसके लिए कृषि उत्पादन बढ़ाने की ज़रूरत है जो सिर्फ उत्पादकता बढ़ाने से ही संभव है।
14- हमें ऐसी प्रौद्योगिकी की ज़रूरत है जो बारानी खेती की ज़रूरतें पूरी करेगी। इसके अलावा हमारी कृषि को जलवायु परिवर्तन, घटते भूजल स्तर औेर मिट्टी की गुणवत्ता में क्षय जैसी नई चुनौतियों से निपटने में भी समर्थ होना चाहिए।
15- मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि दक्षिण एशिया का बोरलॉग संस्थान भारत में स्थापित किया जा रहा है। इस पहल से भारत और दक्षिण एशिया के अन्य देशों के किसानों को नए एवं संशोधित बीजों और नई प्रौद्योगिकी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
16- हमने हमेशा किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए प्रयास किए हैं ताकि वे उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित हों लेकिन किसानों को उच्च मूल्य उपलब्ध कराने का एक प्रभाव यह है कि खुले बाजार में भी खाद्य पदार्थों के दाम बढ़  रहे हैं।
17- मैं जानता हूं कि पिछले कुछ महीनों में उच्च मुद्रास्फीति ने मुश्किलें पैदा की हैं। आज मैं मुद्रास्फीति के बढ़ने के  कारणों की गहराई तक नहीं जाना चाहता, लेकिन मैं यह निश्चित रूप से कहना चाहूंगा कि हम इस समस्या से निपटने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। मुझे विश्वास भी है कि हम इन प्रयासों में सफल होंगे।
18- यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम समझदारी के साथ अपनी अर्थव्यवस्था का प्रबंधन करें ताकि हमारा विकास भविष्य में भारी ऋण के बोझ से बुरी तरह प्रभावित हो।
19- पेट्रोलियम उत्पादों पर सब्सिडी हर साल बढ़ती जा रही है। इसलिए पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें बढ़ाना आवश्यक हो गया था। यदि ऐसा नहीं किया जाता तो सब्सिडी का बोझ वहन करना हमारे बजट के लिए संभव नहीं रहता तथा  शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीबों के रोजगार के लिए बनाए गए हमारे कार्यक्रम बुरी तरह प्रभावित हो गए होते।
20- हम चाहते हैं कि विकास के फायदे आम आदमी तक पहुंचें। हम अब भी गरीबों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं और हमारे समाज के अन्य पिछड़े वर्गों के कल्याण के लिए प्रतिबध्द हैं।
21- आज हमें अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अनेक नए कार्यक्रमों की ज़रूरत नहीं है बल्कि जो योजनाएं हम पहले शुरू कर चुके हैं उन्हें  ज्यादा प्रभावी ढंग से कार्यान्वित करने, भ्रष्टाचार एवं सार्वजनिक धन के दुरुपयोग को न्यूनतम करने की ज़रूरत है। हम राज्य सरकारों, पंचायती राज संस्थाओं और नागरिक समाज समूहों की भागीदारी में इस लक्ष्य को हासिल करना चाहते हैं।
22- आज सरकार साम्प्रदायिक शान्ति और सौहाद्र बनाए रखने के लिए प्रतिबध्द है। हम अल्पसंख्यकों की रक्षा करना तथा उनकी विशेष ज़रूरतें पूरी करना भी अपना फर्ज समझते हैं। इसीलिए हमने अनेक नए कार्यक्रम शुरू किए हैं- हम इस कार्य को पूरे जोश के साथ आगे बढ़ाएंगे।
23- पिछले 6 सालों से हम शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रहे हैं हमारा यह प्रयास है कि हर बच्चे को, चाहे वह अमीर हो, या गरीब, चाहे वह समाज के किसी भी तबके का हो, ऐसी शिक्षा मिले, जिससे उसकी शख्सियत का सही विकास हो सके और वह देश का एक जिम्मेदार नागरिक बन सके
24- उच्च शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्रों में दो अलग-अलग आयोग गठित किए जाने के लिए हमारी सरकार जल्द ही संसद में विधेयक लाएगी, ताकि इन क्षेत्रों में और सुधार हो सके 
