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अक्षर बहुत कुछ कहते हैं...आइये जानें कि किस अक्षर से शुरू होने वाले नाम के लोगों का स्वभाव कैसा होता है...

A - जिनके नाम की शुरुआत अंग्रेजी वर्णमाला के पहले अक्षर A से होती है। वे ख्यालों में रहने के बजाय काम करने मे यकीन रखते हैं। ऐसे लोगों की अपने साथी से पटरी बैठना काफी मुश्किल होता है। हालांकि इस शारीरिक सुंदरता अधिक आकर्षित करती है।

B - जिनके नाम की शुरुआत B से होती है, उन्हें उपहार काफी पंसद होते हैं। सिर्फ उपहार लेना ही नहीं, बल्कि देना भी इनका शौक होता है। ये लोग अपने साथी से काफी लाड-प्यार करते हैं और इन्हें सामने वाले से भी वैसे ही व्यवाहार की आशा होती है।

C - इस लेटर की शुरुआत के नाम वालों में अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण करने की गजब की शक्ति होती है। आपके लिए किसी रिश्ते का होना ही बहुत महत्वपूर्ण होता है। हालांकि इनकी ख्वाहिश होती है कि इनका साथी इन्हें ही अपना सर्वस्व माने। ऐसे लोग गुड लुकिंग होने के साथ ही समाज में अपनी अच्छी खासी जगह रखते हैं।

D - अंग्रेजी वर्णमाला के चौथे अक्षर D से जिनका नाम शुरू होता है, वो अपने इरादों के पक्के होते हैं। यदि एक बार ये ठान लें कि इन्हें किसी को पाना है तो उसके लिए जी जान से जुट जाते हैं। यदि काई मुसीबत में है तो आप उसके लिए परेशान हो जाते हैं।

E - E लेटर से जिनका नाम शुरू होता है, वो बोलते बहुत ज्यादा हैं। ऐसे लोगों को कम बोलने की आदत डालना चाहिए। वैसे तो ये लोग ज्यादातर फलर्ट ही करते हैं, लेकिन एक बार किसी के लिए सीरियस हो जाएं तो फिर उसके प्रति इमानदार रहते हैं।

F - इस अक्षर के नाम वाले लोग आर्दश होने के साथ ही रोमांटिक होते हैं। ये अपने लिए आर्दश साथी की तलाश करते हैं। फलर्ट इनकी आदत में होता है, लेकिन एक बार कमिटेड हो जाने पर ये ईमानदार साबित होते हैं। इन लोगों के बारे में कहां जाता है कि ये जन्मजात लवर होते हैं।

G - इस अक्षर के नाम वालों को हर बात में परफेक्शन की जैसे आदत ही पड़ जाती है। अपने साथ ही होने वाले जीवनसाथी में भी ये हर चीज परफेक्ट ही तलाशते हैं। इन्हें वही लोग पसंद आते हैं जो बुध्दिमता में इनके बराबर या फिर आगे हों। इन लोगों को दूसरों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ने भी काफी तकलीफ होती है।

H - इन लोगों को ऐसे साथी की तलाश होती है, जो इनकी जिंदगी की कमी को पूरा करने क साथ ही उसका सार इन्हें समझा सकें। यदि ये अपने पार्टनर को गिफ्ट देते हैं तो वह भी एक तरह का इनवेस्मेंट ही है। हर कदम यह बहुत ही सोच समझकर उठाते हैं। यदि लोग मुसीबत में होते हैं तो आपको सबसे पहले याद करते हैं।

I - इन लोगों को ज्यादा समय तक एक ही चीज या एक ही साथी का साथ पंसद नहीं होता। यही वजय है कि इन्हें प्यार के मामले में पूरी तरह ईमानदार नहीं माना जा सकता है। इन्हें आरामतलबी बहुत पसंद है।

G - इस लेटर के नाम वाले लोगों को भगवान ने भरपूर एनर्जी दी है। एनर्जेटिक होने के साथ ही ये बड़े रोमांटिक होते हैं। साथ ही भावनात्मक रूप से मजबूत होना इनका प्लस प्वाइंट भी है। ये लोग लांग डिसटेंस रिलेशनशिप को बहुत ही अच्छी तरह से निभा पाते हैं।

K - बहुत ही रहस्यमयी होते हैं इस लेटर के नाम वाले लोग। कुछ शर्मीले, अपने आप में ही खुश रहने वाले ही जमीन से जुड़े हुए। अपने लिए सही पार्टनर की तलाश में आपको इंतजार करना भी गवारा होता है। इनमें स्वार्थ नहीं होता है और ये बहुत अच्छे दोस्त भी साबित होते हैं।

L - वैसे तो लव का लेटर भी L ही है, लेकिन इनके लिए सही पार्टनर तलाश करना आसान नहीं होता है। इन्हें अपनी ही सोच और समझ मे थोड़ा भी अंतर आए तो रिश्ता निभाने में थोड़ी दिक्कत आ सकती है।

M - स्वभाव से बहुत शर्मीले और भोले होते हैं एम लेटर वाले। अपने साथी के प्रति इनका रवैया भी बड़ा ही क्रिटिकल होता है। ये अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पाते और यही इनकी सबसे बड़ी कमजोरी हैं। जीतना और हर हाल में जीतना इनकी आदत होती है।

N - N लेटर वाले बहुत ही भावुक होते हैं। जब किसी रिश्ते को बनाते हैं तो पूरी तरह उसमें डूब जाते हैं और उसे निभाने के लिए अपनी तरफ से हरसंभव कोशिश करते हैं। इन्हें लाड-दुलार बहुत अच्छा लगता है। कई बार तो अपने साथी को ये बच्चे की तरह दुलारते हैं।

O - बहुत ही फनी और इंटरेस्टेड होते हैं इस लेटर वाले लोग। हालांकि अपनी इच्छाओं को जाहिर करने में इन्हें भी थोड़ी सी शर्म आती है। इनके लिए प्यार किसी सीरियल बिजनेस से कम नहीं है, इसलिए ये हर कदम सोच समझकर ही उठाते हैं।

- इस लेटर के नाम वाले लोग बहुत ही कांशियस और समाजिक मूल्यों में बंधे हुए होते हैं। इस बात को लेकर ये बहुत ही सावधान रहते हैं कि कहीं कोई बात इनकी इमेज खराब न कर दे। अपने लिए इन्हें समझदार और बुध्दिमान साथी की जरूरत होती है।

Q - इन्हें प्यार का बार-बार इजहार बड़ा ही पसंद होता है। फूल हों या गिफ्ट इनको आसानी से खुश किया जा सकता है। ऐसी गतिविधियां इन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी करती हैं।

R - इनके लिए ऐसे साथी की जरूरत होती है जो अनकी भावनाओं को समझ सकें। इन्हें
शारीरिक सुंदरता के बजाय बुदिध्दता से प्रभावित किया जा सकता है।

S - इस अक्षर के लोग आदर्श रोमांटिक होते हैं। इनका अपनी भावनाओं पर काफी अच्छा नियंत्रण होता है। सही साथी की तलाश मे इन्हें लंबा इंतजार भी करना पडे तो इन्हें कोई दिक्कत नहीं होती। इसके साथ ही ये अच्छे दोस्त भी साबित होते हैं।

T - इस लेटर वाले लोग बेहद संवेदनशील होते हैं। अपनी भावनाओ को सबसे बताना भी इन्हें पसंद नहीं। हालाकिं बड़ी ही आसानी से ये किसी के भी प्यार में पड़ जाते हैं। फलर्टिंग में मास्टर होने के कारण इन्हें कई बार समस्याओं से भी दों चार होना पड़ता है।

U - प्यार इनके लिए एक खूबसूरत अहसास है, जो इन्हें खुश बनाए रखता है। प्यार में न होने पर भी ये सोच - सोचकर ही खुश हो लेते हैं। इन्हें एडवेंचर के साथ ही आजादी बड़ी प्यारी होती है।

V - इन्हें भी अपनी आजादी बड़ी प्यारी होती है। अपने साथी से थोड़ी-सी समझदारी और स्पेस इनकी ख्वाहिश होती है। किसी से भी जुड़ने के पहले आप खद को पूरी तरह तैयार कर लेते हैं और सामने वाले की आदतों को भी जान लेते हैं।

W - ऐसे लोगों को अपने आप पर कुछ ज्यादा ही गर्व होता है। रोमांटिक होने के बावजूद ये अपनी ही भावनाओं को अहतियत देते हैं। साथी की चाहत इनके लिए सेकेंडरी हो जाती है।

X - प्यार के मामले में कोई भी फैसला लेने से पहले बहुत सोच-विचार करते हैं। एक ही समय पर एक से अधिक रिश्ते निभाने में ये माहिर होते हैं।

Y - ये बहुत ही स्वतंत्र होते है। यदि इन्हें अपना रास्ता नहीं मिलता तो ये सभी कुछ भूल जाते हैं। रोमांटिक और ओपन माइंडेट होने के साथ ही रिश्ते निभाने के लिए हरसंभव कोशिश करते हैं।

Z -  इस लेटर के लोग किसी पर भरोसा नहीं कर पाते। इसलिए इन पर भी कोई भरोसा नहीं कर पाता। इसलिए रिश्तों के मामले में इन्हें अच्छा नहीं कहा जा सकता।

पेशकश : सरफ़राज़ ख़ान

अतुल मिश्र
" नेताजी ने अपने भाषण के दौरान जो कुछ भी कहा, वह पूरी तौर पर सही था! " चुनावी जनसभा से लौट रहे युवक ने कहा!
" क्या कहा था ? " साथ लौट रहे बुजुर्ग ने, जो भाषण सुनने कम और टाइम पास करने ज्यादा गया था, पूछ लिया!
" यही कि मज़बूत और निर्णायक सरकार सिर्फ वही दे सकते हैं और वर्तमान सरकार तो कुत्ते के गोबर कि तरह किसी काम की नहीं है! "युवक ने कुत्ते के गोबर पर अधिक बल दिया!
"वो तो ठीक है बेटा, लेकिन वो जो बुड्ढे से नेता ' हम सत्ता में आये तो आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे,' जैसी बातें कहते वक़्त कांप रहे थे, वो कौन थे ? " बुजुर्ग ने अपनी जानकारी में इजाफा करने के लिहाज़ से पूछा!
"वो ही तो हैं, जो अपनी सरकार आने पर प्रधानमन्त्री बनेंगे! " युवक ने अपना अब तक अर्जित पूरा ज्ञान बिखेरा!
"क्या उम्र होगी उनकी ? " बुजुर्ग ने जिज्ञासा ज़ाहिर की!
"अस्सी से ऊपर ही चल रहे हैं! " युवक की आवाज़ में गर्व था.
" हम यहाँ सत्तर कि उम्र में हिले पड़े हैं और यह जनाब अस्सी के बाद भी प्रधानमंत्री बनने के लिए अभी तक मौजूद हैं? " बुजुर्ग कि बात तो सही थी, मगर इस समय युवक को सिर्फ इसलिए अच्छी नहीं लग रही थी कि उसे इस साल ही इस पार्टी का सदस्य बनाया गया था और भविष्य में कोई ऊंचा पद दिए जाने की भी पूरी संभावना दिखाई गई थी.
" बादाम, पिश्ते और अन्य तमाम तरह की ताकत वाली चीजें खाते हैं वो! वर्ना आप की तरह चाय से डबल रोटियाँ निगल रहे होते तो आपकी उम्र से पहले ही खिसक लिए होते! " युवक ने बुजुर्ग की ओ़र हिकारत की नज़र से देखते हुए कहा!
" बेटा, यह बुद्धन मजबूत किस तरह से हैं, जो मज़बूत सरकार देने की बात कहते वक़्त भी कांप रहे थे? " बुजुर्ग ने फिर वही सवाल किया, जो इस वक़्त उस युवक को नाजायज लग रहा था!
" मज़बूत आदमी दिल से होता है, शरीर से नहीं! शरीर तो इस उम्र में सभी का हिलता है, मगर हौंसले देखे हैं कभी इनके? माइक तक कांप जाता है कि यार, किसी और को बुलाओ, वर्ना मैं फट जाऊंगा! " युवक की झल्लाहट अपने चरमोत्कर्ष पर थी!
बुजुर्ग के सारे सवाल फ़ेल हो चुके थे, लेकिन एक सवाल उसके ज़हन में भी कौंध रहा था कि जो नेता खुद ही मौत कि दहलीज़ पर खड़ा हो, वह देश को अपने साथ आखिर ले किस दिशा में जाएगा?



स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. शहरी विकास मंत्रालय के तहत एनसीआर योजना बोर्ड ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में अबाध रूप से चलाने के लिए एनसीआर में सभी अनुबंधित वाहनों के लिए रंग संहिता (कलर कोड) में संशोधन किया है। अब से टैक्सी ऑपरेटरों को टैक्सियों के आगे-पीछे के शीशों पर '' एनसीआर टैक्सी'' # '' एनसीआर रेडियो टैक्सी '' की पट्टी लगानी होगी जो आगे तथा पीछे से दिखाई दे सके। एनसीआर का लोगो टैक्सी पर पेंट कराना होगा या स्टीकर चिपकाना होगा। एनसीआर क्षेत्र में ''अनुबंधित वाहनों की अबाध आवाजाही के लिए एनसीआर के उत्तार प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा तथा दिल्ली सरकार के बीच पिछले साल अक्तूबर में हस्ताक्षरित परस्पर सामान्य परिवहन समझौते में सभी अनुबंधित वाहनों के लिए एक समान रंग संहिता का प्रस्ताव किया गया था। लेकिन टैक्सी ऑपरेटर्स टैक्सियों का रंग बदलने में दिक्कत महसूस कर रहे हैं।

हालांकि ऑपरेटर्स एनसीआर लोगो का उपयोग करने के लिए राज़ी थे। मौजूदा टैक्सियों तथा नई टैक्सियों को एनसीआर में पर्यावरण प्रदूषण से संबंधित यूरो नियमों का पालन करने तथा एनसीआर में पंजीकरण के बाद ही इन टैक्सियों को एनसीआर परमिट मिल सकेगा।

एनसीआर का लोगो तथा अंतिम अनुबंध वाहन समझौते के बारे में अधिक जानकारी के लिए एनसीआर योजना बोर्ड कार्यालय, प्रथम तल, कोर-5 बी, इंडिया हैबिटेट सेंटर, लोधी रोड, नई दिल्ली, 110003 से संपर्क कर सकते है।


स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली.
संघ लोक सेवा आयोग ने पिछले साल दिसंबर में आयोजित भू-विज्ञानियों की परीक्षा और इसी साल सितंबर में हुए साक्षात्कार का नतीजा घोषित कर दिया है.

