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स्टार न्यूज़ एजेंसी
रियाद (सऊदी अरब). भारत के विदेश मामलों के राज्य मंत्री शशि थरूर ने भारत और पकिस्तान के बारे में सऊदी अरब संबंधी बयान देकर एक नया बवाल खड़ा कर दिया है. उन्होंने यहां भारतीय पत्रकारों से कहा कि "हम महसूस करते हैं कि सऊदी अरब का पाकिस्तान के साथ लंबा और करीबी रिश्ता है. इस वजह से वह हमारे लिए एक महत्वपूर्ण वार्ताकार हो सकता है। गौरतलब है कि थरूर इन दिनों प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ तीन दिवसीय रियाद दौरे पर हैं.

भारतीय जनता पार्टी ने शशि थरूर के इस बयान को बेहद गैर जिम्मेदाराना करार देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह को इस संबंध में संसद में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा. सीपीआई ने भी बयान की निंदा की है. हालांकि भाजपा के इस ब्यान से पहले ही शशि थरूर ने कह दिया था कि उनका मतलब सऊदी अरब को मध्यस्थ बनाने से नहीं है. उन्होंने वेबसाइट ट्विटर पर भी सफाई देते हुए कहा कि इंटरलॉक्यूटर वो व्यक्ति होता है जिससे हम बात करते हैं. अगर मैं आपसे बात करूं तो आप मेरे इंटरलॉक्यूटर हैं.

प्रतिभा वाजपेयी
होली देश का एकमात्र ऐसा त्योहार है जिसे देश के सभी नागरिक उन्मुक्त भाव और सौर्हादपूर्ण तरीके से मनाते है। यह एक ऐसा त्योहार है जिसमें भाषा, जाति और धर्म का सभी दीवारें गिर जाती हैं। और बुरा न मानो होली है कह कर हम किसी भी अजनबी को रंगों से सराबोर कर देते है। सही मायने में यही इस त्योहार की विशेषता है। परंतु दुर्भाग्यवश, आधुनिक जीवन में होली अब उतनी खूबसूरत नहीं रही। दूसरे त्योहारों की तरह इस त्योहार पर भी बाजारवाद का प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है। मुनाफा कमाने की आड़ में रसायनिक रंग बहुतायत से बाजार में बेचे जा रहे हैं। जिसका हमारे स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। आइए, देखते हैं कि आधुनिक होली हमारे पर्यावरण को किस तरह प्रभावित कर रही है तथा अपने पर्यावरण को बचाने के लिए हम क्या कर सकते हैं?

पहले रंग बनाने के लिए रॉ मैटीरियल के रूप में रंग-बिरंगे फूलों का प्रयोग किया जाता था। अपने चिकित्सीय गुणों के कारण इन फूलों से बना रंग त्वचा को निखारने का काम करता था। लेकिन समय के साथ जैसे-जैसे नगरों का विस्तार हुआ पेड़ों की संख्या में कमी आने लगी इसके साथ ही रंगों से जुड़े नफे-नुकसान की भी चर्चा होने लगी। फूलों से रंग बनाना मँहगा पड़ता, इसलिए नफे को ध्यान रखते हुए रंगों को बनाने के लिए रसायनिक प्रक्रिया का सहारा लिया जाने लगा। यह व्यापार की दृष्टि से तो मुनाफे का सौदा था, पर स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए अत्यन्त नुकसानदायक।

एक अध्ययन के अनुसार होली के रंगों को बनाने के लिए जिन जहरीले रसायनों का प्रयोग किया जाता है उनका स्वास्थ्य पर बहुत विपरीत प्रभाव पड़ता है। जैसे काला रंग बनाने के लिए लेड ऑक्साइड का प्रयोग किया जाता है जिससे किडनी फेल होने का खतरा होता है। इसी तरह हरा रंग कॉपर सल्फेट से बनता है इसका कुप्रभाव सीधा आँखों पर पड़ता है, जिसके कारण आँखों में एलर्जी, सूजन तथा व्यक्ति अस्थायी रूप से अंधा भी हो सकता है। लाल रंग मरक्यूरी सल्फाइट से बनता है, यह रसायन अत्यंत जहरीला होता है और इससे त्वचा का कैंसर हो सकता है।

सूखे रंगों से होली खेलने वाले प्रायः गुलाल का प्रयोग करते हैं। गुलाल मुख्यतः दो घटको सें मिलकर बनता है - कोलोरेंट जो जहरीला होता है और उसका आधार सिलिका या एस्बेसेटॉस हो सकता है, इन दोनों से ही स्वास्थ्य समस्याएं खड़ी हो सकती है। कोलोरेंट में हैवी मैटल होता है जिसके कारण अस्थमा हो सकता है, त्वचा में खुजली की शिकायत हो सकती है तथा यह आँखों पर भी विपरीत प्रभाव डालता है।

इन दिनों दुकानदार सड़क के किनारे रंगों की दुकान सजा लेते हैं। इन दुकानदारों को इस बात की जानकारी नहीं होती कि ये रंग कहां और कैसे बनते हैं। ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से पुड़िया बना कर ये रंग बेचते हैं। कभी-कभी ऐसे रंग भी बाजार में होली के रंगों के नाम पर बिक जाते हैं जिनके डिब्बों पर साफ तौर पर लिखा रहता है कि इनका प्रयोग केवल औद्योगिक उपयोग के लिए किया जा सकता है।

तो क्यों न इस बार होली में बाहर से रंग खरीदने के बजाय आप अपने घर पर इन रंगों को बनाएं। यह बहुत आसान है-

रंग बनाने का तरीका
पीला हल्दी और बेसन मिलाकर
गेंदे या टेसू के फूलों को पानी में उबालकर
गहरा गुलाबी चुकंदर को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट कर पानी में भिगो दीजिए। रात भर भीगने दीजिए और सुबह पानी छान लीजिए।
लाल और संतरी रंग मेंहदी सुखाकर, पीस लीजिए और फिर इसको पानी में मिला दीजिए।

इसी तरह आप और रंग भी घर पर बना सकते हैं। और यदि आप घर पर रंग नहीं बना रहे हैं बाजार में खुले रंग की बजाय हर्बल रंग खरीदने की कोशिश करिए। रंग खरीदने से पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि आप जो रंग खरीद रहे है, वह किन तत्त्वों से और कैसे बना है।

अब हरे पेड़ होते हैं होलिका में
होलिका दहन की परम्परा पर्यावरण के लिए दूसरी बड़ी समस्या है। अनुमानतः एक होली में लगभग सौ किलो लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है। और ये होलिकादहन शहर में एक से अधिक स्थानों पर होते है तथा इसके आयोजकों का प्रयास होता है कि उनकी होली का आकार दूसरे की होली से बड़ा हो, इस प्रतिस्पर्द्धा में होलिकादहन के नाम पर बड़ी संख्या में पेड़ों को काट दिया जाता है। हम होलिका दहन के विरोधी नहीं हैं, पर यदि हर चौराहे पर होलिका दहन करने के बजाय शहर में एक जगह होलिकादहन किया जाए तो इससे हमारी आस्था को भी ठेस नहीं लगेगी और पेड़ भी बच जाएंगे।

होली के दिन लोग जम कर रंग खेलते हैं और बाद में साबुन पानी की मदद से रंग छुड़ते हैं। इसमें सामान्य से तीन गुना अधिक पानी खर्च होता है। जानकारों का मानना है कि यदि हमने आज पानी की बर्बादी नहीं रोकी, तो हमारी भावी पीढ़ी होली का मजा नहीं ले सकेंगी। होली के मौसम में पानी एक-दूसरे जरूर डालिए, पर सीमित मात्रा में। देश में पानी की समस्या को देखते पानी बचाना बहुत जरूरी है, इसलिए पानी बर्बाद मत करिए। होली खेलने के लिए प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करिए, इन्हें छुटाना आसान होता है। आप इको फ्रैंडली रंगों के साथ सूखी होली खेल कर भी पानी की बचत कर सकते हैं। होली खेलने के लिए गुब्बारों या प्लास्टिक की थैली का प्रयोग न करें, इससे दुर्घटना हो सकती है तथासाथ ही इसके कारण सड़क में चारो तरफ प्लास्टिक का कचरा फैल जाता। जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है।

एक सामाजिक पर्व होने के नाते यह किसी एक परिवार तक सीमित नहीं होता, इसलिए होली के कारण हमारे पर्यावरण को किसी प्रकार का नुकसान न पहुँचे, इसकी जिम्मेदारी पूरे समाज पर आती है। इको फ्रैंडली होली का सपना तभी पूरा हो सकता जब समाज का प्रत्येक वर्ग जो इसे मनाता है इसमें अपना सहयोग दे। इसके लिए एक जन-जागरण अभियान की जरूरत है। लोगों को समझना होगा कि उनके थोड़े से प्रयास का पर्यावरण पर कितना अनुकूल असर पड़ता है। एक बार बात समझ में आने पर इस तरह के परिवर्तन के लिए उन्हें खुद को तैयार करना आसान हो जाएगा। हमारे लिए इको फ्रैंडली होली का विचार नया हो सकता है, पर अगर हम मथुरा-वृंदावन की होली देखें तो पाएंगे कि वहां होली गुलाल और फूलों की पंखुड़ियों से ही खेली जाती है। और इससे उनके त्योहार के आनंद में कोई कमी नहीं आती। वे ही नहीं वहां आने वाले विदेशी भी इस होली का आनंद उठाते हैं। तो दोस्तो, इस बार पर्यावरण और अपने स्वास्थ्य की रक्षा के लिए इको फ्रैंडली होली का आनंद उठाइए।

सिराज केसर
फाल्गुन आते ही फाल्गुनी हवा मौसम के बदलने का अहसास करा देती है। कंपकपाती ठंड से राहत लेकर आने वाला फाल्गुन मास लोगों के बीच एक नया सुख का अहसास कराता है। फाल्गुन मास से शुरू होने वाली बसंत ऋतु किसानों के खेतों में नई फसलों की सौगात देता है। पतझड़ के बाद धरती के चारों तरफ हरियाली की एक नई चुनरी ओढ़ा देता है बसंत, हर छोटे–बड़े पौधों में फूल खिला देता है बसंत, ऐसा लगता है एक नये सृजन की तैयारी लेकर आता है बसंत। ऐसे में हर कोई बसंत में अपनी जिंदगी में भी हँसी, खुशी और नयापन भर लेना चाहता हैं। इसी माहौल को भारतीय चित्त ने एक त्योहार का नाम दिया होली। जैसे बसंत प्रकृति के हर रूप में रंग बिखेर देता है। ऐसे ही होली मानव के तन-मन में रंग बिखेर देती है। जीवन को नये उल्लास से भर देती है।

होली नई फसलों का त्योहार है, प्रकृति के रंगो में सराबोर होने का त्योहार है। मूलतः होली का त्योहार प्रकृति का पर्व है। इस पर्व को भक्ति और भावना से इसीलिए जोड़ा जाता है कि ताकि प्रकृति के इस रूप से आदमी जुड़े और उसके अमूल्य धरोहरों को समझे जिनसे ही आदमी का जीवन है।

होली के इस अवसर पर, होली के दिन दिल पर पत्थर रखकर हमें दुखी मन से पानी बचाने की अपील करनी पड़ रही है। पानी की कमी से रंगो की होली की जगह खून की होली होना आये दिन सुनने और पढ़ने को मिल रही है पिछले एक साल के अंदर मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में दर्जनों लोगों की मौत पानी के कारण हुए झगड़ों में हुई। संभ्रात शहरियों ने अपने झील, तालाब को निगल डाले हैं। तालाबों को लील चुकीं ये बड़ी इमारतें बेहिसाब धरती की कोख का पानी खाली कर रही हैं। अंधाधुंध दोहन से पीने के पानी में आर्सेनिक, युरेनियम, फ्लोराइड तमाम तरह के जहर पानी जैसे अमृत तत्व में घुल चुके हैं। भावी भविष्य के समाज के जीवन में पानी का हम कौन सा रंग भरना चाहते हैं। क्या हमको यह हिसाब लगाने की जरूरत नहीं है। होली के नाम पर जल स्रोतों में सैंकड़ो टन जहरीले केमिकल हम डाल देंगें। क्या यह उन लोगों के साथ जो खरीद कर पानी नहीं पी सकते अत्याचार नहीं है। बेहिसाब पानी की बर्बादी प्रकृति के अमूल्य धरोहरों की बर्बादी हैं। सत्य यही है कि पंच तत्वों से बनी मानव जाति यदि पानी खो देगी तो अपना अस्तित्व भी खो देगी।

प्रतिदिन हम बगैर सोचे-समझे पानी का उपयोग और उपभोग करते जाते हैं। यह एक अवसर है कि हम अपने भीतर झाँकें और अपना अन्तर्मन टटोलें कि रंगों के इस शानदार त्योहार पर हम पानी की बर्बादी न करें…