25- हमारे नागरिकों की अच्छी सेहत के लिए सिर्फ पौष्टिक भोजन और अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं ही काफी नहीं हैं। हमें अपने गांवों, कस्बों और शहरों को साफ-सुथरा रखना पड़ेगा।
26.        मैं चाहूंगा कि एक साफ-सुथरा भारत बनाने के अभियान के तहत हम शुरू से    ही  स्कूलों में बच्चों को सफाई की अहमियत समझाएं। मैं राज्य सरकारों, पंचायती राज संस्थाओं,   नागरिक समाज समूहों  और आम नागरिकों से अपील करता हूँ कि वे इस अभियान को सफल बनाएं
27- हमें अपने प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल सावधानी और किफायत से करना   चाहिए। हमारी सरकार की कोशिश रहेगी कि देश के आर्थिक विकास की योजनाओं में पर्यावरण की जरूरतों का पूरा ख्याल रखा जाए।
28-       हमारे बुनियादी ढांचे में काफी कमियां हैं, जिनका हमारे आर्थिक विकास पर बहुत बुरा असर पड़ता है। अच्छा बुनियादी ढांचा बनाने के लिए जितने संसाधन चाहिए, उतने सरकार के लिए अकेले जुटा पाना मुश्किल है। इसीलिए, इस काम में हमने निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए व्यवस्थाएं बनाने की कोशिश की है। करीब डेढ महीने पहले मैंने दिल्ली हवाई अड्डे के नए टर्मिनल को देश को समर्पित किया। यह एक शानदार टर्मिनल है, जो एक  रिकार्ड समय में पूरा किया गया है। हम अपने बुनियादी ढांचे में सुधार लाने के लिए इस तरह की कोशिशें जारी रखेंगे।
29-हमारी आंतरिक सुरक्षा के लिए नक्सलवाद एक गंभीर समस्या है। हिंसा का  रास्ता अख्तियार करने वालों से हम सख्ती से निपटेंगे। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कानून का राज कायम रखने के लिए हम राज्य सरकारों की हर तरह से मदद करेंगे।
30- मैं एक बार फिर नक्सलवादियों से अपील करता हूं कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर सरकार के साथ  बातचीत करें और सामाजिक और आर्थिक विकास तेज करने में हमारा साथ दें।
31- नक्सलवाद की चुनौती का सामना करने के लिए  केन्द्र और  राज्यों को पूरी तरह से एकजुट होकर काम करना होगा। केन्द्र के सहयोग और राज्यों के आपसी तालमेल के बिना इस गंभीर समस्या से निपटना किसी भी राज्य के लिए बहुत मुश्किल है। हम सभी को चाहिए कि अपने निजी और राजनैतिक स्वार्थों से ऊपर उठकर इस चुनौती का सामना करें।
32- जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, ज्यादातर नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्र विकास के मामले में बहुत पिछड़े हुए हैं। इन क्षेत्रों के  विकास के लिए मैंने योजना आयोग को एक विस्तृत योजना बनाने को कहा है, जिस पर हम पूरी तरह से अमल करेंगे।
33- हमारा यह भी प्रयास है कि हमारे आदिवासी भाई-बहन देश के विकास की मुख्यधारा में शामिल हो सकें। उनसे जो जमीन विकास की योजनाओं के लिए ली जाती है, उसके बदले में उचित मुआवजें के साथ इन क्षेत्रों के विकास में भी उनकी हिस्सेदारी होनी चाहिए।
34- उत्तर-पूर्व के राज्यों के प्रति हमारी एक विशेष जिम्मेदारी है। मैं उत्तर-पूर्व के सभी राजनैतिक दलों और गुटों से यह कहना चाहता हूं कि प्रांत या जनजाति के नाम पर विवाद करने से हम सबका नुकसान ही होगा। उलझे हुए मुद्दों को सुलझाने के लिए सिर्फ बातचीत ही एक तरीका है। जहां तक केन्द्र सरकार का सवाल है, हम ऐसी हर बातचीत के सिलसिले को बढावा देने के लिए तैयार हैं, जिससे समस्याओं को सुलझाने की दिशा में आगे बढा ज़ा सके।
35- अभी कुछ दिन पहले लद्दाख में बादल फटने से बहुत से लोगों की जानें गईं दुख की इस घड़ी में सारा देश लद्दाख के लोगों के साथ है मैं यह भी भरोसा दिलाना चाहता हूं कि लद्दाख में पुनर्वास के लिए भारत सरकार हर संभव कदम उठाएगी