उम्मीदवारों के जिन पदों पर नियुक्ति हेतु संस्तुति की गई है उनमें भूविज्ञानी (कनिष्ठ) क वर्ग श्रेणी-1, कनिष्ठ आद्रता-विज्ञानी (वैज्ञानिक बी) क वर्ग श्रेणी-2 और सहायक आद्रता-विज्ञानी ख वर्ग शामिल है.

सामान्य वर्ग से 84, अनुसूचित जाति से संबंधित 33, अनु, जनजाति से संबंधित 18 और 80 अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित उम्मीदवारों सहित सूची-1 में नियुक्ति हेतु संस्तुत किए गए उम्मीदवारों की कुल संख्या 215 (श्रेणी-2 के लिए भी योग्य उम्मीदवारों सहित) है । सात(7) पद शारीरिक विकलांगों, आंशिक रूप से बघिर उम्मीदवारों के लिए आरक्षित थे। आंशिक रूप से बघिर कोई विकलांग उम्मीदवार परीक्षा में शामिल नहीं हुआ।

एक उम्मीदवार का परिणाम परीक्षा हेतु उसकी शैक्षिक योग्यता के संबंध में खान मंत्रालय के स्पष्टीकरण नहीं आने से रोक लिया गया है।

सामान्य वर्ग से 15, अनुसूचित जाति से संबंधित 03, अनु. जनजाति से संबंधित 4 और 14 अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित उम्मीदवारों सहित सूची-2 में नियुक्ति हेतु संस्तुत किए गए उम्मीदवारों की कुल संख्या 36 (श्रेणी-1 के लिए भी योग्य उम्मीदवारों सहित) है.

उपलब्ध रिक्तियों की संख्या के अनुसार दोनों श्रेणियों में नियुक्तियां होंगी, जिनमें सामान्य श्रेणी-1 में 109, श्रेणी-2 में 6, अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी-1 में 55, श्रेणी-2 में 2, अनुसूचित जाति श्रेणी-1 में 29, श्रेणी-2 में 1 और अनुसूचित जनजाति श्रेणी-1 में 16, श्रेणी-2 में 1 नियुक्ति शामिल है.



स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) ने संयुक्त मैट्रिक स्तर (परीक्षा) 2008 के भाग के रूप में आयोजित ग्रेड सी आशुलिपिक परीक्षा के मुख्य लिखित भाग का परिणाम घोषित कर दिया है। 320 उम्मीदवारों को आशुलिपि में कौशल परीक्षा हतु बुलाने के योग्य पाया गया है। आशुलिपि में कौशल परीक्षा के आयोजन की समय सारणी जल्दी ही आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध होगी। मैनुअल टंकण मशीन पर कौशल परीक्षा (लिप्यांतर) के विकल्प सहित ग्रेड सी आशुलिपिकों के लिए उपर्युक्त भर्ती हेतु कौशल परीक्षा कम्प्यूटर पर ली जाएगी । इस संबंध में उम्मीदवार अपने विकल्प इस आयोग के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों को शीघ्र ही दे दें। इस संबंध में उम्मीदवार द्वारा दिया गया विकल्प अंतिम माना जाएगा। यह परिणाम आयोग की वेबसाइट http://ssc.nic.in पर उपलब्ध है।


स्टार न्यूज़ एजेंसी

नई दिल्ली. गृह मंत्रालय ने फैसला किया है कि आगामी एक नवंबर से जम्मू-कश्मीर में न तो प्री-पेड मोबाइल कनेक्शन जारी किए जाएंगे और न ही मौजूदा कनेक्शनों का नवीनीकरण किया जाएगा। गृह मंत्रालय ने दूरसंचार विभाग से इस फैसले को लागू करने के लिए उचित कार्यवाही करने को कहा है। सरकार ने यह कदम उन रिपोर्टों के बाद उठाया है जिनमें कहा गया है कि विक्रेता अथवा सेवा प्रदाता कनैक्शन जारी करने से पहले यथोचित सत्यापन नहीं कर रहे हैं। कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति को एक से अधिक नम्बर जारी कर दिए गए हैं। विक्रेताओं द्वारा नकली दस्तावेज़ों तथा पहचान पत्रों के भी इस्तेमाल की सूचनाएं मिली हैं, खासकर प्री-पेड कनैक्शनों के मामले में। इसके कारण गंभीर सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। इसीलिए यह फैसला लिया गया है। 


स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. वातावरण में डीजल की वजह से शरीर पर असर पड़ता है और इससे लोगों में हृदयाघात और स्ट्रोक की संभावना बढ़ जाती है। यह जानकारी हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल ने दी।
एक अध्ययन में यूरोप के वैज्ञानिकों ने दिखाया कि ऐसे लोगों में रक्त के थक्के कहीं ज्यादा बनते हैं जो भले ही स्वस्थ क्यों न हों अगर वे कुछ समय तक ही डीजल इंजन का सामना करते हैं तो उसकी वजह से नसें ब्लॉक हो जाती हैं और हृदयाघात या स्ट्रोक की संभावना बढ़ जाती है।

गैस इंजन की तुलना में डीजल इंजन से कहीं ज्यादा प्रदूषण होता है। हृदय और धमनी की बीमारी के शिकार लोगों को ट्रैफिक सम्बंधी प्रदूषण से बचना चाहिए। अध्ययन में 20 स्वस्थ पुरुषों को जो 21 से 44 उम्र के थे, शामिल किया गया। उन्होंने फिल्टर एयर और व्यस्त सड़क पर एक स्तर के कार्बन के वातावरण पर डाइल्यूटिड डीजल में भी सांस ली। फिल्टर एयर पर सांस लेने वालों की तुलना में जिन्होंने डीजल वाले क्षेत्र में सांस ली, उनमें इस दौरान थक्का बनने की संभावना 20 से 25 फीसदी बढ़ी। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि इससे रक्त में प्लेटलेट एक्टीवेशन भी बढ़ता है। थक्का बनने में प्लेटलेट की अहम भूमिका होती है।

न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन के समान समूह में दर्शाया है कि हृदयाघात के शिकार लोगों में स्पष्ट फर्क देखा जा सकता है जिसमें कि वे डीजल वाले वातावरण में सांस लेते हैं। उन्होंने पाया कि हृदयाघात के बाद बचने वाले लोगों की तादात हृदय व्यायाम करने के दौरान कहीं ज्यादा स्वच्छ ऑक्सीजन लेने वालों की होती है बनिस्बत दूषित वातावरण में सांस लेने वालों के।

इंटरनेट की चालीसवीं साल गिरह !
बच्चे इससे क्या सीखे हैं, चलो, इसी पर करें जिरह !!

मंत्रिमंडल का विस्तार किया !
सभी मंत्रियों का ऐसे ही, घर का बेडा पार किया !

कौमी एकता रैली निकाली !
हिदू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई, सबके संग फोटो खिंचवाली??

हद कर दी बिजली-संकट ने !
'पृथ्वी पर तो यही नरक है', बात बताई कल मरघट ने !!

प्रशासन की कार्यप्रणाली !
चीफ मिनिस्टर की सुनने को, सबने रुई कान में डाली !!

दहेज़ उत्पीडन एक्ट !
कितना झूठा है यह फैक्ट ??

साम्प्रदायिक विवाद !
इस पौधे में पहले से ही, नेता डाल रहे थे खाद !!

जुए का अड्डा !
उसकी लीपापोती कर दो, जहां नज़र आ जाए गड्ढा !!

वारदातें !
दिन अकसर घायल होते हैं, चिल्लाती हैं सारी रातें !!

कब्रिस्तान !
जो सब इसमें दफ़न पड़े हैं, उन्हें लिस्ट में वोटर मान !!

वसूली !
"रकम बांधकर थाने पहुंचो, वहीँ करेंगे बात उसूली !!"
-अतुल मिश्र



स्टार न्यूज़ ब्यूरो
नई दिल्ली. रक्षा मंत्री ए.के. एंटोनी ने आज समुद्र की ओर से आतकंवाद का सामना करने के लिए भारतीय तटरक्षक कार्मिकों को एक शक्तिशाली बल बनाने की घोषणा की। तटरक्षक बल के कमांडरों के 28वें सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने अनेक स्तरों पर लगभग 3000 अतिरिक्त कार्मिकों की मंजूरी दी है जिसे प्राथमिकता के आधार पर भरे जाने की आवश्यकता है। एंटोनी ने कहा कि मुम्बई आतंकवादी आक्रमण के बाद सुरक्षा की अब धारणा बदल गई है और भारतीय तटरक्षक बल का आयाम और कार्य की प्रकृति भी बदल गई है। उन्होंने कहा कि सरकार भारतीय तटरक्षक बल को 2वर्ष में विश्व के सर्वोत्तम तटरक्षकों में से एक बनाने के पूरे प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि तटरक्षक बल को तटीय निरीक्षण की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गयी है और इस जिम्मेदारी को कुशलता से निभाने के लिए सरकार ने श्रमशक्ति और अवसंरचना सहायता के विकास के साथ जलयानों, हवाई जहाज, उपकरणों की विस्तृत खरीद की मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि तटरक्षक बल 20 तीव्र पेट्रोल वाहनों (ओपीवी), 41 अवरोधक नावों, 12 तटीय निरीक्षण वायुयानों (डोर्नियर्स) और 7 तटीय पेट्रोल वाहनों (ओपीवीज) प्राप्त करने की प्रक्रिया में है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे देश में 9 तटीय स्टेशनों तक फैलाव वाले 46 तटीय राडारों की एक श्रृंखला स्थापित करने का कार्य प्रगति पर है। इसके अलावा 9 नये तटरक्षक स्टेशनों की मंजूरी दी गयी है। रक्षा मंत्री ने कहा कि इन्हें शीघ्र ही स्थापित किए जाने की आवश्यकता है।

देश में जलयानों के उत्पादन में हुई प्रगति पर एंटोनी ने कहा कि वर्तमान में देश के पोत कारखानों में 50 जलयानों का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने तटरक्षक बल के शीर्ष अधिकारियों से आने वाले दिनों में तटरक्षक बेड़े के लिए अवसंरचना सहायता विकास के अभिनव तरीके तलाशने पर भी ज़ोर दिया.


स्टार न्यूज़ ब्यूरो
अनंतनाग (कश्मीर).
प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कश्मीर घाटी में अनंतनाग-क़ाज़ीगुंड रेल लाईन की 18 किलोमीटर लंबी आखिरी भाग को आज एक समारोह में देश को समर्पित किया। अनंतनाग से मज़ोम (66 किलोमीटर) तथा मज़ोम से बारामुला (35 किलोमीटर) रेल लाईन का अक्तूबर, 2008 तथा फरवरी, 2009 में प्रधानमंत्री ने उद्धाटन किया था। 101 किलोमीटर लंबी अनंतनाग-बारामुला रेल लाईन लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है और प्रतिदिन इसमें लगभग पांच हज़ार लोग यात्रा करते हैं। अनंतनाग तथा क़ाज़ीगुण्ड के बीच अतिरिक्त रेल लाइन सेवा से घाटी के लोग लाभान्वित होंगे। घाटी में 119 किलोमीटर बारामुला से क़ाज़ीगुण्ड रेल लाईन के उद्धाटन के बाद यह लाईन सपूरा, हमरे, पट्टन, मज़ोम, बडगाम, श्रीनगर, पामपुर,,काकरापोर, अवंतिपुरा, पंजगाम, बिजबियारा, अनंतनाग तथा सादुरा रेलवे स्टेशनों से गुज़रेगी। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर अनंतनाग-क़ाज़ीगुण्ड रेल को झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस अवसर पर केंद्रीय रेलमंत्री कुमारी ममता बनर्जी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आज़ाद, नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री फारूख अब्दूल्ला, जम्मू-कश्मीर के राजयपाल एन.एन. वोहरा, मुख्यमंत्री उमर फारूख अब्दुल्ला, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एस.एस. खुराना सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।



सामग्री : 300 ग्राम पनीर, आधा कप दही, चम्मच क्रीम,3 चम्मच घी या तेल, 1 प्याज़ लम्बी कटी हुई, अदरक का आधा इंच का एक टुकड़ा, 2 हरी मिर्च, 4 टमाटर, 2 मोटी इलायची, आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, आधा छोटा चम्मच गरम मसाला, एक बड़ा नमक स्वादानुसार, आधा कप दूध, 2 छोटे चम्मच टॉमेटो सॉस.

बनाने की विधि : पनीर को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें. एक कड़ाही में आधा घी या तेल डालकर उसमें प्याज़, अदरक, हरी मिर्च और मोटी इलायची डाल दें. मसाले को थोड़ा तलने के बाद उसमें टमाटर डालकर 7-8 मिनट के लिए ढककर रख दें. दही डालकर 5 मिनट तक पकाएं. आधा कप पानी डालकर ठंडा होने दें. फिर इसे ग्राइंडर में डालकर बारीक पीस लें.

अब कड़ाही में बचा हुआ घी डालकर गरम करें. अब इसमें ग्राइंडर में पिसी हुई ग्रेवी डाल दें, ग्रेवी को गाढ़ा होने तक पकाएं. फिर दूध, अध चम्मच क्रीम और पनीर डालकर 3-4 मिनट तक पकाएं.

अब तैयार है ज़ायकेदार शाही पनीर. इसे हरे धनिये कसे हुए पनीर और बची हुई क्रीम से गार्निश करके सर्व करें.



