फ़िरदौस ख़ान
विकास का मतलब सिर्फ़ किसी चीज़ या जगह को ख़ूबसूरत बनाना ही नहीं है, बल्कि विकास सुविधाओं में भी विस्तार करता है. देश का सबसे लंबा 'आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे' इसकी एक बेहतरीन मिसाल है. सौंदर्य से परिपूर्ण हरेभरे इस एक्सप्रेस वे पर अत्याधुनिक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है. सड़क हादसे या कोई और ज़रूरत पड़ने पर हैलीकॉप्टर का भी इंतज़ाम है. यहां जगह-जगह सीसीटीवी लगाए गए हैं. साथ ही मोर्टल, पैट्रोल पंप और फ़ूड कॊर्नर भी मौजूद हैं. इसकी एक बड़ी ख़ासियत यह भी है कि आपातकाल या जंग के वक़्त यहां पर लड़ाकू विमान उड़ान भर सकते हैं और उन्हें उतारा भी जा सकता है, यानी यह एक्सप्रेस-वे एयरस्ट्रिप की तरह काम करेगा. इस दौरान दोनों तरफ़ से यातायात भी सामान्य रूप से चलता रहेगा.
हाईवे पर बनने वाले इस रनवे को हाई-वे स्ट्रिप और रोड रनवे कहा जाता है. पड़ौसी देश पाकिस्तान, चीन, पोलैंड, स्वीडन, जर्मनी और सिंगापुर में ऐसे रोड रनवे हैं. ग़ौरतलब है कि सड़क के जिस हिस्से का इस्तेमाल रनवे के लिए किया जाता है, उस पर बिजली के खंभे और मोबाइल फ़ोन के टॊवर नहीं लगाए जाते. इस हिस्से पर उन्हीं सुविधाओं मुहैया कराई जाती हैं, जिनकी ज़रूरत हवाई जहाज़ों को होती है.

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे को यमुना एक्सप्रेस वे और ताज एक्सप्रेस वे के नाम से भी जाना जाता है. यह भारत की सबसे लंबी छह लेन सड़क है. आने वाले वक़्त में तीन किमी लंबी हवाई पटटी के पास (खंभौली-कबीरपुर के बीच) एक्सप्रेस-वे की सड़क को 12 लेन किया जाएगा, ताकि हवाई जहाज़ों की लैंडिंग और टेकऑफ़ के वक़्त यातायात सामान्य रहे. तक़रीबन 13 हज़ार 200 करोड़  करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेस-वे के रास्ते में गंगा-जमुना समेत पांच नदियां आती हैं.  370 किलोमीटर लंबा और 110 मीटर चौड़ा यह एक्सप्रेस-वे उन्नाव, कानपुर, हरदोई, औरैया, मैनपुरी, कन्नौज, इटावा और फ़िरोज़ाबाद को आगरा से जोड़ेगा. इस एक्सप्रेस-वे पर 13 बड़े और 52 छोटे पुल बनाए गए हैं. इस पर चार आरओबी भी बने हैं. इसके रास्ते में पड़ने वाले क़स्बों और गांवों के लोगों की सुविधा के लिए इस पर 132 फुट ओवरब्रिज और 59 अंडरपास बनाए गए हैं. इससे लोगों को आवाजाही में किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी. फ़िलहाल इस एक्सप्रेस-वे पर एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम भी लगाया जाएगा. इसके अलावा साइड बैरीकेटिंग में आधुनिक रिफ़्लेक्टिव पेंट किया जाएगा, जो इसे और ख़ूबसूरत बनाएगा. इससे दुर्घटना और ट्रैफ़िक जाम की समस्या से भी लोगों को निजात मिलेगी.

दरअसल, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट है. उन्होंने इसमें बहुत दिलचस्पी ली, तभी इसे तक़रीबन 22 महीने में पूरा कर लिया गया. लिछले दिनों वायु सेना के अधिकारियों के साथ कई अन्य अधिकारियों ने एक्सप्रेस-वे का मुआवना किया था. इस पर लड़ाकू विमानों उड़ान भरने और उतरने का अभ्यास भा कराया गया. समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव के 78वें जन्मदिन 21 नवंबर को इस एक्सप्रेस-वे का उद्गाटन किया गया. इस मौक़े पर ग्वालियर से आए मिराज 2000 और बरेली से आने वाले चार सुखोई विमानों ने उड़ान भरी. ये लड़ाकू विमान तक़रीबन 300 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ़्तार से एक्सप्रेस वे को छूकर वापस उड़ गए. उद्घाटन के बावजूद एक्सप्रेस वे आम वाहनों के लिए नहीं खोला गया, क्योंकि अभी तक एक्सप्रेस वे की सेफ़्टी ऑडिट नहीं हुई है. सेफ़्टी ऑडिट का काम पूरा होने के बाद इसे अगले माह दिसंबर में आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा.
इस अत्याधुनिक एक्सप्रेस वे पर वाहनों को तेज़ रफ़्तार से चलने की छूट नही होगी. अधिकतम गति सीमा तोड़ने पर कैमरे से जुड़ा अलार्म बज उठेगा. इसकी जानकारी टोल प्लाज़ा पर भी दी जाएगी और टोल प्लाज़ा से पहले ही वाहन को रोक कर जुर्माना वसूला जाएगा. एक्सप्रेस वे पर वाहनों की रफ़्तार की सीमा तय कर दी गई है. यहां पर हल्के वाहनों की अधिकतम गति 100 और भारी वाहनों की 60 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है. इससे तेज़ रफ़्तार में वाहन चलाने पर चालकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी. एक्सप्रेस वे पर अत्याधुनिक नाइट विज़न कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो वाहनों की रफ़्तार पर नज़र रखेंगे. दरअसल, सड़क हादसों के मद्देनज़र ऐसा करना बेहद ज़रूरी था. इस एक्सप्रेस पर पर अकसर हादसे होते रहते हैं, जिनमें जान और माल दोनों का ही नुक़सान होता है.

एक्सप्रेस-वे को हवाई पट्टी के तौर पर इस्तेमाल किए जाना वक़्त की ज़रूरत है. आज जब पड़ौसी देश आए-दिन आंखें दिखाते रहते हों, तो ये और भी ज़रूरी हो जाता है. पाकिस्तान की गतिविधियां किसी से छुपी नहीं हैं. चीन से भी अकसर विवाद ही रहता है. ऐसे हालात में देश के सबसे लंबे एक्सप्रेस-वे पर हवाई पट्टी का निर्माण किया जाना एक सराहनीय क़दम है. इससे आने वाले वक़्त में निर्माण कार्यों को लेकर नये आयाम भी स्थापित होंगे.  फ़िलहाल इसे एक अच्छी शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है. जल्द ही देश में ऐसे और एक्सप्रेस-वे बनाने का काम शुरू होगा.

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