-फ़िरदौस ख़ान
संगीत दिलो-दिमाग़ को बहुत सुकून देता है... अगर भक्ति संगीत की बात की जाए, तो यह रूह की गहराई तक में उतर जाता है... हमारी पसंद के बहुत से भक्ति गीत हैं, जिन्हें सुनते हुए हम उम्र बिता सकते हैं... ऐसा ही एक गीत है- मंगल भवन अमंगल हारी... 1975 में आई फ़िल्म गीत गाता चल में इसे सचिन पर फ़िल्माया गया था... इस गीत को जब भी सुनते हैं, एक अजीब-सा सुकून मिलता है... लगता है सिर्फ़ हम हैं और राम... तीसरा वहां कोई नहीं है...

मंगल भवन अमंगल हारी
द्रवहु सुदसरथ अचर बिहारी
राम सिया राम सिया राम जय जय राम- 2
हो, होइहै वही जो राम रचि राखा
को करे तरफ़ बढ़ाए साखा

हो, धीरज धरम मित्र अरु नारी
आपद काल परखिये चारी

हो, जेहिके जेहि पर सत्य सनेहू
सो तेहि मिलय न कछु सन्देहू

हो, जाकी रही भावना जैसी
रघु मूरति देखी तिन तैसी

रघुकुल रीत सदा चली आई
प्राण जाए पर वचन न जाई
राम सिया राम सिया राम जय जय राम

हो, हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता
कहहि सुनहि बहुविधि सब संता
राम सिया राम सिया राम जय जय राम...

बहरहाल, हम यह गीत सुनते हैं...

एक नज़र

कैमरे की नज़र से...

Loading...

ई-अख़बार

Like On Facebook

Blog

  • मेरी इब्तिदा - मेरे महबूब ! मेरी इब्तिदा भी तुम हो और मेरी इंतेहा भी तुम है तुम्हीं तो हो अज़ल से अब्द तक... मेरे महबूब तुम्हें देखा तो जाना कि इबादत क्या है... *-फ़िरदौस ख़ान*
  • अज़ान क्या है - इन दिनों फ़ज्र की नमाज़ की अज़ान सुर्ख़ियों में है... आख़िर अज़ान क्या है और अज़ान में अरबी के जो लफ़्ज़ बोले जाते हैं, उनका मतलब क्या है? दरअसल, लोगों को नमाज़ के...
  • राहुल ! संघर्ष करो - *फ़िरदौस ख़ान* जीत और हार, धूप और छांव की तरह हुआ करती हैं. वक़्त कभी एक जैसा नहीं रहता. देश पर हुकूमत करने वाली कांग्रेस बेशक आज गर्दिश में है, लेकिन इसके ...

एक झलक

Search

Subscribe via email

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

इसमें शामिल ज़्यादातर तस्वीरें गूगल से साभार ली गई हैं