बिना पानी के एक दिन गुज़ारने की कल्पना करें तो हम काँप उठेंगे। इस होली पर अपने जीवन में रंगों को उतारें जरूर, लेकिन साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि हमारे आसपास की दुनिया में जलसंकट तेजी से पैर पसार रहा है। इसलिये त्योहार की मौजमस्ती में हम कुछ बातें याद रखें ताकि प्रकृति की इस अनमोल देन को अधिक से अधिक बचा सकें…

होली पर पानी बचाने हेतु कुछ नुस्खे…
• होली खेलने के लिये आवश्यकतानुसार पानी की एक निश्चित मात्रा तय कर लें, उतना पानी स्टोर कर लें फ़िर सिर्फ़ और सिर्फ़ उतने ही पानी से होली खेलें, अधिक पानी खर्च करने के लालच में न पड़ें…

• सूखे रंगों का अधिकाधिक प्रयोग करें।
• सम्भव हो तो प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें, क्योंकि वे आसानी से साफ़ भी हो जाते हैं।
• गुब्बारों में पानी भरकर होली खेलने से बचें।
• जब होली खेलना पूरा हो जाये तभी नहाने जायें, बार-बार नहाने अथवा हाथ-मुँह धोने से पानी का अपव्यय होता है।

होली खेलने के दौरान पानी की बचत के टिप्स
• किसी अलग जगह अथवा किसी बगीचे में होली खेलें, पूरे घर में होली खेलने से घर गन्दा होगा तथा उसे धोने में अतिरिक्त पानी खर्च होगा।
• पुराने और गहरे रंगों वाले कपड़े पहनें ताकि बाद इन्हें आसानी से धोया जा सकता है।
• होली खेलने से पहले अपने बालों में तेल लगा लें, यह एक तरह से बचाव परत के रूप में काम करता है। इसकी वजह से चाहे जितना भी रंग बालों में लगा हो एक ही बार धोने पर निकल जाता है।
• इसी तरह अपनी त्वचा पर भी कोई क्रीम या लोशन लगाकर बाहर निकलें, इससे आपकी त्वचा रूखेपन और अत्यधिक बुरे रासायनिक रंगों के इस्तेमाल की वजह से खराब नहीं होगी।
• अपने नाखूनों पर भी नेलपॉलिश अवश्य कर लें ताकि रंगों और पानी से वे खराब होने से बचें और होली खेलने के बाद भी अपने पहले जैसे स्वरूप में रहें।
• मान लें कि आप बालों में तेल और त्वचा पर क्रीम लगाना भूल भी गये हों तो होली खेलने के तुरन्त बाद शावर अथवा पानी से नहाना न शुरु करें, बल्कि रंग लगी त्वचा और बालों पर थोड़ा नारियल तेल हल्के-हल्के मलें, रंग निकलना शुरु हो जायेंगे और फ़िर कम से कम पानी में ही आपका काम हो जायेगा।
• यदि आप घर के अन्दर अथवा छत पर होली खेल रहे हों, तो कोशिश करें कि फ़र्श पर एक तारपोलीन की शीट बिछा लें, जब होली के रंग का काम समाप्त हो जाये तो वह तारपोलीन आसानी से कम पानी में धोया जा सकता है, जबकि फ़र्श अथवा छत के रंग छुड़ाने में अधिक पानी और डिटर्जेण्ट लगेगा।

पानी के कम से कम उपयोग द्वारा घर की सफ़ाई हेतु टिप्स -
दिन भर होली खेलने के बाद घर-आँगन और छत की धुलाई एक बड़ा काम होता है, लेकिन हमें इस काम में कम से कम पानी का उपयोग करना चाहिये। इस हेतु निम्न सुझाव हैं -

1. दो बाल्टी पानी भर लें, एक बाल्टी में साबुन / डिटर्जेण्ट का पानी लें और दूसरी में सादा-साफ़ पानी लें।
2. दो स्पंज़ के बड़े-बड़े टुकड़े लें।
3. फ़र्श अथवा घर के जिस हिस्से में सबसे अधिक रंग लगे हों वहाँ साबुन के पानी वाले स्पंज से धीरे-धीरे साफ़ करें।
4. इसके बाद साफ़ पानी वाले स्पंज से उस जगह को साफ़ कर लें।
5. सबसे अन्त में एक बार साफ़ पानी से उस जगह को धो लें।
6. सबसे अन्त में सूखे कपड़े अथवा वाइपर से जगह को सुखा लें।

इस विधि से पानी की काफ़ी बचत होगी ही साथ ही रंग साफ़ करने में मेहनत भी कम लगेगी। अधिक गहरे रंगों को साफ़ करने के लिये वॉशिंग सोडा भी उपयोग करें यह अधिक प्रभावशाली होता है, लेकिन इसका उपयोग बहुत कम मात्रा में होना चाहिये वरना अधिक झाग की वजह से पानी अधिक भी लग सकता है। यह करते समय दस्ताने अथवा प्लास्टिक या रबर हाथों में पहनना न भूलें, क्योंकि सोडा अथवा साबुन के लिक्विड आदि हाथों की त्वचा के लिये खतरनाक हो सकते हैं।

पर्यावरण बचाने में सहयोग करें -
यह संयोग ही है कि मार्च के महीने में ही होली और विश्व जल दिवस एक साथ आ रहे हैं। समूचे विश्व और भारत के बढ़ते जलसंकट के मद्देनज़र हमें पानी बचाने के लिये एक साथ मिलकर काम करना चाहिये और होली जैसे अवसर पर पानी की बर्बादी रोकना चाहिये। इस धरती पर लगभग 6 अरब की आबादी में से एक अरब लोगों के पास पीने को भी पानी नहीं है। जब मनुष्य इतनी बड़ी आपदा से जूझ रहा हो ऐसे में हमें अपने त्योहारों को मनाते वक्त संवेदनशीलता दिखानी चाहिये। इस होली पर जितना सम्भव हो अधिक से अधिक पानी बचाने का संकल्प लें…

होली तो अब सामने खेलेंगे सब रंग।
महंगाई ऐसी बढ़ी फीका हुआ उमंग।।

पैसा निकले हाथ से ज्यों मुट्ठी से रेत।
रंग दिखे ना आस की सूखे हैं सब खेत।।

एक रंग आतंक का दूजा भ्रष्टाचार।
सभी सुरक्षा संग ले चलती है सरकार।।

मौसम और इंसान का बदला खूब स्वभाव।
है वसंत पतझड़ भरा आदम हृदय न भाव।।

बना मीडिया आजकल बहुत बड़ा व्यापार।
खबरों के कम रंग हैं विज्ञापन भरमार।।

रंग सुमन का उड़ गया देख देश का हाल।
जनता सब कंगाल है नेता मालामाल।।
-श्यामल सुमन

अतुल मिश्र
होली के अगले दिन भी अगर टी. वी. न्यूज़ चैनल्स होली मनाने वालों से सवालात न करें तो लगता नहीं कि होली मन ली गई है. इस बारे में वे लोगों से कुछ इस तरह की बातें पूछते हैं कि जवाब देने के बाद कैमरे के सामने से हटकर जवाबदाता यह सोचता है कि अब इन बातों के पूछने से क्या फायदा? मसलन, पहला सवाल-
"आप होली खेलते हैं?"
"जी हां, होली वाले दिन ज़रूर खेलते हैं."
"इस बार भी खेली होगी?"
"जी, बिलकुल."
"अच्छा, तो इस बार भी होली खेली?"
"जी, बिलकुल."
"वैरी गुड, अब आप हमारे दर्शकों को यह बताईये कि कैसा लगा?"
"अच्छा लगा, बहुत अच्छा लगा."
"अच्छा, तो आपको वाक़ई अच्छा लगा?"
"जी, अच्छा क्यों नहीं लगेगा, बहुत अच्छा लगा."
"कैसा और क्या अच्छा लगा? मतलब, रंग खेलना या दारू पीना?"
"दारू पीकर रंग खेलना."
"बहुत सुन्दर. यहां हम अपने दर्शकों यह बता देना चाहते हैं कि कुछ लोगों को दारू पीकर होली खेलना अच्छा लगता है तो कुछ लोग यहां ऐसे भी हैं, जो किन्हीं वजहों से दारू नहीं पीते हैं, मगर दारू पीने वालों को देखते ज़रूर हैं. आइये, ऐसे ही एक और सज्जन से आपको मिलवाते हैं, जो बिना दारू पिए भी कई बार होली खेल चुके हैं. क्या नाम है आपका?"
"रामभरोसे, पूरा श्री राम भरोसे लाल."
"अच्छा, तो राम भरोसे लाल जी, सुना है कि आप बिना दारू पिए भी होली मना लेते हैं. इसमें कितना सच है, हमारे दर्शक जानना चाहेंगे?"
"अजी, दारू पिए बिना ही क्या खेल लेते हैं? मज़बूरी है. छह-छह महीने तनख्वाहें नहीं मिलतीं. ऊपरी कमाई है नहीं मास्टरी में.क्या खाएं, क्या पियें और पिलायें?" रामभरोसे ने अपनी असली तकलीफ़ देश भर के सामने रखते हुए कहा.
"आप हमारे दर्शकों से कुछ कहना चाहेंगे?"
"क्यों नहीं, हम तो बहुत देर से सोच रहे थे."
"क्या सोच रहे थे आप, इधर कैमरे की तरफ देखकर बताईये."
"यही कि जिस नौकरी में रहकर होली वाले दिन भी आदमी को दारू मयस्सर न हो, वह नौकरी नहीं करनी चाहिए."
"..........'होली-स्पेशल' का हमारा यह कार्यक्रम छोड़कर अभी कहीं मत जाइएगा. छोटे से एक ब्रेक के बाद हम फिर वापस लौटेंगे और बताते रहेंगे कि इस साल लोगों ने होली कैसे मनाई?" डकार-न्यूज़ चैनल पर इसके बाद पेट-दर्द की दवा का विज्ञापन आना शुरू हो गया.

चांदनी

नई दिल्ली. भांग की वजह से दिल की धड़कन, ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है जिससे मस्तिष्क को नुकसान हो सकता है. साथ ही गर्भवती महिलाओं में भ्रूण पर असर हो सकता है। हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल के मुताबिक भांग से मनोवैज्ञानिक ओर कॉग्नीशन व सर्कुलेशन पर असर होता है। यूफोरिया, एंजाइटी से होने वाले बदलावों के चलते याददाश्त और साइकोमोटर परफार्मेंस पर भांग लेने के बाद सामान्य असर से तीन गुना ज्यादा बढ़ जाता है।

भांग का सेवन करने से हृदय गति, ब्लड प्रेशर में बदलाव के हृदय संबंधी बीमारी के गंभीर परिणाम सामने आते हैं। इसका क्रोनिक प्रभाव दिमाग पर पड़ने के साथ ही ड्रग की तरह लत भी लग सकती है। भांग से यूटेरो में उल्टा असर हो सकता है और इसकी वजह से मस्तिष्क के विकास में गड़बड़ी संभव है और बाद में बोधन क्षमता पर भी प्रभाव पड़ता है। भांग के परिणाम धूम्रपान की तरह ही होते हैं जो तंबाकू को धूम्रपान के तौर पर लेते हैं, इसलिए इससे परहेज करना चाहिए। कम उम्र के लोगों में इसका असर वयस्कों की तुलना में कहीं ज्यादा होता है।

कुछ तथ्य
* बहुत ज्यादा भांग लेने वालों में इसके उल्टे परिणाम के तौर पर दिमागी हालत गड़बड़ाना और क्रोनिक सिजोफ्रेनिया जैसी समस्याएं होती हैं भले ही कुछ लोग इसे लेना बंद कर दें।
* भांग लेने वाले कुछ लोगों की दिमागी स्थिति अतिसंवेदनशील हो सकती है और इससे खतरे में पलटाव उन लोगों में बढ़ जाता है जो पहले से ही इस तरह की समस्या के षिकार हों और यह उन लोगों में कहीं ज्यादा होने की संभावना होती है जो सिजोफ्रेनिया से ग्रसित होते हैं।
* भांग दिमागी हालत की समस्या वालों में और इसकी गिरफ्त में आने यानी दोनों के लिए ही घातक है।
* दिमाग से जुड़े सिजोफ्रेनिया के मामले में लखनऊ में ऐसे चार मामले दर्ज हो चुके हैं जिन्होंने लम्बे समय तक भांग का सेवन किया और जिसकी वजह से वे समस्या के शिकार बने। सोच में गड़बड़ी और स्पष्ट एकाग्रता न हो तो इससे याददाश्त पर असर पड़ता है।
* भांग लेने से शराब जैसी स्थिति होती है इसलिए इसे लेने के बाद गाड़ी न चलाएं।
* शराब, धूम्रपान और भांग को लोग अकसर एक साथ लेते हैं।

अतुल मिश्र
ओम जय गर्दभ भ्राता, ढेंचू, जय गर्दभ भ्राता !
जो तुमको पुजवाता, यही जनम पाता !!
ओम जय गर्दभ भ्राता !!!