36- जम्मू-कश्मीर में भी हम हर उस व्यक्ति या गुट से बातचीत करने को तैयार हैं, जो हिंसा का रास्ता छोड़ दे। कश्मीर भारत का एक अभिन्न हिस्सा है। इस दायरे के अंदर हम हर  ऐसी बातचीत को आगे बढाने को तैयार हैं, जिससे जम्मू-कशमीर के आम आदमी की सत्ता में हिस्सेदारी और सहूलतें बढें।
37- भारत के लोकतंत्र में इतनी उदारता है कि वह किसी भी हिस्से और गुट की मुश्किलों को हल कर सके। अभी हाल ही में मैंने जम्मू-कश्मीर के राजनैतिक दलों के साथ एक बैठक की है। हम इस सिलसिले को और आगे बढाने की कोशिश करेंगे। मैं अपने देशवासियों से, खासतौर पर उन नागरिकों से, जो जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्व में रहते हैं, यह कहना चाहूंगा कि वे लोकतांत्रिक तौर-तरीकों से अपनी और देश की बेहतरी के लिए हमारे साथ मिलकर काम करें।
38- जहां तक पाकिस्तान का ताल्लुक है, हम उनसे ये उम्मीद करते हैं कि वे अपनी ज़मीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ दहशतगर्दी की गतिविधियों के लिए नहीं होने देंगे। पाकिस्तान के  साथ हमारी जो भी बातचीत हुई है, उसमें हम इस बात पर ज़ोर देते रहे हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो बातचीत का कोई भी सिलसिला बहुत आगे नहीं बढ पाएगा।
39- करीब डेढ महीने के बाद दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेल शुरू होंगे। मुझे विश्वास है कि सभी देशवासी इन खेलों को एक राष्ट्रीय त्यौहार के रूप में लेकर उन्हें सफल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
भाषण के मुख्य बिन्दु
  • प्रधानमंत्री ने आशावादी रुख के साथ राष्ट्र को संबोधित किया,
  •  नए समावेशी भारत के लिए काम करने की बात कही,
  • जम्मू-कश्मीर एवं पूर्वोत्तर के अलगाववादी और असंतुष्ट समूहों के विभिन्न दृष्टिकोणों और महत्वाकांक्षाओं को मिलाने के लिए भारतीय लोकतंत्र की क्षमता का अनुभव करने का निमंत्रण,
  • भारत पाकिस्तान को खुशहाल, मजबूत, स्थिर और अखंड राष्ट्र के रूप में देखने का इच्छुक लेकिन उसे आतंकवाद से दूरी बनानी होगी।
  • सरकार आम आदमी के प्रति कटिबध्द, वह खाद्य सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा के लिए कार्य कर रही है।
  • किसानों की दशा इतनी अच्छी पहले कभी नहीं रही, रिकार्ड न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया गया।
  • मुद्रास्फीति कम हो जाएगी।
  • भारत निर्माण फ्लैगशिप कार्यक्रमों को सुदृढ और दुरुस्त करने का समय
  • स्वच्छ भारत अभियान का आह्वान
  • सार्वजनिक जीवन में कटु शब्दों और अनुचित भाषा के इस्तेमाल से चेताया
  • भारत का भविष्य उज्ज्वल, आत्मविश्वास बनाए रखने का समय।
  • कोई नया कार्यक्रम नहीं, मौजूदा कार्यक्रमों को सफल बनाने पर ध्यान।


  • यह सुनिश्चित करने के प्रयास करने चाहिए कि ऐसा समग्र विकास हो जिससे सभी लोग समृध्द बनें।
  • राजनीतिक दृष्टिकोण, आर्थिक प्रगति और वैज्ञानिक तरक्की को मानव कल्याण, सहनशीलता, आपसी सम्मान और निस्वार्थ भावना के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
  • युवा राष्ट्र के भविष्य के निर्माता हैं। हमें उनमें बलिदान, समर्पण, देशभक्ति और राष्ट्र सेवा की भावना का संचार करना चाहिए।
  • वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान हमारी अर्थव्यवस्था का लचीलापन इस बात का प्रमाण था कि हम अनेक दूसरे देशों की तुलना में इस संकट से बेहतर ढंग से निपट सकें। हमारा भविष्य बहुत सी संभावनाओं और इरादों से भरपूर है।
