कल्‍पना पालखीवाला
ओजोन परत के संरक्षण के लिए 16 सितंबर, 1987 को मांट्रियल पदार्थ संधि पर हस्‍ताक्षर किया गया जो ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों पर केंद्रित है। सन् 1995 से इस संधि की याद में हर वर्ष 16 सितंबर को अंतर्राष्‍ट्रीय ओजोन परत संरक्षण दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष ओजोन परत संरक्षण दिवस का ध्‍येयवाक्य ओजोन परत संरक्षण: अपने सर्वश्रेष्‍ठ हित में शासन और अनुपालन है। मांट्रियल संधि को इतिहास में सबसे सफल अंतर्राष्‍ट्रीय पर्यावरण संधि के रूप में जाना जाता है। इस संधि के सफल होने का दूसरा सबूत यह है कि सभी देशों ने इस उल्‍लेखनीय संधि को अनुमोदित कर दिया है। यह संधि पूरे विश्‍व समुदाय को करीब लाती है।

यह संधि वर्षों के अनुसंधान का सुपरिणाम है जिसके तहत यह स्‍थापित हुआ कि वायुमंडल में छोड़े जाने वाले रसायन ओजोन को नुकसान पहुंचाते हैं। समतापमंडल में क्षरण का शिकार हो चुकी ओजोन परत सूर्य की पराबैंगनी किरणों को धरती पर पहुंचने से नहीं रोक पातीं जिससे इन किरणों का मानवजाति, वनस्‍पति और जीव जंतुओं पर हानिकारक असर पड़ता है। विश्‍व स्‍वास्थ्‍य संगठन के मुताबिक हर वर्ष दुनियाभर में त्‍वचा कैंसर के 20 से 30 लाख मामले सामने आते हैं और इनमें से 20 प्रतिशत मामले सूर्य की तीक्ष्‍ण किरणों की वजह से होते हैं । 

वैज्ञानिक परीक्षणों के निष्‍कर्षों पर आधारित यह संधि सभी हस्‍ताक्षरकर्ता देशों को क्‍लोरोफ्लोरो (सीएफसी), हैलोन, कार्बन टेट्राक्लोराइड (सीटीसी) जैसे खतरनाक रसायनों को निश्‍चित समय सीमा में चरणबद्ध तरीके से हटाने का आदेश देती है। बाद के अध्‍ययनों से हाइड्रो क्‍लोरोफ्लोरोकार्बन और मिथाइल ब्रोमाइड जैसे और खतरनाक रसायनों का पता चला और उन्हें चरणबद्ध तरीक से खत्‍म करने का लक्ष्‍य रखा गया। 

पिछले 20 सालों में मांट्रियल प्रोटोकॉल से ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों (ओडीएस) का उत्‍पादन और इस्‍तेमाल चरणबद्ध तरीके से पूर्णत: खत्‍म करने में मदद मिली। इससे न केवल ओजोन परत को बचाने में मदद मिली बल्‍कि वैश्‍विक जलवायु प्रणाली को भी लाभ पहुंचा। यह मांट्रियल प्रोटोकॉल के इतिहास में अनोखा वर्ष है क्‍योंकि वर्ष के पहले ही दिन दुनियाभर में सीएफसी, सीटीसी और हेलोन जैसे ओडीएस का उत्‍पादन और इस्‍तेमाल बंद हो गया। 

वियना संधि और मांट्रियल संधि में भागीदार के रूप में भारत भी ओजोन परत को बचाने और सीएफसी, हेलोन, सीटीसी, मिथाइल क्‍लोरोफार्म, मिथाइल ब्रोमाइड तथा एचसीएफसी जैसे ओडीएस को चरणबद्ध तरीके से हटाने के प्रति चिंताकुल है। ये रसायन औद्योगिक और फार्मास्यूटिकल एयरोसोल, प्रशीतन और एयरकंडीशनिंग उपकरणों, अग्निशमन उपकरण, धातुकटाव, कपड़ा सफाई, आदि कार्यों में इस्‍तेमाल होते हैं। 