नेता या कउओं से, हैं जितने प्राणी,
मूरख, हैं जितने प्राणी,
इन सबकी तुम सबसे, मिलती है वाणी !
ओम जय गर्दभ भ्राता !!

तुम पी. एम. या सी. एम., सबमें वास करो,
घोंचू, सबमें वास करो,
ज़्यादा खाकर, ज़्यादा गैसें पास करो !
ओम जय गर्दभ भ्राता !!

भारत के सब वासी, हैं इतने खेंचू,
लल्ला, हैं इतने खेंचू,
कहते तुमसे बैटर, करते हैं ढेंचू !
ओम जय गर्दभ भ्राता !!

भंग पिए तुम जब भी, हँसते, मुस्काते,
भौंदू, हँसते, मुस्काते,
नेता, पागल, सिर्री, झेंप-झेंप जाते !
ओम जय गर्दभ भ्राता !!

आज तुम्हारी आरती, जो कोई नर गावै,
मूरख, जो कोई नर गावै,
पत्रकार वो बनके, नैक्स्ट जनम पावै !
ओम जय गर्दभ भ्राता !!

नेता तेरे पालक, तू उनका बालक,
बौड़म, तू उनका बालक,
आज मंच पर आना, बनकर संचालक !
ओम जय गर्दभ भ्राता !!

......और अब अंत में सब जयकारा लगाएं कि
बोलो, गर्दभ महाराज की जय !! बोलो, उनकी सुरीली आवाज़ की जय !!
बोलो, मूर्खाधिपतियों के ताज की जय !! बोलो, कोतवाल सहित यमराज की जय !!
बोलो, नेता, कउओं और बाज की जय !! बोलो, भगंदर, बवासीर और खाज की जय !!
बोलो, लौकी, मूली और प्याज की जय !! बोलो, क़र्ज़ से अधिक ब्याज की जय !!
बोलो, नकली दूध के छाछ की जय !! बोलो, कल-परसों की मिलाकर आज की जय !!

अतुल मिश्र
होली पर कॉलोनी में चंदा इकठ्ठा करना भी बड़े साहस का काम है. इसे हर कोई नहीं कर सकता. इसे करने के लिए एक अदद बेशर्मी के साथ ही दारू की एक बोतल भी चाहिए कि हौंसला बना रहे और पिछली होली पर किये गए घपले के इल्ज़ामात झेलने के काम आये. हमारी कॉलोनी में चंदा लेने में सबसे आगे जो लोग हैं, वे सब सियासी पार्टियों से जुड़े लोग हैं और चंदा मांगकर अपना धंधा चलाने में आस्था रखते हैं. बाकी जो सबसे पीछे खड़े होते हैं, वे व्यापारी लोग होते हैं और मन ही मन पूरी रक़म का हिसाब लगा रहे होते हैं कि इसमें से कितना उनके पल्ले पड़ेगा ?

"नमस्कार, मिश्र जी. कैसे हैं आप ?" मौहल्लाई राजनीति से जुड़कर अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में जाने के अदम्य साहस से भरे कोई दुर्जननुमा सज्जन हमारे गेट पर खड़े होकर हमारी सलामती कन्फर्म करते हैं.

"बस, सब ठीक हैं ? और सुनाइये आप कैसे हैं ?" साथ में आई भीड़ को नज़रंदाज़ करते हुए हम ऐसे पूछते हैं, जैसे कल की होली का चंदा मांगने की बात से हम पूरी तरह अनभिज्ञ हों.

"कलेक्शन कर रहे हैं होली के लिए. आपके पास भी आये हैं." किसी का स्वर कुछ इस अंदाज़ में उभरा कि जैसे वे लोग हमसे चंदा मांगकर हम पर कोई अहसान कर रहे हों और हमें हर साल की तरह इस बार भी यह बात खुद ही समझ जानी चाहिए थी.

"कितना ले रहे हैं सबसे ?" हमने महंगाई के मद्देनज़र पहले ही कन्फर्म करना मुनासिब समझा, ताकि रक़म सम्बन्धी जो भी झटका लगना है, हम उसके लिए पहले से ही तैयार रहें.

"अबकी बार कुछ ख़ास कर रहे हैं. खाने-पीने के अलावा डांसर का भी इंतज़ाम है." किसी ने हमारी और हमारी जेब की हलचल बढ़ाने के लिहाज़ से कहा.

"डांसर की क्या ज़रुरत है ?" हमने यह सोचते हुए कि डांसर ना जाने कैसी होगी, अपनी उस ओ़र अरुचि प्रदर्शित की.

"अब चौबे जी की बड़ी इच्छा थी कि एक बार राखी सावंत को बुला लिया जाये."

"अच्छा, राखी सावंत आ रही है ?' हमने बिना चौंकने वाले अंदाज़ में लगभग खुश होते हुए पूछा.

"नहीं, वह नहीं आ पा रही है. उसे दस्त हो रहे हैं. कल ही लौटे हैं चौबे जी मुंबई से. बेचारे अपने किराए से गए थे. लेकिन क्या करें. दस्त हो गए.

अब किसी और का इंतज़ाम किया है."

"किसका ?"

"चौबे जी के गांव की ही है- रम्बतिया. बता रहे थे बहुत मस्त नाचती है." ललचाकर चंदा लेने की कला में प्रवीण मौहल्लाई नेता ने हमारी आंखों में झाँकने की कोशिश करते हुए हमें सूचित किया.

"ठीक है, अब जैसी आप अबकी मर्ज़ी. कितना देना है ?"

"एक हज़ार दे दीजिये, कम पड़ा तो फिर देख लेंगे."

हमारे अन्दर अचानक ही अपनी संस्कृति से जुड़े इस त्यौहार के प्रति श्रद्धा-भाव उमड़ पड़ा और हमने रक़म देकर होली के इस कार्यक्रम में शरीक़ होने की अनुमति दे दी.

चांदनी
होली का पर्व प्रेम और ख़ुशी का प्रतीक है और इसको समाज व मन में फैली गंदगी को साफ करने के तौर पर मनाया जाना चाहिए। होली पर लड़ाई-झगड़े, हिंसा और अभद्रता से दूर रहें और इसे प्रेम पूर्वक मनाएं. होली पर स्वास्थ्य संबंधी ध्यान भी रखें.

असुरक्षित होली
  • हरा और नीलापन लिए हुए रसायनयुक्त हरे रंग में मैलासाइट ग्रीन होता है जो आंख के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। ऑरामाइन, मीथाइल वायलेट, रोडामाइन और ऑरेंज टू सभी फोटोटॉक्सि रंग हैं और इनसे त्वचा संबंधी समस्या हो सकती है।
  • रंग में सीसे का इस्तेमाल भी त्वचा के लिए नुकसानदायक होता है।
  • रसायनिक डाई की जगह प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करना चाहिए। फूल जैसे मैरीगोल्ड, चाइनीज रोज़, बटरफ्लाई पी, फ्लेम ऑफ द फारेस्ट आदि से तैयार रंगों को प्रयोग करें।
  • भांग लेने से मानसिक संतुलन गड़बड़ा सकता है जिससे आपके व्यवहार में असर संभव है साथ ही दिमागी हालत में भी उल्टा असर होता है। भांग से दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर भी बढ़ सकता है जिसके लिए आषंकित व्यक्ति बीटा ब्लॉकर प्री-ट्रीटमेंट ले सकते है और भांग के पड़ने वाले बुरे प्रभावों से बच सकते हैं।
  • शराब पीने के बाद आप फैसला लेने के काबिल नहीं रह जाते साथ ही सड़क दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है।
  • गुब्बारों के प्रयोग से आंखों को नुकसान होने के साथ ही सिर में भी जख्म हो सकता है।
  • होली के दौरान डेट रेप ड्रग्स से भी सावधान रहें और अजनबियों के साथ होली न खेलें।
  • संवेदनशील अंगों में रंग न डालें जैसे कि आंख। अगर आंख में रंग पड़ ही जाए तो तुरंत नल से बहते हुए पानी से उसे धो लें, अगर फिर भी आराम न मिले तो जल्द चिकित्सा सुविधा लें।
कुछ उपाय
  • दांतों के बचाव के लिए डेंटल कैप्स का इस्तेमाल करें।
  • नुकसानदायक रसायन वाले रंगों से बचाव के लिए धूप के चश्मे का इस्तेमाल करें।
  • पुराने या चलताऊ किस्म के कपड़े पहनें।
  • फुल बांह की टी-शर्ट या शर्ट पहनें जिससे पूरी भुजा ढकी रहे।
  • मोजे पहनें।
  • चमकदार और गहरे रंग के कपड़ों को प्राथमिकता दें।
  • जब आप पर कोई जबरदस्ती रंग लगाए तो आंखें और होंठ जोर से बंद रखें।
  • अपने शरीर और बालों में नारियल का या कोई अन्य तेल लगाएं, ताकि रंगों का उस पर असर न हो। इसके बाद में रंगों को साफ करने में भी आसानी होती है।
  • जब रंग को साफ करें तो गुनगुने पानी का प्रयोग करें और आंखों व मुंह को जोर से बंद रखें।
  • सफर के दौरान कार के शीशे पूरी तरह बंद रखें।
  • बालों को बचाने के लिए हैट या कैप का इस्तेमाल करें।
  • दोस्तों के एक समूहों को जो हुड़दंग कर रहे हों, उनके साथ शामिल न हों।
  • बेहतर यही है कि आप इनसे किनारा कर लें या फिर ऐसी जगह पर रुक जाएं जहां आप अपने आपको सुरक्षित महसूस करें।
  • बच्चों को अंडे, मिट्टी या गटर के पानी से होली खेलने से मना करें।
  • अबीर के इस्तेमाल से परहेज करें, क्योंकि इसमें सीसा मिला होता है।
  • बच्चों को अपने पड़ोसियों के साथ जबरन होली खेलने से रोकें।
  • होली के दिन अकेले गली में न टहलें।
  • पाउडर कलर और पानी का इस्तेमाल करें।
  • अपने बच्चों के लिए बड़ी बाल्टी में पानी भरकर रखें, ताकि वे गटर के पानी या अन्य गंदे पानी का इस्तेमाल न करें।

चांदनी
नई दिल्ली. होली के दौरान बच्चों द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले गुब्बारे खतरनाक साबित हो सकते हैं और इससे आंखों या सिर तक को गंभीर नुकसान हो सकता है। हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल के मुताबिक अधिकतर सिंथेटिक रंग आंखों या त्वचा के लिए हानिकारक होते हैं। घर में तैयार किए जाने वाले रंग हमेशा बेहतर होते हैं। रसायनिक रंगों में भारी धातु जैसे सीसा हो सकती हैं और ये आंख और त्वचा के लिए हानिकारक होते हैं। अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या जो भारी धातु की वजह से होते हैं उनमें स्किन एलर्जी, डर्माटाइटिस, त्वचा का सूखना या चैपिगं, स्किन कैंसर, राइनाइटिस, अस्थमा और न्यूमोनिया शामिल हैं।

कैसे खुद बनाएं रंग

  • आटे में हल्दी मिलाकर पीला रंग बनाएं।

  • 'टेसू'' के फूल की पत्ती से केसरिया रंग तैयार करें।

  • 'चुकन्दर' के टुकड़ों को पानी में भिगोकर मैजेंटा रंग बना सकते हैं।
क्या करें :
अगर रंग में रसायनिक तत्व होंगे तो इससे आंखों में हल्की एलर्जी होगी या फिर बहुत तेज जलन होने लगेगी। मरीज में एलर्जी की समस्या, कैमिकल बर्न, कॉर्नियल एब्रेशन और आंखों में जख्म की समस्या हो सकती हैं।होली के दौरान आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर रंग हल्के लाल रंग के होते हैं और इसका असर 48 घंटे तक रहता है। अगर आंख की दृष्टि स्पष्ट न हो तो तुरंत इमरजेंसी में दाखिल कराया जाना चाहिए।
रंग में मिलाए जाने वाले तत्व (गुलाल में मिलाया जाने वाला चमकदार अभ्रक) से कॉर्निया को नुकसान हो सकता है। कॉर्नियल अब्रेशन एक इमरजेंसी की स्थिति होती है और इसके लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
फस्ट एड : अगर कोई भी रंग आंख में चला जाता है तो इसे बहते हुए नल से धोएं। अगर दृष्टि में कमी हो तो कॉर्नियल अब्रेशन से बचाव के लिए आंख के डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।