असलम ख़ान
नई दिल्ली. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में किसानों को बागवानी फसलों को भीषण वर्षा और बाढ़ के कारण हुए नुकसान और उन्हें बीमारियों, कीटों आदि से बचाने के लिए सलाह जारी की है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने खेतों/बेसिन आदि से अतिरिक्त जल को बाहर निकाल दें और छोटे पौधों पर लकड़ी की खपच्चियों का सहारा लगाएं, जिससे वे मुड़ने न पाएं।

फलों के पौधों में फैलने वाली संभावित बीमारियों को देखते हुए उनमें डाइथेन एम45 (2 ग्रा. प्र.ली) का एक छिड़काव करने का सुझाव दिया जा रहा है। केले के पौधों में सिगाटोका लीफ स्पॉट नामक बीमारी की रोकथाम के लिए कैलिक्सिन (1 मि.ली. प्र.ली.) का छिड़काव कर दिया जाना चाहिए।

टमाटर के पौधों में लेट ब्लाइट और बक आई रॉट, प्याज के पौधों में फिटोपऊथोरा रॉट, बैंगन के पौधों में बेक्टीरियल विल्टफिटोपऊथोरा फ्रूट रॉट नामक बीमारियों की रोकथाम के लिए इक्वेशन-प्रो (1 मि.ली. प्र.ली.) या एक्रोबेट (2 ग्रा.प्र.ली.) का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। प्याज में परपल ब्लाच बीमारी की रोकथाम के लिए डाइथेन एम45 या कावाक (2 ग्रा.प्र.ली.) का छिड़काव किया जाना चाहिए।

मिर्ची के पौधों में एन्थ्रेकनोज़ नामक बीमारी की रोकथाम के लिए टोपसिन एम (1 ग्रा.प्र.ली.) का छिड़काव लाभकारी है। उस भूमि को जिसमें काली मिर्च और इलाइची के पौधे लगे हैं, उसमें कॉपर आक्सीक्लोराइड (0.2 प्रतिशत) का घोल मिलाकर पूरी तरह सुखा लिया जाना चाहिए जबकि अदरख और हल्दी की क्यारियों को मेन्कोज़ेब (0.3 प्रतिशत) या मेटलज़ाइल-मेन्कोज़ेब (0.05 प्रतिशत) के साथ सुखाया जाना चाहिए।



पेशकश : सरफ़राज ख़ान
टोटकों का चलन पुराना और अंधविश्वास से जुडा है। मगर हैरत की बात तो यह भी है कि अनेक विश्व विख्यात लेखक भी इन पर यकीन करते थे और लेखन के समय इनका नियमित रूप से पालन करते थे, जो बाद में उनकी आदत में शुमार भी हो गया। महान फ्रांसीसी लेखक एलेक्जेंडर डयूमा का विचार था कि सभी प्रकार की रचनाएं एक ही रंग के कागज पर नहीं लिखनी चाहिए। उनके मुताबिक उपन्यास आसमानी रंग के कागज़ पर और अन्य रचनाएं गुलाबी रंग के कागज़ पर लिखनी चाहिए।

मगर प्रख्यात हिन्दी लेखक रांगेय राघव को फुलस्केप आकार का कागज भी बेहद छोटा लगता था। ब्राह्म ग्रीन बलकभ साफ लकीरदार वाले कागज पर लिखते थे। अगर उस पर जरा-सा भी कोई धब्बा लग जाता था तो वे उसे फौरन फाड देते थे और फिर नए साफ़ कागज़ पर लिखना शुरू करते थे। उनका यह भी मानना था कि जब वे ख़ुद को उदास महसूस करते थे और डेस्क पर बैठते तो शब्द झरने की तरह फूट पड़ते थे। उदासी भरा दिन उनके लेखन के लिए बेहद कारगर साबित होता था।

इसी तरह चार्ल्स आउडिलायर (1821-1867) नामक फ्रेंच कवि को हरा रंग लिखने की प्रेरणा देता था। इसलिए उन्होंने अपने बाल ही हरे रंग में रंग डाले थे। प्रख्यात समीक्षक डॉ। सैम्युअल जॉन्सन अपनी पालतू बिल्ली लिली को मेज पर बिठाकर ही लिख पाते थे। गार्डन सेल्फिज शनिवार को दोपहर में और शेष दिनों में रात के समय लिखते थे। शनिवार को दोपहर में वह खुद को विशेष उत्साहित महसूस करते थे।

विख्यात अंग्रेजी उपन्यासकार और समीक्षक मैक्स पैंबर सिर्फ सुबह दस बजे तक ही लिखते थे। इसलिए एक उपन्यास को पूरा करने में उन्हें बहुत ज्यादा समय लगता था। इटली के लेखक जियो ऑक्चिनी रौसिनी (1791-1868) लिखने का मूड बनाने के लिए हमेशा नकली बालों की तीन विग पहना करते थे। प्रसिध्द जर्मन कवि फेडरिक वान शिल्लर (1759-1805) की आदत भी कम अजीब नहीं थी। वे अपने पैरों को बर्फ के पानी में डुबोकर ही कविताएं लिख सकते थे। अगर वे ऐसा नहीं करते थे तो उन्हें कविता का एक भी शब्द नहीं सूझता था।

फ्रांसीसी भाषा के सुप्रसिध्द साहित्यकार तथा रमणी रसिक चिरकुमार मोंपासा मूड फ्रैश होने पर ही लिखते थे। अपने को तरोताजा करने के लिए वे नाव चलाते, मछलियां पकड़ते या फिर मित्रों के साथ हंसी-ठिठौली करते थे। राइज एंड फास्स ऑफ रोमन एंपायर के लेखक नाटककार गिब्सन को लिखने के लिए पहले एकाएक संजीदा होना पडता था। महान फ्रांसीसी लेखक बाल्लाजाक की आदत भी विचित्र थी। वह दिन में फैशन के कपड़े पहनते और रात को लिखते समय पादरियों जैसा लिबास पहनते थे।

सुप्रसिध्द लेखक बरटेड रसेल का अपनी लेखन प्रक्रिया के बारे में कहना था कि उनका लेखन मौसम पर ही आधारित होता है। खुशगवार मौसम में वे रात-दिन लिखते थे और गर्मी वाले उमस भरे दिन में वे लिखने से कतराते थे। एईडब्ल्यू मेसन भी मूडी स्वभाव के थे। जब उनका मन करता तभी लिखने बैठते। वे रात या दिन मूड होने पर कभी भी लिख सकते थे।

गोल्जस्मिथ को लिखने से पहले सैर करने का भी शौक था। अपने उपन्यास, कविताएं और नाटक रचने के दौरान उन्होंने दूर-दराज के इलाकों की यात्रा की। गिलबर्टफे्रंको सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक लिखा करते थे। दोपहर के भोजन के बाद एक घंटे लिखते थे और फिर वह शाम को भी दो घंटे तक लिखते थे। रात को लिखना उन्हें जरा भी पसंद नहीं था। सर ऑर्थर पिनेरी को केवल रात में ही लिखना पसंद था। दिन में अगर वे लिखने बैठते तो उन्हें कुछ सूझता ही नहीं था। इसी तरह की आदत लुई पार्कर को भी थी। वे दिनभर सोते और रात को जागकर लिखते थे। अमेरिकी लेखक मार्क ट्वेन को औंधे मुंह लेटकर लिखने की अजीब आदत थी।

अर्नेस्ट हेमिंगवे फ्रांस के क्रांतिकारी लेखक विक्टर ह्यूमो और पंजाबी के उपन्यासकार नानक सिंह को खडे होकर लिखने की आदत थी। विस्मयली लैक्स सुबह चार बजे से दिन के 11 बजे तक और शाम को साढे सात बजे तक तथा रात को फिर 11 बजे तक लिखते थे। उनका बाकी का समय सोने और चाय पीने में बीतता था। प्रख्यात रूसी लेखक फीडिन ने जब उपन्यास असाधारण ग्रीष्म ऋतु लिखा तब वह समुद्र किनारे रह रहे थे। उनका मानना था कि समुद्र की लहरों की गूंज की आवाज उन्हें निरंतर लिखने के लिए प्रेरित करती थी।


हैरसवासिल सुबह नौ बजे से दोपहर 12 बजे तक और शाम को पांच बजे से सात बजे तक लिखते थे। डेलिस ब्रेडकी केवल तीन घंटे ही लिखते थे और वह भी सुबह 11 बजे से दोपहर दो बजे तक। सर ऑर्थर कान डायल केवल सुकून महसूस करने पर ही लिखते थे। अगर किसी बात से उनका मन जरा भी विचलित होता तो वे एक पंक्ति भी नहीं लिख पाते थे। जर्मनी के कार्लबेन को लिखने की प्रेरणा संगीत से मिलती थी। उन्होंने अपनी पसंद के गाने रिकॉर्ड कर रखे थे। पहले वे टेप चलाते और फिर लिखने बैठते।



स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. पाकिस्तान के मौजूदा हालात को देखते हुए भारत के गृह मंत्रालय ने भारतीयों को सलाह दी है कि फ़िलहाल वे पाकिस्तान की यात्रा न करें. पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तान में लगातार आतंकी हमले हो रहे हैं.

गृह मंत्रालय की द्बारा दी गई सलाह में कहा गया है कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित गुरुद्वारों में हर साल भारत से हज़ारों सिख तीर्थयात्री जाते हैं. पिछले कुछ दिनों में यहां कई आतंकी हमले हुए हैं. ऐसे हालात में वहां जाना खतरनाक साबित हो सकता है. गौरतलब है कि इस माह रावलपिंडी में सेना मुख्यालय और कमरे में एक परमाणु ठिकाने सहित महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर हमले हुए हैं, जिनमें 190 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.



सामग्री : 500 ग्राम पनीर, 1 कटोरी बेसन, 1 बारीक कटा प्याज, 2-3 हरी मिर्च बारीक कटी, पाव चम्मच लाल मिर्च पावडर, पाव चम्मच अजवायन, थोड़ा-सा हरा धनिया, स्वादानुसार नमक, तलने के लिए तेल.

बनाने की विधि : हरा धनिया, हरी मिर्च बारीक काट लें. दूध को फाड़कर छान लें. इस फटे दूध मे नमक, कटा प्याज हरा धनिया व हरी मिर्च, लाल मिर्च पाउडर, अजवायन, नमक और मिलाकर मलमल के कपड़े में लपेटकर किसी भारी चीज से दबा दें. 2 घंटे बाद इसकी एक-डेढ़ इंच लम्बी व आधा इंच चौड़े टुकड़े काट लें. मनचाहा आकार भी दे सकते हैं. बेसन का गाढ़ा घोल बना लें. फिर कड़ाही में 2 बड़े चम्मच तेल गर्म करें. गर्म तेल में मसाला मिले पनीर के टुकड़ों को बेसन के घोल में लपेटकर हल्का सुनहरी होने तक तलें.

अब तैयार है पनीर के ज़ायकेदार कटलेट. इन्हें हरे धनिये ही पत्तियों और टमाटर के टुकड़ों से गार्निश कर मनपसंद चटनी के साथ सर्व करें.   


स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली.
दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) में अब मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का नियंत्रण रहेगा. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एमसीडी के कुछ अधिकार दिल्ली सरकार को सौंप दिए हैं. बाक़ी अधिकार व प्रावधान अब भी केंद्र के प्रतिनिधि उप-राज्यपाल के पास ही होंगे.

गौरतलब है कि एमसीडी एक्ट 1957 के तहत तमाम अधिकार अभी तक केंद्र सरकार के पास थे. गृह मंत्रालय ने एमसीडी से संबंधित अधिकार उपराज्यपाल सौंप रखे थे. मुख्यमंत्री शीला दीक्षित पिछले काफ़ी अरसे से एमसीडी के कुछ अधिकारों को सरकार के अधीन सौंपने की मांग कर रही थीं. उनका कहना था कि बहुप्रशासनिक व्यवस्था के चलते जनहित से जुड़े कई कामों में रुकावट आती है.

मंत्रालय के एक प्रवक्ता के मुताबिक़ दिल्ली म्युनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट, 1957 के कुछ प्रावधान व अधिकार दिल्ली सरकार के अधीन कर दिए हैं. केंद्र अब एमसीडी से शक्ति स्थानांतरण के बाद कामकाज पर नज़र रखेगा. इसके साथ ही कुछ शक्तियों के इस्तेमाल से पहले सरकार को केंद्र से मंज़ूरी लेनी होगी. केंद्र ने एमसीडी एक्ट की धारा 52 की उप धारा-2, धारा 54, 55, 57, 330ए, 489, 512, धारा 56 की उप धारा-2, धारा 372 की उपधारा-2, धारा 427 की उपधारा 2, धारा 480 की उपधारा 2, धारा 202 का क्लाज-2 के प्रावधान व इनमें निहित शक्तियों को दिल्ली सरकार के अधीन कर दिया है.

केंद्र ने शक्तियों के स्थानांतरण से पहले दिल्ली सरकार, उप-राज्यपाल और एमसीडी से विचार-विमर्श किया था. इससे पहले बालाकृष्णन कमेटी, वीरेंद्र प्रकाश कमेटी, अशोक प्रधान कमेटी और उमेश सहगल कमेटी ने एमसीडी के संबंधी केंद्र के अधिकारों को प्रदेश सरकार के अधीन करने की सिफ़ारिश की थी. हाल ही में वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता वाली द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने भी यह सिफारिश की थी.

क़ाबिले-गौर है कि भारतीय जनता पार्टी के नेता एमसीडी को सीधे राज्य सरकार के अधीन किए जाने का विरोध करते रहे हैं. इस समय एमसीडी में भाजपा का कब्जा है और राज्य सरकार कांग्रेस की है. एमसीडी को शीला सरकार के अधीन किए जाने से जहां कांग्रेस पार्षद खुश हैं, वहीं भाजपा पार्षदों में मायूसी का माहौल है.