मांट्रियल संधि से संबंधित गतिविधियों के क्रियान्‍वयन के लिए जिम्‍मेदार हितधारकों द्वारा 1993 से किए गए सतत प्रयासों से भारत एक जनवरी, 2010 को सीएफसी, सीटीसी और हेलोन के उत्‍पादन और इस्‍तेमाल पर चरणबद्ध तरीके से रोक लगाने में सफल हुआ। केवल अस्‍थमा एवं श्‍वास संबंधी अन्‍य बीमारि‍यों के इलाज में मीटर्ड डोज इनहेलर्स ﴾एमडीआई﴿ के नि‍र्माण के लि‍ए सीएफसी का दवा संबंधी इस्‍तेमाल जारी रहा। 

भारत ने पहली अगस्‍त, 2008 को ही सीएफसी के उत्‍पादन पर सक्रि‍यतापूर्वक रोक लगा दी। ऐसा मांट्रि‍यल संधि‍ की समयसीमा वर्ष से 18 महीने पहले हो गया है। इससे सीएफसी के इस्‍तेमाल पर चरणबद्ध तरीके से रोक लग पायी। हालांकि‍ इलाज संबंधी सीएफसी की आपूर्ति सुनि‍श्‍चि‍त करने के लि‍ए पर्याप्‍त कदम उठाए गए। इस संधि‍ के अनि‍वार्य इस्‍तेमाल प्रावधान के तहत वर्ष 2010-2013 के संक्रमण काल के दौरान एमडीआई का उत्‍पादन जारी रहेगा। 

सीटीसी, सीएफसी जैसे ओडीएस को चरणबद्ध तरीके से हटाने में मांट्रि‍यल संधि‍ की सफलता को पहचानते हुए इस संधि‍ से जुड़े पक्षों की 19 वीं बैठक में एचसीएफसी को पूरी तरह हटाने की समयसीमा वर्ष 2040 को घटाकर वर्ष 2030 करने का नि‍र्णय लि‍या गया। एचसीएफसी की आधाररेखा 2009 और 2010 में उसके औसत उत्‍पादन और इस्‍तेमाल के आधार पर तय की जाएगी। 

एचसीएफसी को चरणबद्ध तरीके से हटाने की प्रबंधन योजना ﴾एचपीएमपी﴿ उद्योग जगत, संबंधित उद्योग संघ, अनुसंधान संगठनों, औद्योगि‍क इस्‍तेमालकर्ता संगठनों और एनजीओ के साथ मि‍लकर तैयार की जा रही है। सि‍तंबर, 2009 में क्षेत्रीय कार्यकारी दल की बैठक हुई थी। बैठक के नि‍ष्‍कर्षों के आधार पर भारत से एचसीएफसी को चरणबद्ध तरीके से हटाने का रोडमैप तैयार कि‍या गया है। केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री, स्‍वतंत्र प्रभार श्री जयराम रमेश ने अक्‍टूबर, 2009 में इस रोडमैप को जारी कि‍या। पहले चरण के एचपीएमपी के लि‍ए तैयारी अंति‍म चरण में है और इसे साल के अंत तक मंजूरी के लि‍ए बहुस्‍तरीय कोष ﴾एमएलएफ﴿ के एक्‍स-कॉम में पेश कि‍या जाएगा। 

सरकार ने भी मौजूदा और नये उपक्रमों द्वारा नई प्रौद्योगि‍कि‍यों के इस्‍तेमाल को बढ़ावा देने के लि‍ए कई नीति‍गत कदम उठाए हैं जि‍नमें वि‍त्‍तीय और वि‍नि‍यामक दोनों कदम शामि‍ल हैं। चरणबद्ध तरीके से ओजोन क्षरण पदार्थों को हटाने से संबंधि‍त योजनाओं के क्रि‍यान्‍वयन के लि‍ए आवश्‍यक पूंजीगत सामानों पर शीमाशुल्‍क और उत्‍पाद शुल्‍क में भी छूट प्रदान की गई है। इन योजनाओं के लि‍ए एमएलएफ धन उपलब्‍ध कराता है। ये प्रोत्‍साहन पैकेज नये औद्योगि‍क प्रति‍ष्‍ठानों और क्षमता उन्‍नयन में जुटी मौजूदा औद्योगि‍क इकाइयों दोनों को प्राप्‍त है। ओजोन क्षरण पदार्थों के उत्‍पादन, इस्‍तेमाल और व्‍यापार के विनि‍यमन से संबंधि‍त ओजोन परत क्षरण पदार्थ ﴾वि‍नि‍यमन एवं नि‍यंत्रण﴿ नि‍यमावली, 2000 भी लागू की गयी है।

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