सलीम अख्तर सिद्दीकी
'हाथी' की सवारी कर रहे दो नेताओं ने राजनीति के साथ ही आपस में रिश्तेदार बनने का फैसला लिया। 24 फरवरी को बसपा के सांसद कादिर राणा के बेटे और वरिष्ठ बसपा नेता मुनकाद अली की बेटी की शादी की रस्म मेरठ के एक बड़े रिसोर्ट में पूरी की जा रही थीं। हालांकि इस्लाम में शादी की रस्म इतनी छोटी होती है कि उसे पांच आदमियों के बीच मात्र आधा घंटे में ही निपटाया जा सकता है, लेकिन दोनों नेतओं ने इतना आडम्बर किया कि मेरठ में दो दिन तक अफरा-तफरी का माहौल रहा। शादी में इतने लोगों ने शिरकत की कि मेरठ-दिल्ली रोड पर यातायात रोक दिया गया। मीलों लम्बा जाम लगा। जाम में फंसे लोग त्राहि-त्राहि कर बैठे। लोगों ने कहा कि यह कहां का इंसाफ है कि आम आदमी की नुमाइन्दगी करने का दावा करने वाले नेता ही अपनी शान-ओ-शौकत दिखाने के लिए आम आदमी को परेशानी में डाल दें? क्या इन्हें यह नहीं पता कि जाम में फंसे लोगों को कितना कष्ट होता है? बच्चे प्यास से बिलबिला जाते हैं। मरीज वक्त पर अपनी दवा नहीं ले सकता। शहर में आने के बाद दूर-दराज जाने वालों के लिए वाहन उपलब्ध नहीं हो पाता। किसी युवा का इंटरव्यू छूट जाता है, क्योंकि सत्तारुढ़ पार्टी के नेताओं के बच्चों की शादी थी इसलिए पूरा प्रशासन व्यवस्था में जुटा हुआ था। बात यहीं खत्म हो जाती तो भी गनीमत थी। मुनकाद अली ने शादी की रस्म को भी चापलूसी का जरिया बना दिया। क्योंकि मायावती लखनऊ में जगह-जगह हाथियों की मूर्तियां स्थापित कर रहीं हैं, शायद इसी से प्रेरणा लेकर मुनकाद अली ने 11 जीते-जागते हाथियों को ही शादी स्थल पर खड़ा करके चापलूसी की एक महान मिसाल पेश कर दी।

बात यहीं खत्म हो जाती तो फिर भी ठीक था। एक हाथी सुबह से भूखा था। हाथी को शायद या तो यह बुरा लगा कि सब इंसान तो लजीज खानों का मजा ले रहे हैं, लेकिन मुझ बेजुबान जानवर को सुबह से भूखा रखा हुआ है। और शायद यह बुरा लगा कि एक गरीब मुल्क के अमीर नेता कैसे शाही शादियों पर बेशुमार दौलत खर्च करके गरीबों के नमक पर छिड़क रहे हैं। शायद यह बुरा लगा हो कि 'सरकार' भी इन्हीं नेताओं की जी-हजूरी में लगी हुई है। तभी तो जैसे ही एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की गाड़ी हूटर बजाती हुई शादी स्थल पर आई, हाथी के सब्र का बांध टूट गया। हाथी ऐसा बिफरा की उसने उत्पात मचाना शुरु कर दिया। कई दर्जन आलीशान गाड़ियों को अपने पैरों तले कुचल डाला। सूंड से उठाकर गाड़ियों को सड़क पर पटक दिया। चारों ओर अफरा तफरी मच गई। हाथी शायद मानवतावादी था, इसलिए उसने इंसानों को नुकसान नहीं पहुंचाया। हाथी अगले दिन तक काबू में नहीं आया। दिल्ली और लखनऊ से हाथी को काबू में करने के लिए विशेषज्ञ बुलाए गए, तब कहीं जाकर हाथी के उत्पात को रोका जा सका।

हादसे के बाद जिस तरह की शर्मनाक बातें हुईं, उन्हें सुन और देखकर पक्का यकीन हुआ कि नेताओं का नैतिक पतन ही नहीं हुआ है, बल्कि वे मुंह तक 'कीचड़' में धंस चुके हैं। इस कीचड़ में कादिर राणा और मुनकाद अली जैसे नेता इतने लिथड़ चुके हैं कि उनका चेहरा ही पहचान में नहीं आता। दावा वे आम आदमी की सेवा का करते हैं, लेकिन उनके चेहरों के पीछे सामंती चेहरा छिपा है। मुनकाद अली ने फरमाया कि 'मैंने तो हाथी को पागल नहीं किया है, जो इसके लिए मैं ज़िम्मेदारी लूं।' यह ठीक है मुनकाद ने हाथी को पागल नहीं किया, लेकिन उनसे यह सवाल तो किया ही जा सकता है कि किस 'पागल' ने उनको हाथियों की नुमाईश लगाने की सलाह दी थी? हाथियों को लाकर शादी की कौनसी रस्म अदा की जा रही थी? अब क्योंकि मामला सत्तरूढ़ पार्टी के नेताओं का था, इसलिए मुनकाद अली को शासन-प्रशासन ने भी कुछ नहीं कहा। यहां भी केवल हाथी के मालिक को ही पकड़कर जेल भेज दिया गया। थाने में जो एफआईआर लिखाई गई है, उसमें इस बात का जिक्र नहीं है कि हाथी वहां क्यों आया था? किसने बुलाया था ? यहां भी गरीब मार ही पड़ी। यह उस सरकार की हरकतें हैं, जो अपने आप को 'दलित' की सरकार कहती है। 'दलित' सरकार के नेताओं ने सामंतों को भी पीछे छोड़ दिया है। सच तो यह है कि मेरठ में 24 और 25 फरवरी को जो कुछ हुआ, वह एक भूखे हाथी का तांडव नहीं, सत्ता के मद में चूर 'हाथी' का तांडव था। एक भूखे हाथी के तांडव से पूरा शासन-प्रशासन कांप गया था, लेकिन उस दिन को याद करिए, जब देश का 'भूखी जनता' रुपी हाथी तांडव मचाने निकलेगा। तब इन 'सामंती' नेताओं को उस 'हाथी' से कौन बचाएगा?

गिरगिट
होली हम भी मनाते हैं,
और हमारे रहनुमा भी मनाते हैं।
लेकिन दोनों के होली में फर्क है,
जिसके लिए प्रस्तुत यह तर्क है।।

सब जानते हैं कि
होली रंगों का त्योहार है।
एक दूसरे के चेहरे पर,
रंग लगाने का व्यवहार है।।

रंगों में असली चेहरा,
कुछ देर के लिए छुप जाता है।
पर अफसोस, ऐसा दिन हमारे लिए,
साल में बस एकबार ही आता है।।

लेकिन हमारे रहनुमा,
पूरे साल होली मनाते हैं।
बिना रंग लगाये, सिर्फ रंग बदलकर
अपना असली चेहरा छुपाते हैं।।

देखकर इन रहनुमाओं की,
रंग बदलने की रफ्तार।
गिरगिटों में छायी बेकारी,
और वे करने लगे आत्महत्या लगातार।।
-श्यामल सुमन

स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. उपराष्ट्रपति मो. हामिद अंसारी ने रंगों के त्यौहार होली के शुभ अवसर पर देश के लोगों को बधाई दी है। उन्होंने अपने संदेश में कहा है कि होली के रंग लोगों को प्रफुल्लित करने समाज के ढांचे को मजबूत करने और त्यौहार को मनाने के लिए लोगों में एकता लाने में सहायक हैं।

उन्होंने अपने संदेश में कहा कि रंगों के त्यौहार होली के शुभ अवसर पर अपने देश के लोगों को मेरी बधाई और शुभकामनाएं। होली विभिन्नता में एकता कि हमारी परंपरा की याद दिलाती है और बसंत ऋतु के आगमन की जिज्ञासा के साथ पूरे देश में मनाई जाती है। होली के रंग लोगों को प्रफुल्लित करने समाज के ढाचे को मजबूत करने और त्यौहार को मनाने के लिए लोगों में एकता लाने में सहायक हैं। यह त्यौहार हमारे जीवन को खुशियों और शान्ति से भर दे।

सरफ़राज़ ख़ान
हिसार (हरियाणा). राज्य कृषि विभाग के वित्तायुक्त एवं मुख्य सचिव रोशन लाल ने प्रदेश में कृषि के विकास के लिए चौधरी चरण सिंह हरियाणा हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से कृषि क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप नए अनुसंधान प्रस्ताव तैयार करने को कहा है।

उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा देश के कृषि विकास के लिए चलाई गई राष्ट्रीय कृषि मिशन, राष्ट्रीय बागवानी मिशन आदि योजनाओं में हरियाणा को आगामी वित्त वर्ष में ज्यादा  अनुदान मिलने की संभावना है। इसलिए उन्हें कृषि शोध को गति देने के लिए जल्द नए अनुसंधान प्रस्ताव सरकार को सौंपने चाहिएं।

रोशन लाल आज यहां हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में कृषि अधिकारी कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। आगामी खरीफ मौसम की फसलों के लिए सिफारिशें तय करने के लिए आयोजित इस दो दिवसीय कार्यशाला में प्रदेश कृषि विभाग के अधिकारी तथा ह.कृ.वि. के वैज्ञानिक हिस्सा ले रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र का विकास सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। यह राय सरकार की योजनाओं तथा नीतियों का परिणाम है कि गत वर्ष प्रदेश में कम वर्षा होने के बावजूद यहां धान का तीन लाख टन यादा उत्पादन हुआ है जिसकी केन्द्र सरकार ने भी सराहना की है। उन्होंने कहा इस वर्ष सभी प्रमुख खरीफ फसलों के उत्पादन लक्ष्य में वृध्दि की गई है। उन्होंने कहा कि कपास में 25 लाख बेल, बाजरा में डेढ़ लाख टन, धान में तीन लाख टन यादा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने इसे चुनौती बताते हुए कहा कि कृषि अधिकारियों तथा वैज्ञानिकों को इसके लिए सघन प्रयास करने होंगे।

उन्होंने नए अनुसंधानों को सभी किसानों तक पहुंचाए जाने पर जोर दिया। एक सर्वेक्षण रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश में विस्तार कार्र्यकत्ता केवल 40 प्रतिशत किसानों तक ही पहुंच पाए हैं। उन्होंने कहा नए अनुसंधानों का कोई अर्थ नहीं यदि उनका लाभ सभी किसानों तक नहीं पहुंचता है। उन्होंने प्रदेश में गन्ने की खेती को बढ़ाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा गन्ने के तहत क्षेत्र 1.40 लाख हैक्टेयर से घटकर करीब आधा रह गया है। उन्होंने तिलहनों तथा दलहनों का प्रदेश में उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों को सिंचित क्षेत्रों के लिए इनकी उपयुक्त किस्में विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कृषि में सिंचाई जल की बचत के लिए टपका सिंचाई विधि तथा कृषि उत्पादों के नुकसान को कम करने के लिए पोस्ट हार्वेस्ट तकनालोजी पर जोर दिया।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. के.एस. खोखर जो इस अवसर पर मुख्य अतिथि थे, ने संबोधित करते हुए कृषि अनुसंधान में पूंजीनिवेश को बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा अनुसंधान में किए गए निवेश का लागत व लाभ अनुपात बहुत अधिक प्राप्त होता है। उन्होंने प्रदेश द्वारा खाद्यान्नों में अर्जित की गई उपलब्धि के लिए कृषि विशेषज्ञों को बधाई दी। उन्होंने कहा सरकार को उनसे बहुत उम्मीद है इसलिए उन्हें इस दिशा में सदा प्रयत्नशील रहना चाहिए। उन्होंने कृषि में शोध को गति देने के लिए सरकार से विश्वविद्यालय के लिए और यादा आर्थिक व मानव संसाधन जुटाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सेवानिवृतियों तथा भर्तियों पर लगे प्रतिबंध्द के चलते विश्वविद्यालय में अनुसंधान कार्यक्रमों में गतिरोध पैदा हो गया है। उन्होंने कहा सरकार को कम से कम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् की परियोजनाओं में वैज्ञानिकों की रिक्तियां भरने की अवश्य अनुमति दे देनी चाहिए क्योंकि इससे सरकार पर आर्थिक बोझ नहीं बढ़ेगा।

कुलपति ने कृषि में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता जताई और जल व उर्वरकों की उपयोग क्षमता बढ़ाने के लिए कारगर कदम उठाने को कहा। उन्होंने कहा इसके लिए किसानों को इज़राईल की तर्ज पर खेती प्रणाली में बदलाव करने होंगे।

प्रदेश कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. बी.एस. दुग्गल ने कहा कि सरकार द्वारा खरीफ फसलों के निर्धारित किए गए लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि विभाग के पास खरीफ फसलों का करीब ढाई हज़ार टन बीज उपलब्ध है। उन्होंने कहा फसलों की पैदावार बढ़ाने के साथ-साथ सिंचाई जल की बचत के भी प्रयास किए जाएंगे।