फ़िरदौस ख़ान
जब घर का चश्मो-चिराग कहीं खो जाता है, तो उसकी याद में किस तरह दिल तड़पता है और आंखें गंगा-जमुना की धारा बन जाती हैं, इसके तसव्वुर से ही रूह कांप उठती है। अगर जाने वाले को इसका अहसास हो तो कभी वह ख्वाब में भी अपने घर-परिवार को छोड़कर जाने की बात नहीं सोचेगा। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरपुर जिले के कस्बे बुढाना के 10 साल के मोहम्मद हसन की गुमशुदगी को चार साल होने वाले हैं। उसकी मां आयशा का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने अपने लाल को हर जगह तलाशा, मगर वो कहीं न मिला। सुबह सूरज की पहली किरण से ही पूरा घर अपने लाडले के इंतज़ार में पलकें बिछा लेता है, उम्मीद की एक लौ कायम रहती है कि कभी कोई तो आएगा, उनके बेटे की खबर लेकर, लेकिन जब रात ढलती है और हसन की कोई ख़बर नहीं आती तो दिल बुझने लगता है।

मोहम्मद हसन के पिता मोहम्मद फुरकान का कहना है कि उन्हें क्या पता था कि उनका बेटा उनसे बिछड़ जाएगा। वे तो बस इतना चाहते थे कि मदरसे से आने के बाद हसन यहां-वहां खेलकर वक्त बर्बाद करने के बजाय उनके काम में हाथ बंटाए, ताकि उसे काम करने की आदत पड़ जाए। वे कहते हैं कि हम तो खेती करने वाले लोग हैं। सुबह पौ फटने से लेकर देर रात तक खेतों में खून-पसीना बहाना पड़ता है तब कहीं जाकर घर-परिवार के गुजारे लायक आमदनी जुटा पाते हैं। हम बचपन से ही बच्चों को काम की आदत डालते हैं, ताकि बड़े होकर वे मेहनत-मजदूरी कर सकें। बस, खेत में काम करने की बात को लेकर ही बेटे पर उनका हाथ उठ गया और वह कहीं चला गया। अपनी इस गलती के लिए वे आज तक पछता रहे हैं। काश, उन्होंने अपने बेटे को मारने के बजाय प्यार से समझाया होता तो आज वह हमारे साथ ही होता। उन्होंने अपने बेटे को आसपास ही नहीं दूर-दराज तक के इलाकों में ढूंढा, मगर वह कहीं नहीं मिला। उन्होंने अपने सब रिश्तेदारों के यहां जाकर भी बेटे को तलाश किया।

बच्चे का मामू जान कारी मोहम्मद आरिफ साहब का कहना है कि मोहम्मद हसन अपने पिता मोहम्मद फुरकान से बहुत डरता था। उसके पिता उससे खेत में काम करने को कहते थे। इसी बात को लेकर कई बार वे अपने बेटे को पीट भी चुके हैं। इससे पहले दो बार वह अपने पिता की मार खाने के बाद अपने मामा के पास बंतीखेड़ा आ गया। बाद में वो उसे समझा-बुझाकर उसके घर छोड़कर आए। वे बताते हैं कि हसन पढ़ने में बहुत होशियार है। उसे पास के ही मदीना-उल-तुलूम मदरसे में कुरआन हिफ्ज यानि मुंह जबानी याद करने के लिए दाखिल कराया गया था। छोटी-सी उम्र में ही उसने तीन पारे अध्याय हिफ्ज कर लिए थे। उसे क्रिकेट खेलने का बहुत शौक है। नम आंखों से वे कहते हैं कि हसन जहां कहीं भी होगा, क्रिकेट जरूर खेलता होगा।

कारी साहब कहते हैं कि आज भी देहात के मुसलमानों में फोटो खिंचवाने का चलन नहीं है। जब कभी दस्तावेजों के लिए जरूरत पड़ती है, तभी लोग फोटो खिंचवाते हैं। एक दिन उन्होंने यूं ही मदरसे में बच्चों के साथ अपने भांजे हसन की फोटो खिंचवा ली थी, वरना आज उसकी तलाश के लिए एक तस्वीर तक उनके पास नहीं होती।

हसन का बड़ा भाई मोहम्मद मुबारक 15 साल का है। पोलियो की वजह से एक पैर से लाचार होने के बावजूद वे भी अपने भाई की तलाश में जगह-जगह भटकता रहता है। उसका कहना है कि बस उसे एक बार उसका भाई मिल जाए, वे उसे कहीं नहीं जाने देगा। हसन का छोटा भाई अब्दुल कादिर, बहनें आरिफा और मंतशा भी अपने भाई को देखने के लिए तरस रही हैं। वे दिन-रात यही दुआ करती हैं कि बस एक बार उनका भाई घर वापस आ जाए।

ध्यानार्थ : अगर किसी को इस गुमशुदा बच्चे के बारे में कोई सूचना हो तो वो हमें इत्तला करे. यह कॉलम हमने जनहित में शुरू किया है. पाठकों का सहयोग अपेक्षित है.


हमें ईमेल भेजिए- editor.starnewsagency@gmail.com


स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद देश में निमोनिया का क़हर जारी है. देश में हर साल निमोनिया से चार लाख बच्चों की मौत हो जाती है. अगर निमोनिया की अहम वजह फेफड़े के संक्रमण को रोककर बच्चों को निमोनिया का शिकार होने से बचाया जा सकता है. यह जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ) ने दी है.

निमोनिया की रोकथाम के लिए पहली बार आगामी दो नवंबर को अंतरराष्ट्रीय निमोनिया दिवस के रूप में मनाने का फ़ैसला किया गया है. गौरतलब है कि दुनिया में हर साल निमोनिया से 20 लाख बच्चे मौत के मुंह में समा जाते हैं.
डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट मुताबिक़ भारत में हर मिनट में पांच साल से कम आयु के 82 बच्चे निमोनिया की चपेट में आते हैं, जबकि हर घंटे 45 बच्चों की मौत हो जाती है. विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को फेफड़ों के संक्रमण से बचाकर और संक्रमण होने पर उनकी सही देखभाल कर इसके क़हर से बचाया जा सकता है.

तीनों सी. एम. फिर संभालेंगे सत्ता !
हाल सभी के जान चुका है, बूटा-बूटा, पत्ता-पत्ता !!

नाले में सड़ती लाश !
पुलिस पूछती कुछ मुर्दे से, इतना मिला नहीं अवकाश !!

हरियाणा फिर हुड्डा के हाथ में !
अब केवल राहू-केतु हैं, बीजेपी के साथ में !!

कूमल लगा कर लाखों का माल उड़ाया !
थाने में सब पूछ रहे थे,"हिस्सा अभी तलक नहीं आया ??"

लूट,हत्या,चोरी का जोर !
अन्य तरह की घटनाओं से, पुलिस हो चुकी थी जो बो़र !!

कब मिलेगी बिजली-पानी की समस्या से निजात ?
जब अगले चुनाव आयेंगे, होगी यह मुद्दे की बात !!

अगले माह करेंगे सम्मेलन !
"किसी डांसर कौ बुल्वईओ, जैसे डांस करै थी हेलन !!

" पाक-पर्यटकों की संख्या बढ़ी !
जब से तालिबान के हमलों वाली सबने न्यूज़ पढ़ी !!

ज़हर खुरानों ने लूटा !
भाग्य पुलिस का था, जो छींका, थाने के आगे ही फूटा !!

पुंछ का महत्व !
नेताओं की चाटुकारिता में हिलता दिखता यह तत्व !!
-अतुल मिश्र



स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. दिल्ली परविहन निगम (डीटीसी) ने किराए में बढ़ोतरी की है. अब न्यूनतम किराया तीन रुपए के बजाए पांच रुपए हो गया है. इसी तरह सात रुपए की जगह 10 रुपए और दस रुपए की जगह 15 रुपए अदा करने होंगे.

इसी तरह छात्रों के पास मौजूदा 12.50 रुपए के बजाए सौ रुपए में बनेंगे. एक दिन का यात्री पास अब 40 रुपए का हो गया है, जो पहले महज़ 25 रुपए का था. इसके अलावा मासिक पास में भी भारी बढ़ोतरी हो गई है. पहले मासिक पास 450 रुपए का था, अब इसके लिए 800 रुपए चुकाने होंगे. इस बढोतरी के बीच राज्य सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों और प्रेस के लिए बनने वाले पास के दाम नहीं बढ़ाए हैं.

इतना ही नहीं सरकार ने किराया बढ़ाने के साथ-साथ किलोमीटर स्लैब में भी बदलाव किया है. अब यात्री को डीटीसी में शून्य से तीन किलोमीटर के सफ़र के लिए पांच रुपए किराया देना होगा. इसी तरह तीन से दस किलोमीटर पर किराया दस रुपए और दस किलोमीटर से ज़्यादा दूरी के लिए 15 रुपए का भुगतान करना होगा. इससे पहले चार किलोमीटर तक की यात्रा पर तीन रुपए, आठ किलोमीटर की दूरी के लिए पांच रुपए और 12 किलोमीटर के सफर के लिए किराया सात रुपए था. 12 किलोमीटर से ज़्यादा के सफ़र के लिए दस रुपए का टिकट था.

यह फ़ैसला राज्य कैबिनेट की बैठक में लिया गया. बैठक के बाद मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा कि सरकार के इस फ़ैसले से डीटीसी को आमदनी में सालाना 400 करोड रुपए की बढ़ोतरी होगी. गौरतलब है कि साल 2008-09 में डीटीसी को करीब पौने छह सौ करोड़ रुपए का घाटा हुआ था.

परिवहन मंत्री अरविन्दर सिंह लवली ने बताया कि डीटीसी के बेडे़ में अब नई लो फ्लोर बसें ही शामिल की जाएंगी, क्योंकि कंपनियां पुरानी कीमत पर लो फ्लोर बसों की आपूर्ति करने के लिए सहमत हो गई हैं. उन्होंने बताया कि लो फ्लोर बसों के साथ-साथ पुरानी बसों को बेहतरीन बनाया जा रहा है.


मलिक असगर हाशमी
मुस्लिम देशों में आजकल होने वाले बम धमाकों को आतंकवाद की घर वापसी करार दिया जा रहा है। दहशतगर्दी को सहयोग, समर्थन और शरण देने वाले खुद ही इसमें झुलस गए हैं। हमारे देश में भी कुछ लोगों ने इस रास्ते को अपना लिया है।

गोवा के मडगांव में दिवाली से एक रोज पहले हुए स्कूटर बम धमाके को इसी नजरिए से देखा जा रहा है। अब तक की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इस साजिश के रचनाकार के तार देश-विदेश से जुड़ा होना बताया जा रहा है। धमाके में शामिल हिंदूवादी संगठन सनातन संस्था के कार्यकर्ताओं के संबंध मालेगांव बम धमाके के आरोपियों तथा हिंदू आतंकी संगठन अभिनव भारत से होने के सबूत मिले हैं। इसे लेकर उर्दू मीडिया बेहद चिंतित है।

हिंदू आतंकवाद को बढ़ावा देने की कुछ लोगों की कोशिश पूरे मुल्क को भुगतनी पड़ सकती है। इसे नजरअंदाज करने की बजाए वक्त रहते दबाना बेहतर है। ‘उर्दू टाइम्स’ कहता है, ‘फिरकापरस्ती जब आतंकवाद का रूप ले ले तो समझ जाइए उस संप्रदाय और मुल्क का बेड़ा गर्क होने वाला है।’ साप्ताहिक ‘आपकी ताकत’ पूछता है ‘मुहब्बत की बजाए नफरत की वजह क्यों बन रहे हैं मजहब।’

आतंकवाद के मसले पर महजबी भेदभाव अच्छा नहीं। एक तरफ तो आधी-अधूरी जानकारी के चलते कश्मीर के दो क्रिकेटरों परवेज रसूल और मेराजुद्दीन से विस्फोटक रखने को लेकर घंटों पूछताछ होती है। दूसरी ओर हिंदू आतंकवाद के प्रति लापरवाही बरती जा रही है। गैर उर्दू मीडिया के फोकस में भी सिर्फ इस्लामी आतंकवाद ही है। हाल में आजमगढ़ की एक तंजीम ने आतंकवाद के आरोप में देश के विभिन्न जेलों में बेकसूर मुस्लिम नौजवानों को बंदी बनाकर रखने का मसला उठाया था। इसे किसी ने गंभीरता से नहीं लिया।

26/11 के आतंकी हमले के बाद से मालेगांव ब्लास्ट की फाइल लगभग बंद है। चूक के चलते इसके मुख्य आरोपियों प्रज्ञा ठाकुर, कर्नल पुरोहित पर से मकोका हट चुका है। ‘मुंसिफ’, ‘दहशतगर्दी-दोहरा सलूक’ में कहता है- मरहूम एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे ने हिंदू आतंकवाद का खुलासा नहीं किया होता तो न जाने यह कब तक पर्दे में रहता। आतंकियों का कोई मजहब, मुल्क नहीं होता। मुस्लिम देशों में निरंतर हो रहे धमाके इसकी ताजा मिसाल हैं। खुफिया एजेंसियां कहती हैं। देश का सौहार्द बिगाड़ने की खातिर इस्लामी आतंकियों की तरह हिंदू आतंकी भी दिवाली पर अपने संप्रदाय को निशाना बनाने वाले थे।

‘हमारा समाज’ में जमायत-ए-ओलमा-ए-हिंद के सदर अरशद मदनी कहते हैं- पिछले कुछ साल में देश के विभिन्न हिस्सों में होने वाले बम धमाकों की फिर से समीक्षा होनी चाहिए। ‘मुंसिफ’ का ख्याल है, खुफिया एजेंसियां अपनी कमियों को छुपाने की खातिर ऐसी घटनाएं मुस्लिम दहशतगर्दो के मत्थे थोप देती हैं। मडगांव ब्लास्ट मामले में गोवा के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर की पत्नी भी संदेह के घेरे में हैं। सूबे के गृहमंत्री के पास सनातन संस्था का विदेशियों से रिश्ता होने के पुख्ता सबूत हैं। घटना वाले दिन भी तीन फ्रांसीसी संस्था के आश्रम में मौजूद थे। लेकिन गोवा पुलिस को उनके रिकार्ड वहां से नहीं मिले।

गृहमंत्री आगे कहते हैं, आश्रम में आने वाले विदेशियों से फार्म सी भरवाकर संबंधित थाने में नहीं जमा करवाया जाता। ‘गोवा बम धमाके’, ‘दहशतगर्द और हिंदू ग्रुप’, ‘फिरकापरस्तों का चेहरा बेनकाब’, ‘गोवा बम धमाके की सीबाई इंक्वायरी’ वगैरह शीर्षक से छपी खबरें, आर्टिकल, संपादकीय में हिंदू आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों पर कानूनी शिकंजा कसने की सलाह दी गई है।

सनातन संस्था की दलील है कि वह वेद को आधुनिक विज्ञान के तौर पर पेश करने व हिंदुओं में मजहबी जागृति लाने जैसे पवित्र काम में लगी है। इसपर उर्दू मीडिया की टिप्पणी है कि पाक आतंकियों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के भी कुछ ऐसे ही ख्याल हैं। उसकी आधुनिक सोच की जिंदा मिसाल है मुंबई ब्लास्ट का आरोपी अजमल आमिर कसाब। ‘इंकलाब’ चार मिसालें पेश कर कहता है- पिछले दो सालों में नानदेड़, कानपुर वगैरह में बम निर्माण के दौरान मारे गए हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता किसी खतरनाक मुहिम को अंजाम देने की फिराक में थे।

