शराब के फ़ायदे बनाम ख़तरे

Posted Star News Agency Friday, November 07, 2014



स्टार न्यूज़ एजेंसी
जो लोग शराब नहीं पीते हैं, उन्हें शराब की शुरुआत नहीं करनी चाहिए और जो लोग पीते हैं, उन्हें सीमित मात्रा में शराब का सेवन करना चाहिए और या बिल्कुल न लें जैसे विषय पर सवाल खड़े होते रहे हैं.
हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल के मुताबिक़ लोगों में यह प्रवृत्ति है कि सर्दी में और नये साल के मौके पर कहीं ज्यादा शराब का सेवन करते हैं. जो लोग ताउम्र शराब नहीं पीते हैं, उनकी आसानी से सीमित मात्रा में भी शराब के सेवन करने वालों या कभी-कभार लने वालों से तुलना नहीं की जा सकती. उन्हें शराब लेने की सलाह तब भी नहीं दी जानी चाहिए जब वे इसे न्यायसंगत साबित कर रहे हों.

बीमारियां जिनमें बचाव के तौर पर सीमित मात्रा में शराब का सेवन करते हैं जैसे कि कोरोनरी हार्ट डिसीज, इस्कैमिक पैरालिसिस और मधुमेह बुढ़ापे में अधिक प्रचलित हैं और उन लोगों में जो कोरोनरी हार्ट डिसीज के आशंकित तथ्य की श्रेणी में आते हैं. ऐसे लोगों में सीमित मात्रा में शराब के सेवन का संबंध मृत्यु को कम करने से है जो बिल्कुल भी नहीं पीते या फिर कभी कभार ही पीते हैं. कम और मध्यम उम्र के लोगों में खासकर महिलाओं में सीमित मात्रा में शराब के सेवन से (ट्रॉमा और स्तन कैंसर से) मौत का खतरा बढ़ सकता है. जो महिलाएं शराब का सेवन करती हैं, उन्हें सप्लीमेंट फोलेट लेना चाहिए जो स्तन कैंसर की बीमारी के खतरे को कम करने में मददगार होता है. 45 से कम उम्र वाले पुरुषों में जो शराब का सेवन करते हैं, उनमें फायदे से ज्यादा नुकसान होता है. इन समूहों में सीमित मात्रा में शराब लेने से किसी भी तरह से मौत की संभावना रहती है, लेकिन रोजाना एक ड्रिंक से कम के सेवन सुरक्षित माना गया जिससे किसी भी तरह का खतरा नहीं रहता है. व्यक्तिगत तौर पर शराब के सेवन पर विवाद है कि इसे कितना लिया जाए और किस स्तर पर यह खतरनाक होती है.

आदमी औरत से ज्यादा शराब का सेवन कर सकता है. आदर्श रूप में एक दिन में शराब करीब 6 ग्राम लेनी चाहिए. चिकित्सीय तौर पर एक घंटे में 10 ग्राम लेना सुरक्षित होता है, एक दिन में 20 ग्राम और एक हफ्ते में 70 ग्राम लेना सुरक्षित होता है. महिलाओं में सुरक्षित मात्रा इसकी आधी होती है.

एक नज़र

कैमरे की नज़र से...

Loading...

ई-अख़बार

Blog

  • 3 दिसम्बर 2018 - वो तारीख़ 3 दिसम्बर 2018 थी... ये एक बेहद ख़ूबसूरत दिन था. जाड़ो के मौसम के बावजूद धूप में गरमाहट थी... फ़िज़ा गुलाबों के फूलों से महक रही थी... ये वही दिन था ज...
  • अल्लाह की रहमत से ना उम्मीद मत होना - ऐसा नहीं है कि ज़िन्दगी के आंगन में सिर्फ़ ख़ुशियों के ही फूल खिलते हैं, दुख-दर्द के कांटे भी चुभते हैं... कई बार उदासियों का अंधेरा घेर लेता है... ऐसे में क...
  • राहुल ! संघर्ष करो - *फ़िरदौस ख़ान* जीत और हार, धूप और छांव की तरह हुआ करती हैं. वक़्त कभी एक जैसा नहीं रहता. देश पर हुकूमत करने वाली कांग्रेस बेशक आज गर्दिश में है, लेकिन इसके ...

Like On Facebook

एक झलक

Search

Subscribe via email

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

इसमें शामिल ज़्यादातर तस्वीरें गूगल से साभार ली गई हैं