इस अवसर पर हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. आर.पी. नरवाल ने गत वर्ष खरीफ फसलों पर किए गए अनुसंधान का ब्यौरा प्रस्तुत किया। उन्होंने ग्वार, बाजरा, कपास आदि की विश्वविद्यालय में हाल ही में विकसित की गई नई किस्मों के गुणों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन किस्मों को प्रदेश में बिजाई के लिए जारी कर दिया गया है। उन्होंने ह.कृ.वि. में विभिन्न खरीफ फसलों के गत वर्ष उत्पादित बीज की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खरीफ फसलों का 80 क्विंटल न्यूक्लियस तथा 287 क्विंटल प्रजनक बीज के अतिरिक्त गन्ने की विभिन्न किस्मों का 6340 क्विंटल प्रजनक बीज तैयार किया गया है।

इससे पूर्व विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. एच.डी. यादव ने किसानों के लिए चलाए जा रहे विभिन्न विस्तार शिक्षा कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा हमारी कौशिश फसलों की पैदावार के अंतर को कम करने की है। कार्यक्रम को कृषि कालेज के डीन डॉ. एस.एस. पाहुजा तथा डॉ. जे.एस. धनखड़ ने भी संबोधित किया। इस कार्यशाला में आगामी खरीफ मौसम के लिए कृषि की सिफारिशें तय करने से पूर्व प्रदेश में खरीफ फसलों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा होगी।

अतुल मिश्र
इधर, जैसे-जैसे होली क़रीब आ रही थी, हमने खुद को समेटना शुरू कर दिया था. अब एक दिन शेष है रंग पड़ने के लिए और हमने अभी से 'रंगों के दुष्प्रभाव' पर रखे उस अखबारी लेख की कटिंग के मैटर का रियाज़ करना शुरू कर दिया, जिसे लेखक ने समाज में जागरूकता पूर्ण क्रान्ति लाने के लिहाज़ से लिखा था. हमने अपना जो मूड है, वो शीशे में ऐसा करके भी देख लिया कि अगर कोई रंग लगाने आ ही गया तो हमें किस तरह उस सत्यवादी अखब़ार के हवाले से समझाना है कि रंग लगाना कितना ख़तरनाक है और होली होने के बावज़ूद हम इसे लगाने से क्यों इनकार कर रहे हैं?

होली पर हम यह भी नहीं चाहते कि अगर बाहर निकलें तो वे लोग, जो नमस्ते करने में भी इधर-उधर मुंह छिपा लिया करते हैं, वे आज दारू पीकर हमारे पैरों पड़ें और 'अंकल' कह कर हमसे आशीर्वाद मांगें और बाद में यह भी उस घिसे हुए पुराने रिकार्ड की तरह दोहरायें कि हमसे कोई ग़लती हो गई हो तो माफ़ कर दें. अब जैसे वर्मा जी हैं. हर साल आते हैं रंग लगाने. कोई इस किस्म का रंग लगा जाते हैं कि हमें ठंड के बावज़ूद पत्थर से रगड़-रगड़ कर नहाना पड़ता है. इसके अलावा, वे अपनी पूरी शक्ति का प्रदर्शन हमसे गले मिलते वक़्त कर देते हैं कि अगर पड़ोसी होने के नाते कभी झगड़ा होने की नौबत आये तो हम उनकी खानदानी शफाखाने जैसी ताक़त का स्मरण कर लें.

होली पर हम यह भी पसंद नहीं करते कि लोगबाग खुद तो अकेले होली मिलने आएं और हमसे पूछें कि "भाभी जी नहीं दिखाई दे रहीं?" हम नहीं चाहते कि हम भी ग़ैर औरतों से अपने हिसाब से होली खेलें. फिर यह कैसे अच्छा लगेगा कि कोई हमारी बीवी के न दिखाई देने पर कोई सवाल करे कि वह क्यों नहीं दिखाई दे रही हैं? कई लोग, जो भांग पीकर गुजियां खाने के शौक़ीन होते हैं. वे पेट-संभव जितनी खा सकते हैं, उतनी तो खा ही लेते हैं, बाकी जेबों में रखकर ले जाते हैं कि अपनी बीवी को बताएंगे कि भाभी के हाथ की गुजियां कितनी अच्छी हैं, देखो.

हमने घर पर यह निर्देश भी दे रखे हैं कि कोई हमें पूछने आये तो कौन-कौन से बहाने करने हैं? मसलन, कहीं बाहर गए हैं या इतनी ज़्यादा हालत खराब है कि आपके आने की सूचना भी अगर दे दी तो हो सकता है, हालत और भी बिगड़ जाए या काफी देर पहले आपके घर की तरफ ही गए थे, बहुत देर से लौटे ही नहीं हैं. हमने बच्चों को यह भी समझा रखा है कि अंतिम वाले बहाने का इस्तेमाल सबसे पहले करना. जो लोग हमारी आदतों से वाक़िफ हैं, वे फ़ौरन अपने घरों की तरफ भागेंगे कि यार, इस बन्दे ने किसी किस्म की होली न खेल ली हो हमारे घर पर. क्या करें, दुनिया ऐसी ही है, दोस्त.

चांदनी
होली के अवसर पर प्राकृतिक हर्बल रंगों का ही इस्तेमाल करें अन्यथा आप इनसे गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को दावत दे सकते हैं। एक अन्य तरीका चंदन का टीका इस्तेमाल करने का है। पर्व का गहराई से मतलब अपने अंदर की गंद को हटाना है और लोगों के बीच प्यार फैलाना है। रासायनिक रंग, भांग और शराब का अंधाधुंध सेवन इन सब से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

एम्स की एक रिपोर्ट में दिखाया जा चुका है कि हरा/नीले से जुड़े हरे रंगों का संबंध ऑक्युलर टॉक्सिसिटी से है। अधिकतर 'प्लेजिंग टू आई' रंग बाजार में मौजूद हैं जो टॉक्सिक होते हैं ओर इनकी वजह से गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। मैलाशाइट ग्रीन का इस्तेमाल होली में बहुत होता है और इसकी वजह से आंखों में गंभीर खुजलाहट की समस्या के साथ ही एपिथीलियल को नुकसान होता है, इसलिए इसे कॉर्नियाल के आसपास नहीं लगाना चाहिए।

इनके अलावा सस्ते रसायन जैसे सीसा, एसिड, एल्कलीज, कांच के टुकड़े से न सिर्फ त्वचा संबंधी समस्या होती है, बल्कि एब्रेषन, खुजलाहट या झुंझलाहट के साथ ही दृष्टि असंतुलित हो जाती है और सांस संबंधी समस्या व कैंसर का भी खतरा रहता है। एल्कलीन वाले रंगों से जो जख्म होने की समस्या होते हैं वे किस तरह और कैसे संपर्क में आते हैं, उसके हिसाब से ही गंभीरता को तय करते हैं।

व्यापक तौर पर बाजार में रंगों की तीन श्रेणियां हैं- पेस्ट, ड्राई पाउडर और पानी वाले रंग। समस्या तब बढ़ती जाती है जब इनको तेल के साथ मिलाकर त्वचा पर इस्तेमाल किया जाता है। ज्यादातर इनऑर्गेनिक ड्राई कलर या गुलाल में दो तत्व होते हैं- एक कलरेंट जो टॉक्सिक हो सकता है और दूसरा एस्बेसटस या सिलिका होता है. दोनों से ही स्वास्थ्य संबंधी खतरे होते हैं। सिलिका से त्वचा पर असर होता है, जबकि एस्बेसटस को मानव कार्सिनोजेन के तौर पर जाना जाता है जिससे कैंसर हो सकता है। हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल भी लोगों को प्राकृतिक हर्बल रंगों का ही इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं.

कल सहर पे, यक़ीं उठ गया
हर पहर पे, यक़ीं उठ गया

हर सुबह हम, मरे इस कदर
दोपहर पे, यक़ीं उठ गया

वो डगर तेरे घर की ही थी
जिस डगर पे, यक़ीं उठ गया

जो ना तट से मिली आज तक
उस लहर पे, यक़ीं उठ गया

ऐसे धोखे मिले, उम्र भर
हमसफ़र पे, यक़ीं उठ गया

जब तहद में चली शायरी
तो बहर पे, यक़ीं उठ गया

आदमी का ज़हर देखकर
अब ज़हर पे, यक़ीं उठ गया

हम रहे बेखबर, इसलिए
कल ख़बर पे, यक़ीं उठ गया

राम-अल्लाह, जब लड़ पड़े
इस शहर पे, यक़ीं उठ गया
-अतुल मिश्र

स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. उपराष्ट्रपति मो. हामिद अंसारी और प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने आज काबुल में हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है. इस हमले में भारतीय नागरिकों सहित अनेक लोग मारे गये और घायल हुए हैं.

उन्होंने हमले में घायल और मारे गये भारतीय नागरिकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की है. उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनकी सेवाओं के मूल्य और राष्ट्र के लिए उनके योगदान से पूरा राष्ट्र उनकी मौत पर दुखी है. उन्होंने कहा कि आतंकवाद जो मानवता को आतंकित करने के लिए एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. साथ ही उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष को जारी रखने के राष्ट्रीय संकल्प को दोहराया.

प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने काबुल में हुए बम धमाके की निंदा करते हुए कहा कि "मैं काबुल में बम हमले में भारतीय नागरिकों के जीवन की क्षति पर गहरा दुख ब्यक्त करता हूं जिसमें अनेक निर्दोष अफगान नागरिकों के जीवन की क्षति हुई है. मैं इस क्रूरतम और विबेक हीन हिंसा के कार्य की कड़ी निन्दा करता हूं जिसमें सभ्य समाज के सभी स्तरों को दुखी किया है. मैं उन भारतीयों जो शान्तिपूर्ण और प्रजातांत्रिक अफगानिस्तान के निर्माण में मित्रता और शुभेच्छा से कार्य कर रहे थे उनके जीवन की क्षति पर हमें दुख है जिनकी मित्रता की अफगानिस्तान को जरूरत थी. मैं उनके परिवारों और प्रिय के लिए हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूं और इस दख की घड़ी में उनके साथ हूं तथा उनकी संभावित सहायता का आश्वासन देता हूं.

स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. ईद मिलाद-उन-नबी पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं.
राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा, "पैगम्बर मोहम्मद के मानवता, शांति और सद्भाव के संदेश हमें प्रेरित करें और विश्व बंधुत्व की राह पर ले जाने का रास्ता दिखाएं। इस अवसर पर मैं अपने सभी नागरिकों को शुभकामनाएं देती हूं।"

उपराष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा, "पैगम्बर मोहम्मद साहब ने मानवता को करूणा, सहिष्णुता, प्रेम, भाईचारे और सदाचार की राह दिखाई। उनके संदेश में मानव को अज्ञान हिंसा और नैतिक पतन से उठकर शांति, नैतिकता और आध्यात्मिकता की ओर ले जाने की शक्ति है। उनके संदेश की रोशनी हम सब को एकता के सूत्र में बांधने और शांति तथा समन्वय के पथ पर चलने में हमारा मार्गदर्शन करेगी।"
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा, "पैगम्बर साहब के उपदेश हमें वैश्विक शांति और भाईचारे के लिए काम करने की प्रेरणा देते हैं।"

स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने आज लोक सभा में वर्ष 2010-11 का आम बजट पेश करते हुए पेट्रोल और डीजल पर केन्द्रीय उत्पाद शुल्क में 1-1 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी का प्रस्ताव किया। उन्होंने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोल की कीमतों में होने वाली अनियमित घट-बढ़ के चलते सरकार ने जून, 2008 में कच्चे पेट्रोलियम को बुनियादी सीमा शुल्कों से पूरी छूट दी और परिष्कृत उत्पादों पर बुनियादी शुल्क में आनुपातिक कटौती की थी।

उन्होंने कहा कि राजकोषीय समेकन के पथ पर फिर से अग्रसर होने की जबर्दस्त जरूरत को देखते हुए कच्चे पेट्रोलियम पर 5 प्रतिशत, डीजल और पेट्रोल पर 7.5 प्रतिशत तथा अन्य परिष्कृत उत्पादों पर 10 प्रतिशत के बुनियादी सीमा शुल्क को बहाल करने का प्रस्ताव करता हूं।

स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. लोक सभा में आज वर्ष 2010-11 का आम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने केन्द्रीय उत्पाद शुल्कों में कटौती दर आंशिक रूप से वापस लेने तथा गैर पेट्रोलियम उत्पादों पर मानक दर बढ़ाकर यथामूल्य 8 प्रतिशत से 10 प्रतिशत करने की घोषणा की है।