मुंबई एटीएस मालेगांव धमाका मामले में अभिनव भारत का संबंध जम्मू-कश्मीर, यूपी, हरियाणा और इजराइल से होने का खुलासा कर चुका है। सनातन संस्था, हिंदू जागरण समिति की शाखा है। हिंदू आतंकियों को इजराइल की खुफिया एजेंसी मुसाद से मदद मिल रही है। ‘सियासत’ गोवा के डीआईजी आर. एस. यादव के हवाले से कहता है कि मडगांव बम धमाके में मारे गए मालगोंडी पाटिल के महाराष्ट्र के कई बम धमाकों के आरोपी विक्रम विनय भावे से संबंध थे।

लेखक ‘हिन्दुस्तान’ से जुड़े हैं

स्टार न्यूज़ एजेंसी
पेरिस (फ्रांस). देश में एक बार फिर बुर्क़े को लेकर बहस का दौर शुरू हो गया है. आव्रजन मंत्री एरिक बेसन ने कहा है कि वे फ्रांस की सड़कों पर बुर्का नहीं देखना चाहते. साथ ही उन्होंने फ्रांसीसी राष्ट्रीय पहचान का ज़िक्र करते हुए बुर्क़े पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस कराने की पेशकश की है कि इसमें बुर्के को शामिल नहीं किया जाना चाहिए.
एक टीवी को दिए साक्षात्कार में एरिक बेसन ने कहा बुर्का फ्रांस के राष्ट्रीय मूल्यों के विपरीत है. उन्होंने कहा कि इस तरह के बुर्के महिलाओं के अधिकारों और समानता के प्रति फ्रांस की प्रतिबद्धता के खिलाफ़ हैं. उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को भी दूसरी महिलाओं की तरह जीने का हक़ है.
क़ाबिले-गौर है कि साल 2004 में फ़्रांस ने सरकारी स्कूलों और दफ़्तरों में हिजाब और अन्य धार्मिक चिन्हों के पहनने पर पाबंदी लगा दी थी. इस पर काफ़ी बवाल भी मचा था. फ्रांस के राष्ट्रपति निकोला सारकोज़ी ने कहा था कि फ्रांस में बुर्क़ा पहनना स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि बुर्क़ा पहनने वाली महिलाएं क़ैदी के समान हैं, जो आम सामाजिक जीवन जीने से महरूम रहती हैं और अपनी पहचान की मोहताज होती हैं. इसके कुछ वक़्त बाद ही फ़्रांस की महिला मुस्लिम मंत्री फ़देला अमारा ने फ्रांस में बुर्क़े पर पाबंदी का समर्थन करते हुए कहा था कि बुर्क़ा महिलाओं को क़ैदी की तरह बना देता है और फ़्रांस के मौलिक सिद्धांतों में से एक महिला-पुरुष के बीच समानता की अवहेलना करता है. बुर्क़ा एक पहनावा ही नहीं बल्कि एक धर्म के राजनीतिक दुरुपयोग का प्रतीक है. उनका कहना था कि बुर्क़े पर पाबंदी से महिलाओं का मनोबल बढ़ेगा.

फ्रांस में मुस्लिम आबादी अन्य सभी यूरोपीय देशों के मुक़ाबले ज़्यादा है और कुछ अरसा पहले बुर्क़े पर प्रतिबंध के मुद्दे पर यहां की संसद ने एक 32 सदस्यीय आयोग का गठन किया है.
गौरतलब यह भी है कि इसी माह मिस्र की राजधानी काहिरा स्थित अल अज़हर विश्वविद्यालय के इमाम शेख़ मोहम्मद सैयद तांतवई ने कक्षा में छात्राओं और शिक्षिकाओं के बुर्क़ा पहनने पर रोक लगाकर एक नया विवाद पैदा कर दिया था. इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ कई इस्लामी सांसदों ने शेख़ तांतवई के इस्तीफ़े की मांग करते हुए इसे इस्लाम पर हमला क़रार दिया था. इमाम शेख़ मोहम्मद सैयद तांतवई ने क़ुरान का हवाला देते हुए कहा है कि नक़ाब इस्लाम में लाज़िमी (अनिवार्य) नहीं है, बल्कि यह एक रिवाज है.

पुस्तक समीक्षा
हिंदी साहित्य में व्यंग्य एक विशिष्ट विधा होते हुए भी इसकी पहचान आधुनिक काल में ही बनी। इससे पहले व्यंग्य को कभी महत्व नहीं दिया गया। इसे अलग धारा मानने से साहित्यिक समाज संकोच करता रहा। यों कहें कि वह व्यंग्य लेखकों से खुद को श्रेष्ठ मानता रहा तो गलत नहीं होगा। इस भावना को संभवत: पहले-पहल हरिशंकर परसाई ने चुनौती दी। व्यंग्य विधा के इस शिखर पुरुष ने साहित्य जगत को बता दिया कि जो प्रतिष्ठा काव्य, नाटक-एकांकी, उपन्यास और समालोचना को हासिल है, वह व्यंग्य को भी मिलनी चाहिए। इसके बाद व्यंग्य लेखन की जो परम्परा समृध्द हुई, उसका बहुत हद तक श्रेय शरद जोशी और श्रीलाल शुक्ल को जाता है।

अस्सी के दशक में युवा व्यंग्यकारों की नई पौध ज्ञान चतुर्वेदी, प्रेम जनमेजय और हरीश नवल आदि ने व्यंग्य विधा को आगे बढ़ाया। मगर दुर्भाग्य से साहित्य की इस विरल धारा को और समृध्द करने वाले नई पीढ़ी के हस्ताक्षर कम ही दिखाई देते हैं।

व्यंग्यकार को अपने लेखन के लिए तमाम बिम्ब और प्रतिमान समाज से ही ग्रहण करने होते हैं। ये ऐसे उपकरण हैं जिनसे वह सामाजिक बुराइयों की शल्यक्रिया करता है। शब्द का ब्रहमस्वरूप देखना हो तो व्यंग्य पढ़ना चाहिए। व्यंग्य लेखन मूलत: पत्रकार हो तो उसकी नजर और पैनी हो जाती है। सही मायने में वह लोकतंत्र का ही नहीं, समाज का भी प्रहरी होता है। वह समाज की गंदगी को भी अपनी लेखनी से साफ करता है।

सद्य: प्रकाशित व्यंग्य संग्रह 'भैंसिया गांव की भैंसें' के लेखक अतुल मिश्र पत्रकार रहे हैं। पत्रकारिता के दौरान उन्होंने देश की राजनीति समाज और मीडिया के भीतर विसंगतियों को करीब से देखा है। इसलिए जब वे लिखते हैं तो उनकी कलम की धार कई बार इतनी पैनी हो जाती है कि वह नश्तर की तरह लगती है। 'भैंसिया गांव की भैंसें' में संकलित रचनाओं को पढ़ते हुए महसूस होता है कि सामाजिक विसंगतियों को लेकर उनके मन में कितना विद्रोह है।

संकलन की पहली रचना में अतुल ने भ्रष्ट नेता के चरित्र को यों अभिव्यक्त किया है 'जो आदमी पूरे नेता को खा चुका है, उसका सूक्ष्म शरीर भी अतिरिक्त कैलोरीज की वजह से एक यमदूत के उठाने लायक नहीं होगा।' आतंकवाद पर लेखक की अपनी चिंता है। उन्होंने अपनी रचना में बिना फटे बमों का मानवीकरण कर दिया है, जो बात भी करते हैं। उसे लेखक ने इशारा किया तो एक बम बोला- 'लगता है यह फटने से पहले ही जब्त करा देगा। दूसरा बम समझदार था। उसने कहा- 'इसके हाथों में फटने की जिम्मेदारी लेने वाले लोग नाराज होंगे कि इस अखबार वाले के हाथों में ही क्यों फटे? आंखों देखा हाल छापने वाला मर गया तो कवरेज कौन करेगा!'

अतुल ने अपनी रचनाओं में इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकारों पर भी व्यंग्य किया है कि वे प्रतिकूल परिस्थितियों में भी किस तरह अटपटे सवाल करते हैं। जैसे मेनहोल में गिरे व्यक्ति से रिपोर्टर का यह सवाल कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं? एक पत्रकार दूसरे पत्रकार की गलतियां निकाले तो यह द्वेषवश माना जा सकता है मगर एक व्यंग्यकार जब पत्रकार की खामियां देखता है तो वह समालोचक की भूमिका में होता है, खासतौर से तब जब वह भ्रष्टाचार की तह में जाता हो। इसी तरह मीडिया में अपराध की बढ़ती खबरों को लेकर 'चैन से सोने दो, जाग जाओ' वाली रचना में उन्होंने टीवी पत्रकारिता पर भी व्यंग्य किया है।

शब्द की अभिव्यंजना का सबसे सार्थक प्रयोग व्यंग्यकार ही करता है। जीवित रहते हुए भी व्यक्ति भूतकाल में कैसे चला जाता है, यह नेता का भूत वाली रचना में देखा जा सकता है, जब लेखक से एक भूत सवाल करता है कि क्या लालकृष्ण आडवाणी प्रधानमंत्री बनने लायक नहीं तो व्यंग्यकार ने सटीक टिप्पणी की- 'अपनी उम्र के हिसाब से उन्हें भी अब भूत ही कहा जाएगा।' यह एक साहसिक टिप्पणी है। इसी तरह ज्योतिषियों की गतिविधियों पर भी कालसर्प वाली रचना में बेबाकी से उनकी बखिया उघेड़ी है।

अतुल मिश्र ने कुत्ते का उदाहरण रख इंसानियत को भी झकझोरने की कोशिश की है। 'कुत्तों को कुत्ता न बोलें' रचना में उन्होंने लिखा है- 'कुत्तों को कभी कुत्ता न कहें, आदमी की तरह वे भी बुरा मान जाते हैं।' लेखक का कहना सही है कि हम 'आज का भविष्य' देख कर 'कल का भविष्य' बनाने में भरोसा करते हैं।' यही वजह है कि ज्यादातर भारतीय राशिफल में यकीन करते हैं। मगर ये राशिफल कितने बेतुके होते हैं, इसका अंदाजा खुद पाठकों को भी नहीं होता। कई बात तो यह अखबारों में रिपीट भी हो जाता है और पाठकों को पता भी नहीं चलता। 'अखबारी राशिफलों के भविष्य' में राशिफलों का कच्चा चिट्ठा खोला गया है।

अतुल मिश्र ने अपने व्यंग्य संग्रह में राजनीति से लेकर स्थानीय निकायों और भ्रष्ट अफसरों तक पर कलम चलाई है। वे यहीं नहीं रुके बल्कि चंद्रयान में सवार होकर अंतरिक्ष में जा रहे चार यात्रियों की बातचीत से मनुष्य की आदतों की ओर भी इशारा किया है। उनके निशाने पर पूरा समाज है। कोई कोना नहीं बचा, जहां वे न पहुंचे हों। जैसे अतुल ने एक रचना में अभिनेत्री मल्लिका को देखकर कब्र में जाने को तैयार बैठे बुजुर्गों की मनोवृत्ति को चित्रित किया है। उन्होंने लिखा है- 'किसी स्थानीय अखबार के हवाले से पता चला कि कब्रिस्तान के पास से मल्लिका के गुजरने पर दो मुर्दे जिंदा होकर उसके साथ चल दिए।'

व्यंग्य संग्रह 'भैंसिया गांव की भैंसें' सामाजिक विद्रूपताओं का आइना है। अतुल मिश्र ने इसमें समाज के हर वर्ग को अपनी लेखनी से छुआ है। उनकी पैनी नजरों से कोई नहीं बचा। कई जगह ऐसी टिप्पणियां भी की हैं, जिनका साहस हिंदी के लेखक अमूमन नहीं कर पाते। संग्रह पठनीय है।
-संजय

पुस्तक : भैंसिया गांव की भैंसें
लेखक : अतुल मिश्र
प्रकाशक : प्रतिभा प्रकाशन, मुरादाबाद
मूल्य : दो सौ रुपए



फ़िरदौस ख़ान
देश की जनता को करीब चार साल पहले मिले सूचना के अधिकार ने काफी राहत दी है। इस सुविधा के चलते जहां लोगों के कामकाज होने लगे हैं, वहीं ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जहां सूचना के अधिकार के तहत लोगों को सूचना न मांगने या मांगी गई सूचना का आवेदन वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया है। हैरत की बात तो यह भी है कि भ्रष्टाचार से जनता को निजात दिलाने की गर्ज़ से शुरू किए गए इस कानून के तहत सूचना देने के लिए रिश्वत मांगने तक की शिकायतें मिली हैं। इन्हीं मुद्दों से संबंधित हरियाणा में आरटीआई से जुड़े कुछ मामलों की बानगी देखिए-

एक मामला जो जनहित से जुड़ी जानकारी मांगने का है :
हरियाणा के शिक्षा विभाग में दायर सूचना के अधिकार आवेदन से जानकारी मिली है कि राज्य के लगभग 50 फीसदी स्कूलों में मुख्याध्यापक नहीं हैं। मुख्याध्यापकों के 2004 पदों में से 984 पद रिक्त पडे हैं। इनमें 607 पद हाईस्कूल और 377 पद मिडिल स्कूल के मुख्याध्यापकों के हैं। जीन्द निवासी सतपाल ने आरटीआई के तहत आवेदन कर शिक्षा विभाग से सरकारी स्कूलों के मुख्याध्यापकों के खाली पदो ंके बारे में जानकारी मांगी थी। शिक्षा विभाग के मुताबिक मुख्याध्यापकों के 75 फीसदी पद शिक्षकों को पदोन्नत करके भरे जाते हैं, जबकि 25 फीसदी मुख्याध्यापकों की सीधी नियुक्ति होती है। स्कूलों की यह हालत हाल ही में 426 मुख्याध्यापकों की नियुक्ति के बाद है, पहले स्थिति क्या होगी, सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। मिडिल स्कूलों में 377 रिक्त पदों के अलावा 12 सौ अन्य मिडिल स्कूल ऐसे हैं, जिनमें मुख्याध्यापकों की कोई व्यवस्था नहीं है, जबकि ये स्कूल शिक्षा विभाग के सभी मापदंडों पर खरे उतरते हैं। राज्य में शिक्षा के हालात का अंदाजा फतेहगढ़ जिले के गोरखपुर गांव के बालिका उच्च विद्यालय को देखकर लगाया जा सकता है। इस स्कूल को लगभग 7 महीने पहले मुख्याध्यापक नसीब हुआ है, वह भी 14 साल बाद। स्थानीय निवासियों और विधायक के दखल देने के बाद ही स्कूल को शिक्षक और हेडमास्टर मिल पाए। निकटवर्ती मोची और चोबारा गांव के स्कूलों की दशा भी बेहतर नहीं है। दोनों स्कूल बिना हेडमास्टर के चल रहे हैं। सूचना के अधिकार के जरिए इस खुलासे के बाद शिक्षा मंत्री राजन गुप्ता ने खाली पदों को भरने का आश्वासन दे दिया है। हालांकि उन्होंने माना है कि पिछले कई वर्षों से पदोन्नति से भरे जाने वाले पद अभी तक नहीं भरे गए हैं।

