स्टार न्यूज़ एजेंसी 
खाने में कम फैट लें यह कहना गलत है, यह संदेश दिया जाना चाहिए कि अपने खाने में खूब सारी ताजी सब्जियां और फल शामिल करें.
हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि लो फैट डाइट लेने की सलाह देने के बजाय मरीजों को यह बताया जाए कि उन्हें कौन सी चीज खानी चाहिए और कौन सी नहीं. उदाहरण के तौर ज्यादा ताजे फल खाना, तो वह आसानी से बात समझ सकता है. पौष्टिकता की बात करने के बजाय यह बताया जाए कि आप अपने रोजाना के खाने में फैट की मात्रा 30 पर्सेंट कम करें.

व्यथा यह है कि आजकल फैट कम करने के विकल्प के तौर पर खाद्य पदार्थ उत्पादक खाने-पीने की चीजों में इस तरीके का बदलाव लेकर आ रहे हैं, जो सेहत के लिए सही नहीं है. वे आसानी से व्हाइट को कम फैट की खुराक मान बैठते हैं और इसे भोजन के रूप में अपनाने लगते है. गलतफहमी में उपभोक्ता भी ऐसी चीजों के आदी होते जा रहे हैं. ज्यादा फैट वाली चीजों की जगह पर कम फैट वाले फल, सब्जियां, फलियां, साबुत अनाज जैसी चीजें लेने के बजाय उपभोक्ता फैट फ्री स्नैक्स और जंक फूड खाते हैं.

खाने में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढऩे से शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल (एचडीएल) की मात्रा कम हो सकती है. ऐसे में टाइप-टू डायबीटीज, मोटापा जैसी दिक्कतों का खतरा बढ़ जाता है.

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