वित्त मंत्री ने कहा कि अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत अब और अधिक व्यापक और स्पष्ट हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दिए गए लगातार तीन राजकोषीय प्रोत्साहन पैकेजों से सुधार की प्रक्रिया को काफी मदद मिली है। मुखर्जी ने कहा कि आर्थिक निष्पादन में हुई बेहतरी तब भी राजकोषीय सुधार को प्रोत्साहित करती है, जब वैश्विक स्थिति सावधानी बरतने की मांग करती है। उन्होंने कहा कि पोर्टलैंड सीमेंट और क्लिंकर सीमेंट पर प्रयोज्य शुल्क की विशिष्ट दरें भी आनुपातिक रूप से समायोजित की जा रही हैं और अधिक रखी जा रही हैं। इसी तरह बड़ी कारों, बहु-उपयोगी वाहनों तथा खेल में प्रयुक्त वाहनों पर उत्पाद शुल्क का यथामूल्य घटक, जो प्रथम प्रोत्साहन पैकेज के भाग के रूप में घटाया गया था, में 2 प्रतिशतांक की बढोतरी करके 22 प्रतिशत किया जा रहा है।

स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. लोक सभा में आज वर्ष 2010-11 का आम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने भारतीय अनन्य पहचान प्राधिकरण के लिए 1900 करोड़ रुपए का आबंटन किया। उन्होंने कहा कि पिछले बजट के दौरान भारतीय अनन्य पहचान प्राधिकरण के गठन और इसके व्यापक कार्यकरण सिध्दान्तों एवं पहली अनन्य पहचान संख्याओं के प्रदाय समय-सीमा की घोषणा की गई थी। वित्त मंत्री ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्राधिकरण का गठन कर लिया गया है और यह आगामी वर्ष में पहली अनन्य पहचान संख्याएं जारी करने की अपनी वचनबध्दताएं पूरी करने में समर्थ होगा। उन्होंने कहा कि यह वित्तीय समावेशन और लक्षित सब्सिडी भुगतानों के लिए प्रभावी मंच भी प्रदान करेगा।

वित्त मंत्री ने सदन को बताया कि आईटी परियोजनाओं जैसे कर सूचना नेटवर्क, नई पेंशन योजना, राष्ट्रीय राजकोष प्रबंधन एजेंसी, व्यय सूचना नेटवर्क, वस्तु एवं सेवाकर विभिन्न चरणों में चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावी कर प्रशासन और वित्तीय अभिशासन प्रणाली के लिए ऐसी आईटी परियोजनाओं के सृजन की आवश्यकता है, जो विश्वसनीय, सुरक्षित और सक्षम हो। उन्होंने बताया कि विभिन्न प्रौद्योगिकीय और प्रणाली विषयक मामलों की जांच के लिए नन्दन निलेकानी की अध्यक्षता में एक अनन्य परियोजना प्रौद्योगिकी सलाहकार समूह की स्थापना की जाएगी।

फ़िरदौस ख़ान
नई दिल्ली. वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने आज लोकसभा में आम बजट 2010-11 पेश कर दिया. इस बजट में सरकार के समक्ष आने वाली चुनौतियां, प्रमुख क्षेत्रों को किए गए आंवटन और मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं-

  • यथाशीघ्र विकासपथ पर वापस आकर सकल घरेलू उत्पाद को 9 प्रतिशत करना और तब दहाई अंक विकास बाधा को पार करने के लिए साधनों का पता लगाना।

  • अधिकाधिक समावेशी विकास के लिए हालिया उपलब्धियों को समेकित करने के लिए आर्थिक विकास बढ़ाना।

  • अभिशासन के विभिन्न स्तरों पर सरकारी तंत्रों, ढांचाओं और संस्थाओं में कमजोरियों का समाधान करना।

  • भारत विश्व के प्रथम देशों में एक है जो वैश्विक अवमंदन के नकरात्मक निक्षेप का सामना करने के लिए व्यापक आधारित प्रति चक्रीय नीतिगत पैकेज का क्रियान्वयन कर रहा है।

  • दिसंबर, 2009 में विनिर्माण क्षेत्र में वृध्दिदर 18.5 प्रतिशत, यह विगत दो वर्षों में सबसे अधिक है।

  • 2009-10 की दूसरी छमाही के दौरान मुख्य चिंता दो-अंकीय मुद्रास्फीति का प्रादुर्भाव रहा है। सरकार ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ मंत्रणा करके आदेशात्मक कदम उठाए हैं जिससे आगामी कुछ महीनों में मुद्रास्फीति कम होनी चाहिए और साथ ही देश में खाद्य सुरक्षा का बेहतर प्रबंधन भी सुनिश्चित होना चाहिए।

  • तेरहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर राजकोषीय नीति बनाई गई है जिसने विगत दो वर्षों की विस्तारकारी राजकोषीय स्थिति से अंशांकित निकास कार्यनीति की सिफारिश की है।

  • यह पहली बार होगा कि सरकार अपनी घरेलू सकरारी ऋण स.घ.उ अनुपात में सुस्पष्ट कटौती का लक्ष्य रखेगी।

  • सरकार एक अप्रैल, 2011 से प्रत्यक्ष कर संहिता को लागू करने की स्थित में होंगी और वस्तु एवं सेवा कर अप्रैल, 2011 में लागू करने का प्रयास किया जाएगा।

  • आयल इंडिया लिमिटेड, एनएचपीसी, एनटीपीसी, और ग्रामीण विद्युतीकरण निगम में स्वामित्व को व्यापक आधार प्रदान किया गया है, जबकि राष्ट्रीय खनिज विकास निगम और सतलुज जल विद्युत निगम में यह प्रक्रिया चल रही है। यह मौजूदा वर्ष में 25000 करोड़ रुपये जुटाएगी, जबकि 2010-11 के दौरान इससे अधिक राशि जुटाने का प्रस्ताव है।

  • सरकार द्वारा उर्वरक क्षेत्र के लिए एक पोषण आधारित सब्सिडी नीति मंजूर की है और यह 1 अप्रैल, 2010 से प्रभावी होगी।

  • पेट्रोलियम उत्पादों के मूल्य निर्धारण की व्यवहार्यपरक एवं टिकाऊ प्रणाली के लिए विशेषज्ञ समूह द्वारा की गई सिफारिशों को यथा समय लागू किया जाएगा।

  • एफडीआई व्यवस्था को सरल बनाने के लिए भारतीय कंपनियों में अप्रत्यक्ष विदेशी निवेश के आकलन की पध्दति स्पष्ट तौर पर परिभाषित की गयी है तथा मूल्य निर्धारण और प्रौद्योगिकी अंतरण शुल्क तथा ट्रेडमार्क, ब्रांड नेम का भुगतान एवं रॉयल्टी भुगतानों को पूर्णत: उदार बनाया गया है।

  • सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों को 165,000 करोड़ रूपये की राशि उपलब्ध कराई जा रही है ताकि वे 31 मार्च, 2011 तक न्यूनतम 8 प्रतिशत टियर- कैपिटल प्राप्त कर सकें।

  • निर्यात पर 2 प्रतिशत की मौजूदा ब्याज आर्थिक सहायता को एक वर्ष और बढाया जा रहा है जिसमें हस्तशिल्प, कालीन, हथकरघा और लघु एवं मध्यम उद्यम शामिल हैं।

  • देश के पूर्वी क्षेत्रों, जिसमें बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल तथा उड़ीसा शामिल हैं, में हरित क्रांति के लिए 400 करोड़ रूपये उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

  • बैंकों से किसानों के लिए ऋण वर्ष 2010-11 के लिए 3,75,000 करोड़ रूपए निर्धारित किया गया है।

  • किसानों द्वारा लिए गए ऋण की अदायगी राज्यों में हाल के सूखे एवं भयंकर बाढ़ के मद्देनजर किसानों के लिए ऋण माफी एवं ऋण राहत योजना 31दिसंबर, 2009 से 30 जून, 2010 तक छह माह के लिए बढ़ाई गई है।

  • आधारभूत संरचना के विकास के लिए 1,73,552 करोड़ रुपये मुहैया कराए गए, जो कुल आयोजना आबंटनों का 46 प्रतिशत से अधिक है।

  • सड़क परिवहन के लिए आबंटन 13 प्रतिशत बढ़ाकर 17,520 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 19,894 करोड़ रूपए कर दिया गया है।

  • रेलवे के लिए 16,752 करोड़ रुपये की व्यवस्था, यह पिछले वर्ष की तुलना में 950 करोड़ रुपये अधिक है।

  • राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के सिवाय, विद्युत क्षेत्र के लिए आयोजना आबंटन 2009-10 में किए गए 2230 करोड़ रुपये से दोगुणा करके 2010-11में 5,310 करोड़ रुपये किया गया है।

  • नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के लिए आयोजना परिव्यव 2009-10 में किए गए 620 करोड़ रुपये से 61 प्रतिशत बढ़ाकर 2010-11 में 1,000 करोड़ रुपये किया गया है।

  • स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान और नवोन्मेष परियोजनाओं के निधि पोषण हेतु राष्ट्रीय स्वच्छता ऊर्जा निधि की स्थापना।

  • राष्ट्रीय गंगा नदी थाला प्राधिकरण के लिए आबंटन 2010-11 में दोगुणा कर 500 करोड़ रुपये करना।

  • सामाजिक क्षेत्र पर खर्च कुल आयोजना व्यय क्रमिक रूप से बढ़ाकर 1,37,674 करोड़ रूपए करना, जो 2010-11 में कुल आयोजना परिव्यव का 37 प्रतिशत है।

  • स्कूली शिक्षा के लिए आयोजना आवंटन 2009-10 में 26,800 करोड़ रुपये से 16 प्रतिशत बढ़ाकर 2010-11 में 31,036 करोड़ रुपये करना।

  • स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय हेतु आयोजना आवंटन 2009-10 में 19,534 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2010-11 में 22,300 करोड़ रुपये करना।

  • 2000 से अधिक की जनसंख्या वाली बस्तियों में मार्च, 2012 तक समुचित बैंकिंग सुविधाएं प्रदान करना।

  • ग्रामीण विकास के लिए 66,100 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं।

  • महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का आवंटन बढ़ाकर 2010-11 में 40,100 करोड़ रुपये करना।

  • भारत निर्माण के तहत ग्रामीण अवसंरचना कार्यक्रम के लिए 48,000 करोड़ रुपये आबंटित।

  • पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि का आवंटन 2009-10 के 5,800 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2010-11 में बढाक़र 7,300 करोड़ रुपये करना।

  • बुंदेलखंड क्षेत्र में सूखे से निपटने के लिए 1200 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि मुहैया कराना।

  • शहरी विकास के लिए आवंटन 75 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी करके इसे 2009-10 के 3060 करोड़ रुपये से 2010-11 में 5400 करोड़ रूपए करना।

  • आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन के लिए आवंटन 850 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2010-11 में 1000 करोड़ रुपये करना।

  • राजीव आवास योजना के लिए पिछले वर्ष के 150 करोड़ रुपये के मुकाबले 1,270 करोड़ रुपये करना।

  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए 1,794 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2010-11 के लिए इसे 2400 करोड़ करना।

  • 1000 करोड़ रुपये के आरंभिक आवंटन के साथ बुनकरों, ताड़ी बनाने वालों, रिक्शाचालकों, बीड़ी बनाने वाले जैसे असंगठित क्षेत्रों के कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा निधि स्थापित की जाएगी।

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ मनरेगा के श्रमिकों को भी मिलेगा।

  • राष्ट्रीय दक्षता विकास निगम ने एक लाख प्रति वर्ष की दर से 10 लाख कुशल जनशक्ति के निर्माण के लिए 45 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन परियोजनाएं मंजूर की हैं।

  • महिला एवं बाल विकास के लिए आयोजना परिव्यय में लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी।

  • महिला साक्षरता दर में और सुधार के लिए 'साक्षर भारत' नामक कार्यक्रम आरंभ किया गया है।

  • अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय का आयोजना आवंटन वर्ष 2010-11 के लिए 50 प्रतिशत बढ़ाकर 1,740 करोड़ रुपये करना।

  • भारतीय अनन्य पहचान प्राधिकरण को 2010-11 के लिए 1900 करोड़ रुपये आवंटित।

  • रक्षा हेतु आंवटन बढ़ाकर 1,74,344 करोड़ रुपये करना जिसमें पूंजी व्यय के लिए 60,000 करोड़ रुपये भी शामिल है।

  • योजना आयोग द्वारा वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों में एक एकीकृत कार्य योजना तैयार करना।

  • सकल कर प्राप्तियां 7,44,651 करोड़ रुपये अनुमानित है।

  • कर राजस्व-भिन्न प्राप्तियां 1,48,118 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।

  • 2010-11 में केंद्र को प्राप्त निवल कर राजस्व के साथ साथ व्यय के प्रावधान को तेरहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर अनुमान लगाया गया है।

  • आयोजना तथा आयोजना भिन्न व्यव 2010-11 में क्रमश: 3,73,092 करोड़ रुपये और 7,35,657 करोड़ रुपये अनुमानित है। पिछले वर्ष के बजट अनुमान की तुलना में आयोजना व्यय में 15 प्रतिशत, जबकि आयोजना भिन्न व्यय में केवल 6 प्रतिशत की वृध्दि हुई है।