दूसरे मामले में सूचना मांगने पर नौकरी ही मिल गई :
आरटीआई से सिर्फ सूचना मिलती हो, ऐसा नहीं है। आरटीआई के तहत जवाब मांगने पर कार्रवाई तक होती है। ऐसा ही हुआ रेवाड़ी की सपना यादव के साथ। मामला गुडगांव ग्रामीण बैंक में प्रोबेशनरी अधिकारी की नियुक्ति से जुड़ा है। सपना ने भी इस पद के लिए आवेदन किया था, लेकिन उसका चयन नहीं हो पाया। सपना नतीजे से संतुष्ट नहीं थी। इसलिए उसने आरटीआई के तहत आवदेन कर चयन प्रक्रिया से संबंधित सवाल पूछे। 7 दिसंबर 2007 को दाखिल आवेदन में सपना ने लिखित परीक्षा में अपनी मेरिट चयन के लिए साक्षात्कार और शैक्षणिक योग्यता के लिए जानकारी मांगी। सपना को उम्मीद थी कि उसका निश्चित तौर पर चयन हो जाएगा, लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तो उसने इसका कारण्ा आरटीआई की मदद से जानना चाहा। आवेदन के जवाब में बैंक ने जानकारी दी कि मांगी गई सूचनाएं आरटीआई कानून के दायरे में नहीं आती। बैंक अधिकारियों ने कानून की धारा 8 (1) डी की आड़ लेकर सूचना देने से मना कर दिया। पहली अपील भी कोई जवाब नहीं मिला। बाद में सपना में राज्य सूचना आयोग और फ़िर केन्द्रीय सूचना आयोग में अपील की। सीआईसी ने अगस्त 2008 में मामले की सुनवाई की और सपना के पक्ष में फैसला सुनाया। आयोग ने बैंक को सभी सूचनाएं उपलब्ध कराने का आदेश दिया। दिलचस्प रूप से बैंक ने सूचना तो उपलब्ध नहीं कराई, लेकिन 11 सितंबर 2008 को सपना को प्रोबेशनरी अधिकारी के तौर पर नियुक्ति दे दी।

तीसरे मामले में सूचना देने के लिए रिश्वत मांगी गई :
हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं संरचनात्मक विकास निगम द्वारा आरटीआई आवेदनकर्ता एच. आर. वैश्य से मांगी गई सूचना मुहैया कराने के लिए 8 लाख रुपए की मांग की गई थी। वैश्य ने निगम द्वारा गुड़गांव के उद्योग विहार में उद्यमियों को आबंटित किए प्लॉट उसके बदले लिया गया शुल्क और क्षेत्र के विकास में खर्च की गई राशि का ब्यौरा मांगा था। इस पर निगम के लोक सूचना अधिकारी की तरफ से सूचना शुल्क के लिए 8 लाख 27 हजार रुपये की मांग की गई। बताया गया कि 4 लाख रुपए दो हजार प्लॉट के विवरण से सम्बंधित कागजों के हैं। हर प्लॉट का विवरण 20 पेज में है। 4.27 लाख की राशि अन्य सूचनाओं के लिए मांगी गई। गौरतलब है हरियाणा में आवेदन शुल्क 50 रुपए और छायाप्रति शुल्क 10 रुपए प्रति पेज रखा गया है। आवेदनकर्ता ने निगम से सीडी में सूचना मांगी, लेकिन निगम के लोक सूचना अधिकारी जीवन भारद्वाज ने सीडी में सूचना देने से मना कर दिया और दलील दी कि बहुत से लोग उन्हें तंग करने के लिए सूचना के अधिकार का दुरुपयोग कर रहे हैं। उनका कहना था कि वैश्य ने जो सूचना मांगी वो निगम के इतिहास की जानकारी मांगने के बराबर है। हम सीडी में सूचना नहीं दे सकते, क्योंकि सारा डाटा सीडी में देने योग्य नहीं है।

चौथे मामले में आरटीआई के तहत किया आवेदन वापस लेने का दबाव बनाया गया :
हिसार जिले के गांव सातरोड खास के निवासी नरेश कुमार सैनी द्वारा आरटीआई के तहत गांव की डिस्पेंसरी से संबंधित जानकारी मांगने के लिए किए गए आवेदन को वापस लेने का दबाव बनाया गया। उसने बताया कि गांव की सरकारी डिस्पेंसरी अकसर बंद पड़ी रहती थी। यहां न तो नियमित तौर पर डिस्पेंसर आता था और न ही यहां पर दवाइयां थीं। गांव में डिस्पेंसरी होने के बावजूद गांव के बीमार लोगों को इलाज के लिए शहर जाना पड़ता था। इसलिए नरेश कुमार सैनी ने गत 1 मई को आरटीआई के तहत आवेदन कर डिस्पेंसरी से संबंधित जानकारी मांगी। जब डिस्पेंसरी से जुड़े लोगों को इस बात का पता चला तो उन्होंने उससे आवेदन वापस लेने को कहा, लेकिन जब वह नहीं माना तो उन्होंने गांव के प्रभावशाली लोगों के साथ मिलकर पंचायत बुलाकर उसे आवेदन वापसे लेने को मजबूर कर दिया। पंचायत में प्रभावशाली लोगों ने उसे आश्वासन दिया कि डिस्पेंसरी की हालत को जल्द ही सुधार दिया जाएगा। पंचायत के दबाव के चलते नरेश कुमार सैनी को अपना आवेदन वापस लेना पड़ा, लेकिन इतना जरूर हो गया कि डिस्पेंसरी की हालत कुछ बेहतर हो गई।

काबिले-गौर है कि जागरूक नागरिकों ने आरटीआई के तहत आवेदन करके अपनी कई समस्याओं से निजात पा ली है। हिसार सहित हरियाणा के अन्य हिस्सों में पूजा स्थलों के पास बने शराब के ठेके जो बरसों के आंदोलन के बावजूद नहीं हटाए गए थे, वे आरटीआई के तहत किए गए आवेदनों के चलते रिहायशी इलाकों व पूजा स्थलों के पास से हटा दिए गए हैं। इसके अलावा गली-मोहल्लों की टूटी सड़कों की हालत भी सुधर गई है। आरटीआई कार्यकर्ता विजय गुप्ता का कहना है कि अगर लोग आरटीआई के अपने अधिकार का इस्तेमाल करें तो इससे भ्रष्टाचार में कमी आ सकती है, क्योंकि जानकारी के अभाव के कारण ही लोग प्रशासनिक लालफीताशाही का शिकार होते हैं। बस जरूरत है अपने इस अधिकार का इस्तेमाल करने की।

हरियाणा के मुख्य सूचना आयुक्त जी. माधवन का कहना है कि सूचना के अधिकार कानून के तहत अब लोगों को सूचना प्राप्त करने के लिए विभागों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। जल्दी ही प्रदेश के सभी जिलों में आरटीआई काउंटर खोले जाएंगे। किसी भी विभाग से संबंधित सूचना लेने के लिए इन काउंटरों पर आवेदन किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि हरियाणा सूचना आयोग ने राष्ट्रीय सूचना आयोग से इसकी सिफारिश की थी। इस पर राष्ट्रीय सूचना आयोग ने हर जिले में स्थित ई.दिशा केंद्र में अलग से आरटीआई काउंटर खोलने की मंजूरी दी है।

उन्होंने कहा कि यह कानून सरकारी कामों में पारदर्शिता लाने के लिए लागू किया गया था और पिछले चार साल से सरकार इसे लोकप्रिय बनाने के लिए प्रयासरत है। इसके बावजूद अधिकांश लोगों को यह पता नहीं होता कि संबंधित जानकारी किस विभाग से लेनी है और उसका कार्यालय कहां है। इस समस्या को ध्यान में रखकर सूचना आयोग हरियाणा ने प्रथम रिपोर्ट में राष्ट्रीय सूचना आयोग को सुझाव दिया था कि सभी जिलों में स्थित ई-दिशा केंद्रों में आरटीआई के लिए विशेष काउंटर स्थापित कर दिया जाए। ई-दिशा केंद्र में स्थापित होने वाले इस काउंटर पर लोग किसी भी विभाग से जानकारी लेने के लिए आवेदन जमा करा सकेंगे। यहां से आवेदन संबंधित विभाग को भेजा जाएगा और विभाग काउंटर पर ही जानकारी भेज देगा। अगर जानकारी नहीं मिली तो वजह भी बताई जाएगी। फिलहाल सभी विभागों ने आरटीआई एक्ट के तहत सूचना देने के लिए जनसूचना अधिकारी या सहायक जनसूचना अधिकारी की नियुक्ति की है। कई बार लोगों को समय पर अधिकारी नहीं मिलते और उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।




स्टार न्यूज़ एजेंसी
चंडीगढ़. हरियाणा में कांग्रेस विधायक दल के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है. वे लगातार दूसरी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं.

प्रदेश के राज्यपाल जगन्नाथ पहाडिया ने आज यहां राजभवन में एक सादा समारोह में हुड्डा को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. 62 वर्षीय हुड्डा राज्य की 22 प्रतिशत जाट जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं. प्रदेश में कांग्रेस ने हुड्डा के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ा और कुल 90 में से 40 सीटें हासिल कीं. उन्होंने सात निर्दलीय विधायकों का समर्थन हासिल कर गत शुक्रवार की रात सरकार बनाने का दावा पेश किया, जबकि एक दिन पहले इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला ने सरकार बनाने का दावा पेश किया था. प्रदेश के विधानसभा चुनाव में इनेलो को 31 सीटें मिली थीं, जबकि हरियाणा जनहित कांग्रेस को 6, भारतीय जनता पार्टी को 4, बहुजन समाजवादी पार्टी को एक, शिरोमणि अकाली दल को एक सीट मिली है, जबकि 7 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है.

हरियाणा में हुड्डा विरोधी खेमे ने उन्हें मुख्यमंत्री पद पर काबिज होने से रोकने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी. मौजूदा हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री पद के लिए कई और नाम भी चर्चा में आ गए थे. हालांकि प्रदेश के वरिष्ठ पार्टी नेता सीधे तौर पर कुछ भी कहने से गुरेज़ कर रहे थे. कांग्रेस के पर्यवेक्षकों ने कल प्रदेश के लोकसभा और राज्यसभा सदस्यों से बात करने के बाद देर रात पार्टी आला कमान को रिपोर्ट सौंपी. इसके बाद आलाकमान ने हरियाणा में फिर से हुड्डा को ही प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाए जाने का फ़ैसला किया.

डॉ. वेदप्रताप वैदिक
राहुल गांधी वास्तव में गांधी नहीं हैं. वह हैं, राहुल-सोनिया या राहुल-राजीव या राहुल-इंदिरा या राहुल-नेहरू या राहुल-फिरोज गांधी ! गांधी से उनकी दूर-दूर तक कोई रिश्तेदारी नहीं है| राहुल के दादा, जिन्हें हम गलती से फिरोज गांधी कहते हैं, वे अपना उपनाम 'घंदी' लिखा करते थे, जैसे कि पारसी लोग अक्सर लिखा करते हैं लेकिन अपने आचरण से राहुल गांधीजी के जितने करीब बैठते हैं, स्वयं गांधीजी के पोते-पोती भी नहीं ! बैरिस्टर मोहनदास करमचंद गांधी जब दक्षिण अफ्रीका से लौटे तो उनके गुरू गोपालकृष्ण गोखले ने उनसे कहा था कि आप पहले भारत को देखिए, जानिए, पहचानिए और फिर देश-सेवा के मैदान में कूदिए| गांधी ने गोखले की सलाह मानी और भारत का चक्कर लगाया| गांधी ने जब भारत देखा तो उनका दिमाग चक्कर खा गया| बैरिस्टर मर गया और महात्मा पैदा हो गया|

