दिवाली की रात...

Posted Star News Agency Thursday, October 19, 2017 ,


वो रात
दिवाली की रात थी
हर सिम्त
रौशनी बिखरी थी
स्याह आसमान में
सितारे जगमगा रहे थे
और
ज़मीन पर
दीयों की जगमग थी
लगता था
क़ुदरत ने
मुट्ठी भर रौशनी
सारी कायनात में
छिटक दी हो
और
कायनात रौशनी का
त्यौहार मना रही हो
मगर
मेरे घर-आंगन में अंधेरा था
हमेशा की तरह...
-फ़िरदौस ख़ान

एक नज़र

कैमरे की नज़र से...

Loading...

ई-अख़बार

Blog

  • एक और ख़ुशनुमा दिसम्बर... - पिछले साल की तरह इस बार भी दिसम्बर का महीना अपने साथ ख़ुशियों की सौग़ात लेकर आया है... ये एक ख़ुशनुमा इत्तेफ़ाक़ है कि इस बार भी माह के पहले हफ़्ते में हमें वो ...
  • अल्लाह की रहमत से ना उम्मीद मत होना - ऐसा नहीं है कि ज़िन्दगी के आंगन में सिर्फ़ ख़ुशियों के ही फूल खिलते हैं, दुख-दर्द के कांटे भी चुभते हैं... कई बार उदासियों का अंधेरा घेर लेता है... ऐसे में क...
  • राहुल ! संघर्ष करो - *फ़िरदौस ख़ान* जीत और हार, धूप और छांव की तरह हुआ करती हैं. वक़्त कभी एक जैसा नहीं रहता. देश पर हुकूमत करने वाली कांग्रेस बेशक आज गर्दिश में है, लेकिन इसके ...

Like On Facebook

एक झलक

Search

Subscribe via email

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

इसमें शामिल ज़्यादातर तस्वीरें गूगल से साभार ली गई हैं