  • समावेशी विकास राष्ट्र की आर्थिक इमारत के स्तम्भों में से एक है। हम केवल तभी प्रतिस्पध्र्दा कर सकेंगे जब कोई भी भूखे पेट सोए, जब कोई फुटपाथ पर सोए और जब हर बच्चा स्कूल जाए।
  • शिक्षा, क्षमता निर्माण, आवास, स्वास्थ्य देखरेख और पोषण सरकार के कार्यक्रम की प्राथमिकता हैं।
  • शिक्षा के अधिकार के कानून ने मुपऊत और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा बच्चे का मूल अधिकार बना दिया है।
  • माध्यमिक शिक्षा का भी सार्वभौमिकरण महत्वपूर्ण है जो राष्ट्र को बौध्दिक शक्ति उपलब्ध कराएगी।
  • सभी क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहित किया जाएगा तथा देश को अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के मामले में अग्रणी बनाया जाएगा।
  • भौतिक ढांचागत सुविधाओं के निर्माण में तेजी लाने की ज़रूरत है।
  • उद्योगों को निरंतर विकास करना चाहिए। भारतीय कम्पनियों को कुशल और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्ध्दी बनने के लिए प्रयास जारी रखने चाहिए।
  • दूसरी हरित क्रान्ति की दिशा में आगे बढने क़े लिए नई दिशाओं और ताजा विचारों की ज़रूरत है ताकि कृषि उत्पादन, उत्पादकता और मुनाफा बढ़ सके।
  • उद्योगों को कृषि के साथ जोड़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को आधार उपलब्ध होगा तथा कृषि संबंधी व्यापार को भी बढावा मिलेगा।
  • दक्षता विकास, व्यावसायिक प्रशिक्षण और समाज कल्याण कार्यक्रमों के जरिए ग्रामीण गरीबों और कृषि श्रमिकों की सहायता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
  • महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के कार्यान्वयन में विशेष स्थानीय हालात को ध्यान में रखने की ज़रूरत है तथा ग्रामीण विकास में प्रगति लाने के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं को आपस में जोड़ने के लिए नवप्रयासों को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।
  • भ्रष्टाचार कतई सहन करने और जन सेवा के उच्च मानदंडों को अपनाने से कार्यदक्षता बढ़ेगी और विकास एवं तरक्की को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • नागरिकों को राष्ट्र के भविष्य को सुदृढ और उज्ज्वल बनाने में योगदान देना चाहिए।
  • नागरिकों को कानून का पालन करना चाहिए और नैतिक उत्थान के लिए काम करना चाहिए। मजबूत पारिवारिक संबंध कमजोर होते जाना, दूसरों के प्रति असंवेदनशीलता बढ़ना और सामाजिक जागरूकता में गिरावट चिंता का कारण है और इस स्थिति को बदला जाना चाहिए।
  • राष्ट्र निर्माण के लिए सामंजस्य की भावना ज़रूरी है। यह तभी संभव है जब बातचीत को संवाद का माध्यम चुना जाए। एक-दूसरे की बात सुनकर, एक-दूसरे के नज़रिए का आदर करके और एक-दूसरे को समझने से हम अपने समक्ष मौजूद मुद्दों का समाधान तलाश सकते हैं।
  • उग्र विचारधाराओं के प्रवर्तकों और वामपंथी उग्रवाद के रास्ते पर चलने वालों को हिंसा का रास्ता छोड़ देना चाहिए। उन्हें तरक्की और विकास के राष्ट्र के प्रयासों में शामिल होना चाहिए।
  • आतंकवाद विश्व की शांति, स्थिरता और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इसे पराजित करने के लिए सभी देशों को मिलकर काम करना चाहिए, ताकि आतंकवादियों को कहीं कोई आश्रय, प्रशिक्षण की जगह, कोई वित्तीय साधन, कोई ढांचागत सहायता और उनकी विचारधारा की तरफदारी करने वाला हो।
  • हमारे पास महान राष्ट्र का निर्माण करने की प्रतिभा है। सामूहिक इच्छा शक्ति एवं कड़ी मेहनत से हम इसे हासिल कर लेंगे।

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