कहने का मतलब यह नहीं कि राहुल, गांधी हैं या गांधी बनने जा रहे हैं| उन्हें कोई स्वाधीनता-संग्राम नहीं लड़ना है| उन्हें राजनीति करनी है और राजनीति किसी की खाला का घर नहीं है| उनके पिता राजीव कितने बेदाग, कितने मासूम, कितने भले थे लेकिन राजनीति ने उनकी कैसी गत बनाई, यह सबको पता है| राहुल को भी राजनीति ही करनी है| इसलिए उनका हस्र क्या होगा, यह भविष्य ही बताएगा| गांधी अगर और जीवित रहते और राजनीति करते तो पता नहीं क्या होता| शायद वे लेनिन-स्तालिन, माओ या फिदेल कास्त्रे की श्रेणी में आ जाते लेकिन गांधी जिस तरह रहे और जिस तरह गए, उसने उन्हें मानव इतिहास में बेजोड़ बना दिया| किसी दूसरे गांधी की कल्पना भी नहीं की जा सकती| लेकिन गांधी से कुछ सीख लेने पर भी पाबंदी है क्या ? यदि राहुल गांधी हमारे गांधी की तरह देश में घूम रहे हैं तो उसमें गलत क्या है ? कुछ लोग कह रहे हैं, यह नाटक है| मान लिया कि यह नाटक है तो आपको किसने रोका है ? आप भी यह नाटक क्यों नहीं करते ? किसी गरीब के झोपड़े में आप दो-चार रातें क्यों नहीं बिताते ? किसी किसान के घर आलथी-पालथी मारकर आप टिक्कड़ क्यों नहीं चबाते ? हेंड पंप से पानी खींचकर खुले में आप क्यों नहीं नहाते ? मुसा-तुसा कुर्त्ता-पाजामा पहनकर मजदूरों और किसानों से उनका दुखड़ा आप क्यों नहीं सुनते ? ऐसा नहीं है कि हमारे देश के सभी नेता अपनी जनता से कटे हुए हैं| वे वह सब और उससे भी ज्यादा करते हैं, जो राहुल कर रहे हैं लेकिन यह सब तब तक ही होता है, जब तक कि वे निचले स्तरों पर होते हैं, जब तक उन्हें नाम या पद या पैसा हासिल नहीं हुआ होता है लेकिन ज्यों ही राजनीति की बस के पायदान पर पांव रखने का मौका उन्हें मिलता है, वे आम जनता की तरफ से बेखबर हो जाते हैं| कब साहबी नखरा, कब सामंती अंदाज और कब श्रेष्ठता की सडांध उनके दिमाग को काबू कर लेती है, उन्हें पता ही नहीं चलता| जनता के नौकर जनता के मालिक बन बैठते हैं| लोकतंत्र् शीर्षासन की मुद्रा में खड़ा हो जाता है| गांधी का रास्ता लोकतंत्र् को उसके पांव पर खड़ा करता है| राहुल गांधी उसी रास्ते पर चलने की कोशिश कर रहे हैं| मैं देश के किसी नौजवान या प्रौढ़ नेता को नहीं जानता, जिसके पास राहुल-जैसा नाम, पद, पैसा और प्रभुता हो और वह राहुल की तरह 'इंडिया' से निकलकर 'भारत' में घूम रहा हो| यह क्या कम बड़ी बात है कि जिस जवान को कांग्रेस की दूसरी पाली में कोई प्रधानमंत्री या मंत्री बनने से नहीं रोक सकता था, वह आज सिर्फ सांसद क्या, मामूली कार्यकर्ता की तरह गांव-गांव घूम रहा है| वह यदि कभी प्रधानमंत्री बनेगा तो यह नहीं माना जाएगा कि उसे उपर से थोपा गया है| वह अपना प्रधानमंत्री-पद खुद अर्जित कर रहा है| पड़ौसी देशों में भी अनेक राहुल उभरे| जैसे बेनज़ीर भट्टो, नरेश वीरेंद्र, हसीना वाजिद, वांगचुक, सू ची, चंदि्रका कुमारतुंग और स्वयं राजीव गांधी लेकिन क्या इनमें से किसी ने भी राहुल की तरह अपने देश की खाक छानी?

अब से लगभग चार साल पहले जब प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहनसिंह काबुल गए तो मुझे भी साथ ले गए थे| मुझे पत्र्कारों के रेवड़ में शामिल कर दिया गया लेकिन शाम को बादशाह ज़ाहिरशाह के बेटे, पोते, और नाती-शाहजादे मीर वाइज़, मुस्तफा और नादिर-मुझे होटल से राजमहल में ले गए| शहजादी लीमा ने मेरे लिए शाकाहारी भोज पेश किया और कहा कि आप कहें तो एक और हिंदुस्तानी खास मेहमान को इस भोज में बुला लें| पांच-सात मिनिट में राहुल आ गए| चार घंटे के उस आत्मीय वार्तालाप में राहुल ने जो छवि मेरे मस्तिष्क पर अंकित की, वह यह थी कि यह लड़का बुद्घिमान है, जिज्ञासु है, संयत है, विनम्र है और गरिमामय है| यह छवि अब और गहरी होती चली जा रही है|

एक नया तर्क भी मष्तिष्क में उदय हो रहा है| वह यह कि अपने आचरण से राहुल वंशवाद के आरोप को पतला करते चले जा रहे हैं| 10 वर्ष के प्रशिक्षण के बाद जब यह युवा नेता पार्टी और सरकार की कमान संभालेगा तो लोग उसकी पृष्ठभूमि नहीं, अग्रभूमि को याद करेंगे| उसका वंश नहीं, उसकी तात्कालिक छवि ही निर्णायक होगी| यदि उसमें अपना दम-खम होगा तो उसे लोक-स्वीकृति अपने आप मिलेगी वरना वह इतिहास के किसी गह्रवर में समा जाएगा| हिंदुस्तान के लोग भौंदू नहीं हैं, चतुर हैं| वे बाप-कमाई वाले नेताओं को एक हद से आगे नहीं बढ़ने देते| यदि भारत का लोकतंत्र् वंशवाद पर आधरित होता तो अब तक बने 13 प्रधानमंत्रियों में से सिर्फ दो प्रधानमंत्री ही वंशवाद के कारण क्यों बने ? नेहरू तो अपने कारण बने लेकिन मान लें कि इंदिरा और राजीव क्रमश: अपने पिता और माता के कारण बने तो भी क्या यह तथ्य हमें याद नहीं कि जब इंदिरा बनीं तो नेहरू जीवित नहीं थे और जब राजीव बने तो इंदिरा जीवित नहीं थीं| ये पद उन्हें पार्टी ने दिए, उनके माता-पिता ने नहीं| क्या वजह है कि शेष 10 प्रधानमंत्रियों का कोई बेटा या बेटी प्रधानमंत्री नहीं बना ? उनमें कर्मण्य होता तो वे भी बन जाते| गांधी से बड़ा प्रतापी नेता भारत में कोई नहीं हुआ लेकिन गांधी के पोत-पड़पोते कहां हैं, क्या कर रहे हैं? उनमें से किसी को पकड़कर जनता ने अभी तक प्रधानमंत्री क्यों नहीं बनाया ? सच्चाई तो यह है कि भारत ने वंशवाद को कभी आंख मींचकर स्वीकार नहीं किया| इंदिरा गांधी को उनके पहले चुनाव (1967) में मिला बहुमत एकदम घट गया और राजीव को उनके पहले चुनाव में बुरी तरह हारना पड़ा| शायद राहुल को यह रहस्य पता है, इसीलिए वे बाप-कमाई की बजाय आप-कमाई पर ध्यान लगा रहे हैं| देश की लगभग सभी पार्टियां वंशवाद या परिवारवाद के ढर्रे पर चल पड़ी हैं लेकिन क्या कुछ युवा नेता हमें राहुल की तरह गांधी के रास्ते पर चलते हुए दिखाई पड़ रहे हैं ? इस देश में छोटे-मोटे कई ''युवराज'' हैं लेकिन क्या राहुल गांधी जैसा कोई और है?

लेखक प्रसिद्ध राजनीतिक चिंतक हैं.

फ़िरदौस ख़ान
नई दिल्ली. हरियाणा में भूपेन्द्र सिंह हुड्डा कांग्रेस के मुख्यमंत्री होंगे, जबकि महाराष्ट्र में अशोक चव्हाण मुख्यमंत्री पद संभालेंगे. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हरियाणा में मुख्यमंत्री पद के लिए हुड्डा और महाराष्ट्र में चव्हाण के नाम पर अपनी सहमति दी है.

गौरतलब है कि दोनों ही प्रदेशों में मुख्यमंत्री पद को लेकर गतिरोध जारी था और विधायक दल के नेता के नाम पर आखिरी फ़ैसला कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को ही लेना था. हरियाणा में हुड्डा विरोधी खेमे ने उन्हें मुख्यमंत्री पद पर काबिज होने से रोकने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी. मौजूदा हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री पद के लिए कई और नाम भी चर्चा में आ गए थे. हालांकि प्रदेश के वरिष्ठ पार्टी नेता सीधे तौर पर कुछ भी कहने से गुरेज़ कर रहे थे. कांग्रेस के पर्यवेक्षकों ने कल प्रदेश के लोकसभा और राज्यसभा सदस्यों से बात करने के बाद देर रात पार्टी आला कमान को रिपोर्ट सौंपी. इसके बाद आलाकमान ने हरियाणा में फिर से हुड्डा को ही प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाए जाने का फ़ैसला किया. इस तरह एक बार फिर हुड्डा अपने विरोधियों पर भारी पड़े.

उधर, महाराष्ट्र में विधायक दल की बैठक में 80 फीसदी विधायकों ने मुख्यमंत्री पद के लिए अशोक चव्हाण को अपना समर्थन दिया. पार्टी सूत्रों के मुताबिक़ चव्हाण को मुख्यमंत्री पद से दूर रखने के लिए केन्द्रीय भारी उद्योग मंत्री विलासराव देशमुख और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नारायण राणे ने अशोक चव्हाण के खिलाफ़ पार्टी में मुहिम छेड़ रखी थी. जहां कल हुई विधायक दल की बैठक से पहले देशमुख ने अपने समर्थक विधायकों के साथ एक बैठक की, वहीं राणे ने भी नवनिर्वाचित पार्टी विधायकों से व्यक्तिगत स्तर पर संपर्क किया. राणे ने 65 विधायकों के समर्थन का दावा पेश किया, इसके बावजूद लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने चव्हाण को ही मुख्यमंत्री पद सौंपने का फ़ैसला लिया.

अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस के नवनिर्वाचित विधायकों ने कल मुख्यमंत्री दोरजी खांडू को फिर से अपना नेता चुना. कांग्रेस विधायक दल की बैठक शुरू होने से पहले खांडू ने राज्यपाल जेजे जैकब को इस्तीफ़ा सौंप दिया था. शाम को खांडू ने फिर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया. 42 सदस्यीय विधायक दल ने दोरजी खांडू को अपना सर्वसम्मत नेता माना है. पार्टी आला कमान भी यही चाहती हैं कि खांडू ही फिर से प्रदेश के मुख्यमंत्री बनें.

क़ाबिले-गौर है कि कांग्रेस ने खांडू के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ा और कुल 60 में से 42 सीटें हासिल कर शानदार जीत दर्ज की. खुद खांडू निर्विरोध विधायक चुने गए. उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी और प्रदेश में 23 साल तक मुख्यमंत्री रह चुके गेगांग अपांग को इस चुनाव में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा. उनके पुत्र ओमक भी चुनाव हार गए.

स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट सीरीज़ 16 नवंबर से शुरू होगी. टेस्ट सीरीज़ के बाद पांच एकदिवसीय और दो ट्वेंटी-20 मैच खेले जाएंगे.

भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने कल इस सीरीज़ के कार्यक्रम की घोषणा की. श्रीलंकाई टीम 11 से 13 नवंबर तक मुंबई में बोर्ड अध्यक्ष एकादश से अभ्यास मैच खेलेगी. पहला टेस्ट 16 नवंबर से अहमदाबाद में होगा. दूसरा टेस्ट मैच कानपुर में और तीसरा व अंतिम टेस्ट मैच मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में खेला जाएगा.

टेस्ट मैचों के बाद दोनों टीमें दो टी-20 मैच खेलेंगी. ये मैच 9 दिसंबर को नागपुर और 12 दिसंबर को मोहाली में होंगे. वनडे मैच आगाज़ 15 दिसंबर को राजकोट से होगा. दूसरा मैच 18 दिसंबर को विशाखापट्टनम में, तीसरा मैच 21 दिसंबर को कटक में, चौथा मैच 24 दिसंबर को कोलकाता में और पांचवां व अंतिम मैच 27 दिसंबर को दिल्ली में होगा. राजकोट को छोड़कर बाकी चारों वनडे मैच फ्लडलाइट में खेले जाएंगे.श्रीलंकाई टीम 8 नवंबर को भारत पहुंचेगी.


स्टार न्यूज़ ब्यूरो
नई दिल्ली. झारखंड में विधानसभा चुनाव 27 नवंबर से पांच चरणों में कराए जाएंगे. चुनाव 18 दिसंबर को संपन्न होंगे. मतगणना 23 दिसंबर को होगी.

निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त नवीन चावला ने आज यहां झारखंड विधानसभा के चुनाव का कार्यक्रम की घोषणा करते हुए बताया कि झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा के लिए पहले चरण में 27 नवंबर को राज्य के 30 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान कराया जाएगा. दूसरे चरण में दो दिसंबर को 15 विधानसभा क्षेत्रों में और तीसरे चरण में आठ दिसंबर को सात विधानसभा क्षेत्रों में मतदान कराया जाएगा. चौथे चरण में 12 दिसंबर को 14 विधानसभा क्षेत्रों में और पांचवे चरण में 18 दिसंबर को 15 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान कराया जाएगा.

पहले चरण के लिए अधिसूचना तीन नवंबर को जारी की जाएगी. नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 10 नवंबर होगी. इसके अगले दिन नामांकन पत्रों की जांच होगी और 13 नवंबर तक नाम वापस लिए जाएंगे. मतदान 27 नवंबर को होगा. दूसरे चरण के लिए अधिसूचना सात नवंबर को जारी की जाएगी. नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 14 नवंबर होगी. इसके अगले दिन नामांकन पत्रों की जांच होगी और 18 नवंबर तक नाम वापस लिए जाएंगे. मतदान दो दिसंबर को होगा. तीसरे चरण के लिए अधिसूचना 13 नवंबर को जारी की जाएगी. नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 20 नवंबर होगी. इसके अगले दिन नामांकन पत्रों की जांच होगी और 23 नवंबर तक नाम वापस लिये जायेंगे. मतदान 8 दिसंबर को होगा. चौथे चरण के लिए अधिसूचना 17 नवंबर को जारी होगी. नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 24 नवंबर होगी. इसके अगले दिन नामांकन पत्रों की जांच होगी और 27 नवंबर तक नाम वापस लिए जाएंगे. मतदान 12 दिसंबर को होगा और अंतिम चरण के लिए अधिसूचना 24 नवंबर को जारी होगी. नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि एक दिसंबर होगी. इसके अगले दिन नामांकन पत्रों की जांच होगी और चार दिसंबर तक नाम वापस लिए जाएंगे. मतदान 18 दिसंबर को होगा.

निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही राज्य में आज से आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है. गौरतलब है कि राज्यपाल के. शंकरनारायणन की सिफारिश पर केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद झारखंड विधानसभा को कल भंग कर दिया गया था. झारखंड विधानसभा पिछले जनवरी माह से निलंबित थी. निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव की तारीखों की घोषणा करते ही राजनीतिक दलों अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश और महाराष्ट्र विधानसभा में मिली कामयाबी से कांग्रेस के नेता खुश हैं.

झारखंड विधानसभा दो मार्च 2005 को वजूद में आई थी. इसकी दूसरी विधानसभा के साढ़े चार साल के कार्यकाल में प्रदेश में चार मुख्य मंत्रियों ने सत्ता संभाली. इस दौरान झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के शिबू सोरेन दो बार मुख्यमंत्री बने. भारतीय जनता पार्टी के अर्जुन मुंडा और निर्दलीय मधु कौड़ा ने भी मुख्यमंत्री पद संभाला. इस साल 19 जनवरी से राष्ट्रपति शासन लागू है जिसकी समयावधि अगले साल 18 जनवरी को समाप्त हो रही है, जबकि झारखंड विधानसभा का कार्यकाल सामान्य रूप से 9 मार्च 2010 को समाप्त होने वाला है.