  • 2010-11 के लिए राजकोषीय घाटा स.घ.उ का 5.5 प्रतिशत है जो 3,81,408 करोड़ रुपये बैठता है।

  • राजकोषीय घाटे के लिए विभिन्न अन्य वित्तपोषण की मदों को देखते हुए 2010-11 में सरकार का वास्तविक निवल बाजार 3,45,010 करोड़ रूपए होगा। इससे निजी क्षेत्र को ऋण संबंधित जरूरतें पूरी करने के लिए पर्याप्त गुंजाइश होगी।

  • राजकोषीय घाटे के लिए भावी लक्ष्य 2010-11 और 2012-13 हेतु क्रमश: 4.8 प्रतिशत और 4.1 प्रतिशत हैं।

  • 2008-09 में 7.8 प्रतिशत राजकोषीय घाटा जिसमें तेल और उर्वरक शामिल हैं, के मुकाबले 2009-10 के संशोधित अनुमानों के अनुसार 6.9 प्रतिशत है।

  • तेल और उर्वरक कंपनियों को बांड जारी करने से बचने के लिए सचेत प्रयास किया गया है। सरकार सब्सिडी नकद में देने की यह परिपाटी जारी रखना चाहेगी जिससे सब्सिडी से संबंधित देनदारियां सरकार के वित्तीय लेखांकन के तहत आ जाएंगी।

  • घरेलू कंपनियों पर मौजूदा अधिभार 10 प्रतिशत से घटाकर 7.5 प्रतिशत करना।

  • न्यूनतम वैकल्पिक कर बही लाभों के लिए 15 प्रतिशत की वर्तमान दर से बढ़ाकर 18 प्रतिशत करना।

  • प्रत्यक्ष कर संबंधी प्रस्तावों से इस वर्ष 26,000 करोड़ रुपये की राजस्व हानि होने का अनुमान है।

  • केंद्रीय उत्पाद शुल्कों में कटौती दर आंशिक रूप से वापस ली जा रही है तथा सभी गैर पेट्रोलियम उत्पादों पर मानक दर बढ़ाकर यथामूल्य 8 प्रतिशत से 10 प्रतिशत की जा रही है।

  • रेफ्रीजेरेटिड वैन या ट्रकों के विनिर्माण के लिए अपेक्षित रेफरीजेरैशन यूनिटों को सीमा शुल्क से पूर्ण छूट देना।

  • भारत में निर्मित न किए गए निर्दिष्ट कृषि मशीनरी के लिए 5 प्रतिशत रियायती सीमा शुल्क प्रदान करना।

  • कृषि बीजों के परीक्षण एवं प्रमाणन को सेवा कर से छूट देना।

फ़िरदौस ख़ान
नयी दिल्ली. लोकसभा में आज पेश किए गए वर्ष 2010-11 के आम बजट में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने अर्थव्यवस्था की रफ़्तार तेज करने और आम आदमी को न्याय दिलाने के उद्देश्य से कई उपायों का प्रस्ताव किया। हर चुनौती से वाकिफ वित्त मंत्री ने बताया कि आज भारतीय अर्थव्यवस्था एक वर्ष पहले की स्थिति के मुकाबले बहुत बेहतर स्थिति में है। इसका अर्थ यह नहीं है कि आज चुनौतियां, नौ महीने पहले जब सोनिया गांधी के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार वापस सत्ता में आई थी और प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने दूसरी बार सरकार का गठन किया था, के मुकाबले कम हैं। वित्त मंत्री ने बताया कि हमारे सामने पहली चुनौती 9 प्रतिशत के उच्च सकल घरेलू उत्पाद के वृध्दि के रास्ते पर तेजी से लौटने और फिर दोहरे अंक के वृध्दि अवरोध को पार करने हेतु साधनों को पाने की है। इसके लिए विगत कुछ महीनों में देखी गई वृध्दि में प्रभावशाली सुधार को नई गति प्रदान करने की आवश्यकता है। दूसरी चुनौती विकास को अधिक समावेशी बनाने में हालिया उपलब्धियों के समेकन हेतु आर्थिक वृध्दि को सही ढंग से काम में लाने की है। ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास को और बढ़ाना होगा जिससे एक निश्चित समय सीमा में वांछित उद्देश्यों को हासिल किया जा सके। तीसरी चुनौती प्रशासन के विभिन्न स्तरों पर सरकारी प्रणलियों, संरचनाओं और संस्थाओं में कमजोरियों से संबंधित है। वास्तव, में आने वाले वर्षों में, यदि कोई कारक हमें एक आधुनिक राष्ट्र के रूप में हमारी क्षमता को साकार करने में बाधक हो सकता है तो वह हमारी सार्वजनिक वितरण प्रणालियों की अड़चन है। इस संबंध में विभिन्न क्षेत्रों में समय-समय पर अनेक पहल की गई हैं, लेकिन इस मोर्चे पर कामयाबी की संतुष्टि होने से पूर्व हमें बहुत कुछ करना बाकी है।

अपने बजट भाषण को जारी रखते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि एक जटिल अर्थव्यवस्था का प्रबंधन कठिन कार्य है, विशेषकर तब जब यह वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में एक विकासशील अर्थव्यवस्था है। वैश्विक मंदी के प्रभावों से सफलता पूर्वक उबरने के बाद, हमें विकास में पुन: आई तेजी को आगे बढ़ाने और मध्यावधि में इसे बनाये रखने हेतु देश के वृहत आर्थिक वातावरण को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि घरेलू मांग को बढ़ाने में वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज की सफलता का पता इसकी संरचना से लगाया जा सकता है। सरकार का दृष्टिकोण प्रत्यक्ष करों में कटौतियां करके और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम तथा ग्रामीण अवसंरचना जैसे कार्यक्रमों पर सरकारी व्यय बढाक़र लोगों के हाथों में खर्च योग्य आमदनी बढ़ाने का था। अब, जबकि स्थिति में सुधार होने लगा है, सरकारी खर्चों की समीक्षा करने, संसाधन जुटाने और उन्हें अर्थव्यवस्था की उत्पादकता बढ़ाने में लगाने की आवश्यकता है। इसी तरह राजकोषीय समेकन प्रक्रिया के भाग के रूप में यह पहली बार होगा कि सरकार घरेलू सरकारी ऋण-स.घ.उ. अनुपात में एक सुस्पष्ट कटौती का लक्ष्य तय करेगी।

कर सुधार के बारे में उन्होंने बताया कि प्रत्यक्ष कर संहिता के संबंध में हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जा चुका है। सरकार पहली अप्रैल 2011 से प्रत्यक्ष कर संहिता को लागू करने की स्थिति में होगी। वस्तु एवं सेवा कर के संबंध में उन्होंने कहा कि हम इसकी संरचना पर एक व्यापक सहमति बनाने में ध्यान केन्द्रित करते रहे हैं। नवंबर, 2009 में राज्यों के वित्त मंत्रियों की सशक्त समिति ने वस्तु एवं सेवा कर संबंधी पहला परिचर्चा पत्र आम जनता की जानकारी के लिए प्रस्तुत किया। 13वें वित्त आयोग ने वस्तु एवं सेवा कर के संबंध में अनेक महत्त्वपूर्ण सिफारिशें की हैं, जिनसे इस बारे में चल रहे विचार-विमर्शों में सहायता मिलेगी।

उर्वरक सब्सिडी के बारे में बताते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि उन्होंने 2009 के अपने बजट भाषण में उर्वरक सेक्टर के लिए सब्सिडी देने की घोषणा की थी। सरकार द्वारा तदन्तर, उर्वरक सेक्टर के लिए एक पोषण आधारित सब्सिडी नीति मंजूर की गई है और यह पहली अप्रैल 2010 से प्रभावी होगी। उन्होंने आशा जताई कि इस नीति से नए पुष्ट उत्पादों के जरिए संतुलित उर्वरक प्रयोग को प्रोत्साहन मिलेगा और इस नीति का फोकस उर्वरक उद्योग द्वारा विस्तार सेवाओं पर होगा।

उन्होंने बताया कि हमने पिछले वर्ष बजट दस्तावेजों के भाग के रूप में न केवल राजकोषीय रोड मैप का पालन किया बल्कि इसमें सुधार भी किए। वर्ष 2008-09 की देयताओं की पूर्ति करने के सिवाय हमने तेल अथवा उर्वरक बांड जारी नहीं किये।

उन्होंने विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के बारे में बताया कि इस वर्ष विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) अर्न्तप्रवाह वैश्विक पूंजी प्रवाहों में गिरावट के बावजूद सतत बना रहा। भारत में अप्रैल-दिसंबर, 2009 के दौरान 20.9 बिलियन अमरीकी डॉलर का एफडीआई इक्विटी अन्तर्प्रवाह प्राप्त हुआ, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान यह 21.1 बिलियन अमरीकी डॉलर प्राप्त हुआ था।

वर्ष 2008-09 के वित्तीय संकट से संपूर्ण विश्व में बैंकिंग तथा वित्तीय बाजारों की संरचना में मूलभूत अन्तर आया। वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के तंत्र को सुदृढ़ बनाने तथा सांस्थानिक रूप देने की दृष्टि से सरकार ने एक शीर्ष स्तरीय वित्तीय स्थायित्व और विकास परिषद स्थापना करने का निर्णय लिया है। बैंकिंग लाइसेंस के बारे में बताते हुए उन्होंने आगे कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक निजी क्षेत्र के भागीदारों को कुछ अतिरिक्त बैंकिंग लाइसेंस देने पर विचार कर रहा है। गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों पर भी विचार किया जा सकता है, बशर्ते वे भारतीय रिजर्व बैंक के पात्रता मानदंडों की पूर्ति करें।
वित्त मंत्री ने बताया कि देश में कारपोरेट गवर्नेंस तथा विनियम में सुधार, समग्र निवेश माहौल बनाने का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार ने संसद में कंपनी विधेयक 2009 प्रस्तुत किया है। यह मौजूदा कंपनी अधिनियम, 1956 का स्थान लेगा। यह प्रस्तावित नया विधेयक बदलते कारोबारी माहौल के परिप्रेक्ष्य में कारपोरेट क्षेत्र में विनियम से संबध्द मुद्दों का समाधान करेगा।

कृषि क्षेत्र हमारे संकल्प का केन्द्र बिन्दु है। इस क्षेत्र में विकास की गति बढ़ने के लिए सरकार का इरादा चतुर्थ स्तरीय कार्य योजना का अनुसरण करने का है जिसमें (क) कृषि उत्पादन (ख) उत्पाद की बर्बादी की कमी (ग) किसानों को त्रऽण सहायता और (घ) खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र पर जोर देना शामिल हैं।

उन्होंने आर्थिक विकास को बनाए रखने हेतु सड़कों, बंदरगाहों, हवाई अड्डों तथा रेलवे जैसे उच्च गुणवत्ता वाले वास्तविक आधारभूत संरचना के त्वरित विकास पर बल दिया। इसके लिए वर्ष 2010-11 के बजट में आधारभूत संरचना के विकास हेतु 1,73,552 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है जो कुल आयोजना आबंटन का 46 प्रतिशत से अधिक है।

विद्युत क्षेत्र में क्षमता वर्धन की उच्च प्राथमिकता को देखते हुए विद्युत क्षेत्र हेतु आयोजना आबंटन को 2009-10 में किए गए 22330 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2010-11 में 5130 करोड़ रुपये करते हुए दुगुने से अधिक कर दिया गया है। इसी प्रकार जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन में भारत को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी के रूप में स्थापित करने हेतु इस मिशन के तहत वर्ष 2022 तक 20000 मेगावाट के ऊर्जा उत्पादन का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय हेतु योजना परिव्यय को 61 प्रतिशत बढ़ाकर 2009-10 में किए गए 620 करोड़ रुपये से 2010-11 में 1000 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव किया गया है।

नकारात्मक पर्यावरणीय परिणामों तथा औद्योगिकरण और शहरीकरण से संबध्द वर्धित प्रदूषण स्तरों में सुधार करने के लिए उन्होंने बजट 2010-11 में अनेक सकारात्मक उपाय करने का प्रस्ताव भी रखा है जिसके तहत तिरूपुर, तमिलनाडु में स्थित टेक्सटाइल निटवेयर क्लस्टर उद्योग को बनाए रखने हेतु जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रणाली के स्थापन की लागत हेतु एकबारगी 200 करोड़ रुपये का अनुदान, राष्ट्रीय गंगा नदी थाला प्राधिकरण के लिए वर्ष 2010-11 में 500 करोड़ रुपये का अनुदान प्रस्ताव शामिल है।

