मलिक असगर हाशमी
मुस्लिम देशों में आजकल होने वाले बम धमाकों को आतंकवाद की घर वापसी करार दिया जा रहा है। दहशतगर्दी को सहयोग, समर्थन और शरण देने वाले खुद ही इसमें झुलस गए हैं। हमारे देश में भी कुछ लोगों ने इस रास्ते को अपना लिया है।

गोवा के मडगांव में दिवाली से एक रोज पहले हुए स्कूटर बम धमाके को इसी नजरिए से देखा जा रहा है। अब तक की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इस साजिश के रचनाकार के तार देश-विदेश से जुड़ा होना बताया जा रहा है। धमाके में शामिल हिंदूवादी संगठन सनातन संस्था के कार्यकर्ताओं के संबंध मालेगांव बम धमाके के आरोपियों तथा हिंदू आतंकी संगठन अभिनव भारत से होने के सबूत मिले हैं। इसे लेकर उर्दू मीडिया बेहद चिंतित है।

हिंदू आतंकवाद को बढ़ावा देने की कुछ लोगों की कोशिश पूरे मुल्क को भुगतनी पड़ सकती है। इसे नजरअंदाज करने की बजाए वक्त रहते दबाना बेहतर है। ‘उर्दू टाइम्स’ कहता है, ‘फिरकापरस्ती जब आतंकवाद का रूप ले ले तो समझ जाइए उस संप्रदाय और मुल्क का बेड़ा गर्क होने वाला है।’ साप्ताहिक ‘आपकी ताकत’ पूछता है ‘मुहब्बत की बजाए नफरत की वजह क्यों बन रहे हैं मजहब।’

आतंकवाद के मसले पर महजबी भेदभाव अच्छा नहीं। एक तरफ तो आधी-अधूरी जानकारी के चलते कश्मीर के दो क्रिकेटरों परवेज रसूल और मेराजुद्दीन से विस्फोटक रखने को लेकर घंटों पूछताछ होती है। दूसरी ओर हिंदू आतंकवाद के प्रति लापरवाही बरती जा रही है। गैर उर्दू मीडिया के फोकस में भी सिर्फ इस्लामी आतंकवाद ही है। हाल में आजमगढ़ की एक तंजीम ने आतंकवाद के आरोप में देश के विभिन्न जेलों में बेकसूर मुस्लिम नौजवानों को बंदी बनाकर रखने का मसला उठाया था। इसे किसी ने गंभीरता से नहीं लिया।

26/11 के आतंकी हमले के बाद से मालेगांव ब्लास्ट की फाइल लगभग बंद है। चूक के चलते इसके मुख्य आरोपियों प्रज्ञा ठाकुर, कर्नल पुरोहित पर से मकोका हट चुका है। ‘मुंसिफ’, ‘दहशतगर्दी-दोहरा सलूक’ में कहता है- मरहूम एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे ने हिंदू आतंकवाद का खुलासा नहीं किया होता तो न जाने यह कब तक पर्दे में रहता। आतंकियों का कोई मजहब, मुल्क नहीं होता। मुस्लिम देशों में निरंतर हो रहे धमाके इसकी ताजा मिसाल हैं। खुफिया एजेंसियां कहती हैं। देश का सौहार्द बिगाड़ने की खातिर इस्लामी आतंकियों की तरह हिंदू आतंकी भी दिवाली पर अपने संप्रदाय को निशाना बनाने वाले थे।

‘हमारा समाज’ में जमायत-ए-ओलमा-ए-हिंद के सदर अरशद मदनी कहते हैं- पिछले कुछ साल में देश के विभिन्न हिस्सों में होने वाले बम धमाकों की फिर से समीक्षा होनी चाहिए। ‘मुंसिफ’ का ख्याल है, खुफिया एजेंसियां अपनी कमियों को छुपाने की खातिर ऐसी घटनाएं मुस्लिम दहशतगर्दो के मत्थे थोप देती हैं। मडगांव ब्लास्ट मामले में गोवा के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर की पत्नी भी संदेह के घेरे में हैं। सूबे के गृहमंत्री के पास सनातन संस्था का विदेशियों से रिश्ता होने के पुख्ता सबूत हैं। घटना वाले दिन भी तीन फ्रांसीसी संस्था के आश्रम में मौजूद थे। लेकिन गोवा पुलिस को उनके रिकार्ड वहां से नहीं मिले।

गृहमंत्री आगे कहते हैं, आश्रम में आने वाले विदेशियों से फार्म सी भरवाकर संबंधित थाने में नहीं जमा करवाया जाता। ‘गोवा बम धमाके’, ‘दहशतगर्द और हिंदू ग्रुप’, ‘फिरकापरस्तों का चेहरा बेनकाब’, ‘गोवा बम धमाके की सीबाई इंक्वायरी’ वगैरह शीर्षक से छपी खबरें, आर्टिकल, संपादकीय में हिंदू आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों पर कानूनी शिकंजा कसने की सलाह दी गई है।

सनातन संस्था की दलील है कि वह वेद को आधुनिक विज्ञान के तौर पर पेश करने व हिंदुओं में मजहबी जागृति लाने जैसे पवित्र काम में लगी है। इसपर उर्दू मीडिया की टिप्पणी है कि पाक आतंकियों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के भी कुछ ऐसे ही ख्याल हैं। उसकी आधुनिक सोच की जिंदा मिसाल है मुंबई ब्लास्ट का आरोपी अजमल आमिर कसाब। ‘इंकलाब’ चार मिसालें पेश कर कहता है- पिछले दो सालों में नानदेड़, कानपुर वगैरह में बम निर्माण के दौरान मारे गए हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता किसी खतरनाक मुहिम को अंजाम देने की फिराक में थे।

मुंबई एटीएस मालेगांव धमाका मामले में अभिनव भारत का संबंध जम्मू-कश्मीर, यूपी, हरियाणा और इजराइल से होने का खुलासा कर चुका है। सनातन संस्था, हिंदू जागरण समिति की शाखा है। हिंदू आतंकियों को इजराइल की खुफिया एजेंसी मुसाद से मदद मिल रही है। ‘सियासत’ गोवा के डीआईजी आर. एस. यादव के हवाले से कहता है कि मडगांव बम धमाके में मारे गए मालगोंडी पाटिल के महाराष्ट्र के कई बम धमाकों के आरोपी विक्रम विनय भावे से संबंध थे।

लेखक ‘हिन्दुस्तान’ से जुड़े हैं

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