फ़िरदौस ख़ान
चंडीगढ़.
हरियाणा में सत्ता के लिए घमासान जारी है. आज जहां हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष फूलचंद्र मुलाना ने राज्यपाल जगन्नाथ पहाड़िया को सात निर्दलीय विधायकों का समर्थन पत्र सौंप दिया है, वहीं प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के अध्यक्ष ओमप्रकाश चौटाला कल रात ही सरकार बनाने का दावा पेश कर चुके हैं. हरियाणा का मुख्यमंत्री कौन होगा, इस पर क़यास लगाए जा रहे हैं.

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव के नतीजे में कांग्रेस सबसे बड़े दल है. इसलिए माना जा रहा है कि राज्यपाल कांग्रेस को ही सरकार बनाने का न्यौता दे सकते हैं, हरियाणा विधानसभा की कुल 90 सीटों में से कांग्रेस ने 40 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की है, लेकिन कांग्रेस सरकार बनाने के लिए ज़रूरी 46 के आंकड़े से छह सीटें दूर रह गई. इनेलो को 31, हरियाणा जनहित कांग्रेस को 6, भारतीय जनता पार्टी को 4, बहुजन समाजवादी पार्टी को एक, शिरोमणि अकाली दल को एक सीट मिली है, जबकि 7 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है.

कांग्रेस में कौन बनेगा मुख्यमंत्री? इस पर भी बहस शुरू हो गई है. कांग्रेस के वरिष्ट नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा खुद को केवल उम्मीदवार बताते हुए सिर्फ़ इतना ही कह रहे हैं कि इस बात का फ़ैसला पार्टी आला कमान करेंगे. फ़िलहाल प्रदेश में जोड़-तोड़ का सिलसिला जारी है. जहां कांग्रेस सरकार बनाने के लिए पर्याप्त समर्थन का दावा कर रही है, वहीं इनेलो का भी कुछ ऐसा ही कहना है. सरकार बनाने की इस जद्दोजहद में सभी की नज़र निर्दलीय विधायकों और हरियाणा जनहित कांग्रेस पर है. हरियाणा जनहित कांग्रेस के अध्यक्ष कुलदीप बिश्नोई का कहना है कि जिसकी सरकार बनेगी उनका समर्थन उसी पार्टी को मिलेगा.

क़ाबिले-गौर है कि कुलदीप बिश्नोई ने कांग्रेस से बगावत करके हरियाणा जनहित कांग्रेस बनाई थी और वे भूपेन्द्र सिंह हुड्डा का कट्टर विरोधी हैं. कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि सियासत में तो यह सब चलता ही रहता है. कई बार पार्टी को सत्ता में लाने के लिए समझौते भी करने पड़ते हैं. पार्टी कुलदीप विश्नोई को उपमुख्यमंत्री पद की पेशकश भी की जा सकती है. भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के नाम पर कांग्रेस को हरियाणा जनहित कांग्रेस का समर्थन हासिल करने में दिक्क़त हो. इसलिए मुख्यमंत्री पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की क़रीबी मानी जाने वाली कुमारी शैलजा भी 10 जनपथ पहुंचीं. इसके अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता स्व. बंसीलाल की पुत्रवधू किरण चौधरी को भी मुख्यमंत्री पद के दावेदार के तौर पर देखा जा रहा है.

कांग्रेस से जुड़े नेता फ़िलहाल इतना ही कह रहे हैं कि कांग्रेस में नेता का चुनाव तय प्रक्रिया के तहत ही होता है. केंद्रीय पर्यवेक्षक प्रदेश में जाएंगे और विधायकों की राय के आधार पर नेता चुना जाएगा. अलबत्ता, प्रदेश में सत्ता हासिल करने की कवायद जारी है. स्थिति आज रात तक ही स्पष्ट हो पाएगी.

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2009 के नतीजे
कुल सीटें : 288
कांग्रेस : 82
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी : 62
भारतीय जनता पार्टी : 46
शिवसेना : 44
समाजवादी पार्टी : 4
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी : 1
अन्य : 49

अरुणाचल विधानसभा चुनाव 2009 के नतीजे
कुल सीटें : 60
कांग्रेस : 42
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी : 5
ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस : 5
भारतीय जनता पार्टी : 3
अन्य : 5


سٹار نیوز ایجنسی
واشنگٹن (امریکہ). امریکہ اور متحدہ عرب امارات کے درمیان ایٹمی معاہدہ آخری مرحلے میں پہنچ گیا ہے اور امریکی کانگریس سے اس کی جلد منظوری متوقع ہے۔ امریکی وزرات خارجہ کے ترجمان آئن کیلی نے کہاکہ امریکی صدر براک حسین اوباما اس منصوبے کی منطوری دے چکے ہیں۔ انہونے کہاکہ اب یہ منصوبہ کانگریس کے پاس موجود ہے ۔ متحدہ عرب امارات مستقبل میں چالیس ہزارمیگاواٹ بجلی کی ضروریات پوری کرنے کےلئے نیوکلیئر ری ایکٹر تعمیرکرناچاہتاہے ۔ متحدہ عرب امارات نے امریکا کویقین دہانی کرائی ہے کہ جوہری ری ایکٹروں کو یورنیم کی افزدوگی کےلئے استعمال نہیں کیا جائیگا۔

हरियाणा विधानसभा चुनाव 2009 के नतीजे
कुल सीटें : 90
कांग्रेस : 40
इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) : 31
हरियाणा जनहित कांग्रेस : 6
भारतीय जनता पार्टी : 4
बहुजन समाजवादी पार्टी : 1
शिरोमणि अकाली दल : 1
अन्य : 7


स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. हरियाणा, महाराष्ट्र और अरुणाचल प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों के लिए मतगणना आज होगी. मतगणना विभिन्न केंद्रों पर कड़ी निगरानी के बीच कल सुबह आठ बजे से शुरू होगी. तीनों राज्यों में गत 13 अक्टूबर को चुनाव हुआ था. लोकसभा चुनाव के बाद बड़े राजनीतिक दलों के लिए यह पहला महत्वपूर्ण शक्ति परीक्षण है, जो उनका क़द तय करेगा.

चुनाव आयोग ने तीनों राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मतगणना के चरणबद्ध परिणाम मत गणना केंद्रों के भीतर तत्काल प्रदर्शित किए जाने चाहिए और जन संबोधन प्रणाली के जरिए इसकी घोषणा की जानी चाहिए. चुनाव आयोग ने निर्देश दिए हैं कि पूर्व के चरण का परिणाम प्रदर्शित किए जाने के बाद अगले चरण की मतगणना शुरू की जानी चाहिए. मतगणना केन्द्रों के भीतर और इसके आसपास सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं.

सियासी दलों के नेता और कार्यकर्ता मतगणना केन्द्रों के पास अभी से पहुंचने शुरू हो गए हैं. रातभर सियासी दलों ने चुनावी नतीजों के बाद की स्थिति पर विचार-विमर्श करने और प्रेस में दिए जाने वाले बयानों की रिहर्सल में गुज़ारी. फ़िलहाल सभी की सांसें थमी हुई हैं.



सरफ़राज़ ख़ान
आजादी के बाद नदी घाटी परियोजनाओं और जल संसाधनों की तकनीक विकसित करने वालों में फतेहाबाद के डॉ. कंवर सेन का नाम अग्रणी रहा है। भाखड़ा बांध का निर्माण डॉ. कंवर सेन की ही देखरेख में हुआ। राजस्थान की विश्व विख्यात इंदिरा गांधी नहर परियोजना की परिकल्पना का श्रेय डॉ. सेन को ही है। इतना ही नहीं दामोदर घाटी, कोसी नदी, नर्मदा, हीरा कुंड और राजस्थान नहर जैसी देश की न जाने कितनी ही महत्वपूर्ण परियोजनाओं को साकार करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई, लेकिन विलक्षण मेधा के धनी इस आधुनिक भगीरथ को अपने ही प्रदेश में भुला दिया गया। हरियाणा और राजस्थान की हजारों एकड़ बंजर जमीन में आज जो खेत लहलहा रहे हैं, वो सब डॉ. सेन की ही कोशिशों का नतीजा हैं।

उनकी असाधारण जल संसाधन तकनीकी मेधा के कारण ही संयुक्त राष्ट्र ने उन्हें नौ साल तक विशेषज्ञ के तौर पर रखकर उनकी सेवाओं से लाभ उठाया। डॉ. कंवर सेन ने अंतर्राष्ट्रीय परियोजना मेकोंग को साकार करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। राष्ट्र के प्रति उनकी विशिष्ट और उल्लेखनीय सेवाओं के लिए 1956 में डॉ. सेन को राष्ट्रपति ने पद्म भूषण से सम्मानित किया। उनका जन्म तत्कालीन संयुक्त पंजाब के कस्बे सुनाम में उनके नाना के घर हुआ, लेकिन उनकी शुरुआती शिक्षा उनके पैतृक कस्बे टोहाना फतेहाबद में हुई। कुछ वक्त उन्होंने हिसार के सीएवी स्कूल में भी शिक्षा ग्रहण की। लाहौर से उन्होंने दसवीं की परीक्षा में पहला स्थान हासिल किया। इसके बाद रुड़की कॉलेज से उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।

भारत सरकार की ओर से अप्रैल 1947 में उन्हें जल व विद्युत आयोग के मुख्य अभियंता का पदभार संभालने के लिए आमंत्रित किया गया। इस पद पर काम करते हुए डॉ. सेन को अमेरिका के ब्यूरो ऑफ रिक्लेमेशन के सहयोग से कोसी नदी पर बनाए जाने वाले बांध और भाखड़ा बांध का डिजाइन तैयार करने के लिए अमेरिका भेजा गया। वर्ष 1953 में वह केंद्रीय जल व विद्युत आयोग के अध्यक्ष भी बने। इसके साथ ही अमेरिका में उन्हें विशिष्ट परामर्श के लिए सात बार बुलाया गया। अमेरिका के अलावा डॉ. सेन को फ्रांस, जर्मनी, जापान, सोवियत संघ, फिलीपींस, युगोस्लाविया, थाईलैंड व ताइवान आदि अनेक देशों में आमंत्रित किया गया। आजादी से पहले ही भाखड़ा बांध के पानी के बंटवारे को लेकर मतभेद होने पर उन्होंने इस्तीफा दे दिया। डॉ. सेन की विलक्षण प्रतिभा को देखते हुए बीकानेर के महाराजा ने उन्हें अपनी रियासत में बुलवा लिया। इस पर उन्होंने बीकानेर के चीफ इंजीनियर के पद पर काम करना स्वीकार कर लिया। बीकानेर रहते हुए उन्होंने रियासत को पाकिस्तान न जाने देने में अहम भूमिका निभाई।

उस वक्त भारत सरकार के शुष्क इलाकों में सिंचाई के लिए पानी की कोई व्यवस्था नहीं थी, जबकि पाकिस्तान ने बीकानेर को नहरी पानी देने का वादा किया था। डॉ. सेन की कोशिशों से ही बीकानेर पाकिस्तान से जुडने से रह गया। यह भी उनके तर्कों का ही नतीजा था कि भाखड़ा बांध पाकिस्तान की बजाय भारत में रह गया।

संयुक्त राष्ट्र संघ के अधीन अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद 71 साल की उम्र में वे दिल्ली में बस गए और बतौर सलाहकार जीवन के अंतिम क्षणों में भी जल परियोजनाओं के संबंध में अपने सुझाव देते रहे। हरियाणा में उनकी जल उत्थान योजनाओं और राजस्थान में सिंचाई संबंधी समस्याओं के बारे में दिए गए सुझावों से जनता को बहुत फायदा पहुंचा। देश की जल परियोजनाओं में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले डॉ. सेन 24 दिसंबर 1988 को इस दुनिया से विदा हो गए।

जल संसाधनों से संबंधित तकनीकी ज्ञान विकसित करने समेत डॉ. सेन ने इस विषय के पाठयक्रमों के लिए अनेक पुस्तकें भी लिखीं। अगर डॉ. सेन को भारत में नदी घाटी परियोजनाओं का जनक कहा जाए तो कतई गलत न होगा। इंदिरा गांधी नहर राजस्थान की मरु भूमि के प्रति डॉ. सेन के बेहद लगाव का ही प्रतिफल है। यह नहर यहां के किसानों की जिन्दगी में खुशहाली का पैगाम लेकर आई। इसी तरह हरियाणा में भाखड़ा नहर के कारण कृषि क्षेत्र में आई क्रांति का श्रेय भी उन्हीं को जाता है।

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4 सितंबर 2010, शनिवार, 13 भाद्रपद (सौर) शक 1932, भाद्रपद मास 20 प्रविष्टे 2067, 24 रमज़ान सन हिजरी 1431, भाद्रपदा कृष्ण दशमी प्रात: 8 बजकर 14 मिनट तक उपरान्त एकादशी, आद्रा नक्षत्र मघ्यान्ह 12 बजकर 33 मिनट तक तदनन्तर पुनर्वसु नक्षत्र, व्यतीपात योग रात्रि 2 बजकर 46 मिनट तक तदनन्तर वरीयान योग,विष्टि(भद्रा) करण प्रात: 8 बजकर 14 मिनट तक,चन्दमा रात्रि 5 बजकर 21मिनट तक मिथुन राशि में तदनन्तर कर्क राशि में. जया एकादशी व्रत स्मार्त। पर्युषण पर्वारम्भ (जैन) चतुर्थी पक्ष। सूर्य दक्षिणायन। सूर्य उत्तर गोल। वर्षा ऋतु। प्रात: 9 बजे से प्रात: 10 बजकर 30 मिनट तक राहु काल. सूर्य : सिंह राशि में, चंद्रमा : मिथुन राशि में, बुध : सिंह (वक्री) राशि में, शुक्र : तुला राशि में, मंगल : कन्या राशि में, वृहस्पति : मीन (वक्री) राशि में, शनि : कन्या राशि में, राहु : धनु राशि में, केतु : मिथुन राशि में (ज्योतिषाचार्य वेदप्रकाश जाबाली)

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