समावेशी विकास

उन्होंने बताया कि विगम पांच वर्षों में, हमारी सरकार ने व्यक्ति के सूचना के अधिकार और अपने कार्य के अधिकार के लिए विधिक गारंटियों द्वारा समर्थित हकदारियों का सृजन किया है। इन वचनबध्दताओं को पूरा करने के लिए, सामाजिक क्षेत्र पर होने वाला व्यय क्रमिक रूप से बढाक़र 1,37,674 करोड़ रुपये किया गया है। यह 2010-11 में कुल आयोजना परिव्यय का 37 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि स्कूली शिक्षा के लिए वर्ष 2009-10 के 26,800 करोड़ रुपये के आयोजन आबंटन को बढ़ाकर वर्ष 2010-11 में 31,036 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव किया गया है। इसके अतिरिक्त राज्यों को वर्ष 2010-11 के लिए 13वें वित्त आयोग द्वारा अनुसंशित अनुदानों के तहत प्रारंभिक शिक्षा के लिए 3,675 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे। इसी तरह परिवार कल्याण मंत्रालय के लिए आयोजना आबंटन को 19,534 करोड़ रुपये से बढाक़र 2010-11 में 22,300 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव किया है। वित्त मंत्री ने आगे कहा कि सरकार के लिए ग्रामीण अवसरंचरा का विकास एक उच्च प्राथमिकता का क्षेत्र रहा है। अत: वर्ष 2010-11 के लिए उन्होंने ग्रामीण विकास हेतु 66,100 करोड़ रुपये के प्रावधान का प्रस्ताव किया है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2010-11 के लिए शहरी विकास हेतु पिछले वर्ष के 3,060 करोड़ रुपये के आबंटन में 75 प्रतिशत से अधिक की वृध्दि कर 5,400 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव किया गया है। इसी प्रकार राजीव आवास योजना के अंतर्गत वर्ष 2010-11 के लिए विगत वर्ष के 150 करोड़ रुपये की तुलना में 1,270 करोड़ रुपये के आबंटन का प्रस्ताव इस बजट में रखा गया है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र के लिए 2010-11 में 2400 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है। असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की आवश्यकताओं को देखते हुए असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए 1000 करोड़ रुपये के प्रारंभिक आबंटन के साथ एक राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा निधि की स्थापना का भी निर्णय लिया गया है। इसी प्रकार महिला और बाल विकास के लिए आयोजना परिव्यय में लगभग 50 प्रतिशत का बढोतरी का प्रस्ताव इस बजट में है तथा सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय का आयोजना परिव्यय बढाक़र 4500 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव भी इस बजट में रखा गया है।

वित्त मंत्री ने 2010-11 का बजट पेश करते हुए आय करदाताओं के वर्तमान स्लैबों में राहत का प्रस्ताव किया है। सदन में बजट पेश करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भी सभी करदाताओं की छूट सीमा बढाक़र और व्यक्तिगत आयकर पर अधिभार हटाकर व्यष्टि करदाताओं को राहत दी थी। उन्होंने कहा कि करदाताओं ने उचित कर देकर इन रियायतों के प्रति अपनी सकारात्मक प्रतिक्रिया भी दी है।

वित्त मंत्री ने वर्तमान कर स्लैबों को व्यापक करके और राहत देते हुए वर्ष 2010-11 के बजट में 1.6 लाख रुपये तक की आय वाले लोगों के लिए शून्य आयकर का प्रस्ताव किया है। 1.6 लाख रुपये से अधिक और 5 लाख रुपये तक की आय वाले व्यक्तियों के लिए कर की दर 10 प्रतिशत रखी गई है। 5 लाख रुपये से अधिक और 8 लाख रुपये तक की आय वाले लोगों को 20 प्रतिशत और 8 लाख रुपये से अधिक की आय वाले लोगों के लिए 30 प्रतिशत आयकर का प्रस्ताव किया गया है।

वित्त मंत्री ने कहा कि पारदर्शिता और सरकारी जवाबदेहिता के सुदृढीक़रण हेतु सरकारी संस्थाओं के कार्यकरण में पारदर्शिता और जवाबदेहिता को सुसाध्य बनाने वाले माहौल के सृजन हेतु गंभीर प्रयास किया गया है। इस संबंध में अनेक विधायी और प्रशासनिक उपाय किए गए हैं।

वित्त मंत्री ने कहा कि यह बजट आम आदमी का है। यह किसानों, कृषकों, उद्यमियों और निवेशकों का है। कुल मिलाकर यह बजट राष्ट्र के सामूहिक विवेक पर भरोसा करके तैयार किया गया है और इसमें प्रगतिशील गठबंधन सरकार की नीतियां और प्राथमिकताएं स्पष्ट दिखाई देती हैं।

स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने आज लोक सभा मे वर्ष 2010-11 का आम बजट पेश करते हुए वित्तीय क्षेत्र विधायी सुधार आयोग की स्थापना का प्रस्ताव किया। उन्होंने कहा कि वित्तीय क्षेत्र को विनियमित करने वाले हमारे अधिकांश विधान बहुत पुराने हैं।

उन्होंने कहा कि विभिन्न समय पर इन अधिनियमों में बड़ी संख्या में किए गए संशोधनों ने भी अस्पष्टता और जटिलता बढ़ाई है। सरकार इस क्षेत्र की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए वित्तीय क्षेत्र के कानूनों को दुबारा लिखने और स्पष्ट करने के लिए इस आयोग की स्थापना करेगी।

उन्होंने बताया कि प्रशासनिक सुधार आयोग का गठन यूपीए सरकार द्वारा अपने पहले कार्यकाल में किया गया था। इस आयोग ने 15 रिपोर्टें प्रस्तुत की है, जिनमें से 10 रिपोर्टों की जांच सरकार द्वारा की गई है। उन्होंने बताया कि अब तक कार्यान्वयन के लिए अभिज्ञात 800 सिफारिशों में से 350 का क्रियान्वयन किया जा चुका है और 450 कार्यान्वित की जा रही हैं।

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नई दिल्ली. वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने आज लोकसभा में वर्ष 2010-11 का आम बजट पेश करते हुए कहा कि देश के आर्थिक विकास को बनाए रखने हेतु सड़कों, बंदरगाहों, हवाई अड्डों तथा रेल जैसे उच्च गुणवत्ता वाली वास्तविक आधारभूत संरचना का तेजी से विकास बेहद जरूरी है। आधारभूत संरचना के विकास के लिए वित्त मंत्री ने 2010-11 के बजट में 1,73,552 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो कुल आयोजना आवंटन के 46 प्रतिशत से अधिक है। सड़क क्षेत्र में सुधार के लिए सरकार ने प्रतिदिन 20 किलोमीटर की गति से राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण का लक्ष्य रखा है। सड़क परिवहन हेतु 17,520 करोड़ रुपये के आवंटन को 13 प्रतिशत से अधिक बढ़ाकर वर्ष 2010-11 में 19,894 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है।

वित्त मंत्री ने बजट में रेल की सहायता हेतु 16,752 करोड़ रुपये के ऋण का प्रावधान किया है ताकि रेल नेटवर्क के आधुनिकीकरण एवं विस्तार की अपेक्षा को पूरा करने के लिए यह सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष रेल को मिलने वाली बजटीय सहायता में 950 करोड़ रुपये की वृध्दि की गई है। समर्पित माल गाड़ी गलियारे हेतु दिल्ली मुम्बई औद्योगिक मार्ग परियोजना एकीकृत क्षेत्रीय विकास के लिए शुरू की गई है। पारिस्थितिकी अनुकूल विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना वाले 6 औद्योगिक निवेश केन्द्रों के सृजन का प्रारंभिक कार्य पूरा कर लिया गया है ।

सरकार ने आधारभूत संरचना परियोजनाओं को दीर्घकालिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए भारतीय आधारभूत संरचना वित्त कंपनी लिमिटेड की स्थापना की है। इसका समवितरण मार्च, 2010 की समाप्ति तक 9,000 करोड़ रुपये तक और मार्च, 2011 तक लगभग 20,000 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। मौजूदा वर्ष के लिए आधारभूत क्षेत्र की परियोजनाओं को बैंक त्रऽण उपलब्ध कराने हेतु इस कंपनी ने 3,000 करोड़ रुपये का पुनर्वित्त पोषण किया, जो 2010-11 में दुगनी से अधिक होने की उम्मीद है। इस मद में आगामी तीन वर्षों में लगभग 25,000 करोड़ रुपये के वित्त पोषण की व्यवस्था होगी।

स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. सरकार ने विद्युत क्षेत्र में आयोजना आवंटन को दुगने से अधिक बढाक़र 5130 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव किया है। वर्ष 2009-10 की तुलना में आयोजना आवंटन में 2230 करोड़ रुपये की वृध्दि की गई है।

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने आज लोकसभा में वर्ष 2010-11 का आम बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार विद्युत क्षेत्र में क्षमता वर्ध्दन को उच्च प्राथमिकता देती है। इसके लिए मेगापावर पॉलिसी को संशोधित किया गया है और उसे राष्ट्रीय विद्युत नीति 2005 तथा टेरिफ नीति 2006 के अनुरूप बनाया गया है। इससे वितरण इकाइयों के जरिये उत्पादन लागत तथा खरीदी गई विद्युत की लागत कम करने में मदद मिलेगी। फिलहाल देश की 75 प्रतिशत बिजली कोयला आधारित है। कैप्टिव माइनिंग हेतु कोयला ब्लॉकों का आवंटन करने के लिए प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव है, जिससे इन ब्लॉकों में उत्पादन में पारदर्शिता और वर्ध्दित भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार कोयला क्षेत्र में एकसमान व्यवस्था बनाने के लिए 'कोयला विनियामक प्राधिकरण' की स्थापना के लिए कदम उठाना चाहती है, जिससे कोयले के किफायती मूल्य निर्धारण और निष्पादन मानक की बैंचमाकिर्गं जैसे मसलों का समाधान करने में आसानी होगी।

जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन में भारत को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस मिशन के तहत वर्ष 2022 तक 20,000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य है। वित्त मंत्री ने नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय हेतु योजना परिव्यय में 61 प्रतिशत वृध्दि का प्रस्ताव किया है। वर्ष 2009-10 में 620 करोड़ रुपये की तुलना में वर्ष 2010-11 में 1,000 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है।

जम्मू-कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र में ऊर्जा की कमी की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि यहां की जलवायु बहुत अधिक प्रतिकूल है। इस समस्या के समाधान के लिए वित्त मंत्री ने 500 करोड़ रुपये की लागत से सौर, लघु जल एवं अति लघु विद्युत परियोजनाओं की स्थापना करने का प्रस्ताव किया है।

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नई दिल्ली. वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने आज लोक सभा में वर्ष 2010-11 का बजट पेश करते हुए देश की रक्षा के लिए आबंटन सीमा बढ़ाकर 1,47,344 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव किया। इनमें पूंजी व्यय के लिए 60,000 करोड़ रुपए भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए किसी भी अतिरिक्त आवश्यकता के लिए व्यवस्था की जाएगी।

उन्होंने सदन को बताया कि वर्ष 2009 के दौरान जम्मू-कश्मीर में हिंसा में कमी आई है और सरकार ने अनेक विश्वास निर्माण संबंधी उपाय भी किए हैं। उन्होंने कहा कि एक ऐसे ही उपाय के रूप में सरकार वर्ष 2010 में पांच केन्द्रीय अर्ध्द-सैनिक बलों में लगभग दो हजार युवा कॉस्टेबलों की नियुक्ति का प्रस्ताव करती है।

वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में सदन को बताया कि वर्ष 2009-10 में देश में समग्र आन्तरिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था की स्थिति आम तौर पर नियंत्रण में रही है। देश के सुरक्षा तंत्र को सुदृढ करने के लिए बहुत से नए उपाय किए गए। उन्होंने बताया कि सुरक्षा उपायों के तहत राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी को कार्यशील बनाना, चार एनएसजी केन्द्रों की स्थापना, आसूचना ब्यूरो और इसके बहु-विषयक एजेंसी केन्द्र का विस्तार किया गया।

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नई दिल्ली. वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने आज लोकसभा में वर्ष 2010-11 का आम बजट पेश करते हुए कहा कि वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के तंत्र को सुदृढ बनाने तथा सांस्थानिक रूप देने की दृष्टि से सरकार का एक शीर्ष स्तरीय वित्तीय स्थायित्व और विकास परिषद की स्थापना करने का प्रस्ताव है। विनियामकों की स्वायत्तता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, यह परिषद बड़े पैमाने पर वित्तीय एकीकरण की कार्यप्रणाली सहित अर्थव्यवस्था के वृहद विवेक सम्मत परीक्षण की निगरानी करेगी और अंतरविनियामक समन्वय संबंधी मसलों का समाधान करेगी। सरकार वित्तीय बोधगम्यता और वित्तीय समावेशन पर भी ध्यान केन्द्रित करेगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि वर्ष 2008 के दौरान सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के 4 बैंकों में पूंजी से जोखिम भारित आस्ति अनुपात का वहनीय स्तर बनाए रखने के लिए टीयर वन कैपिटल के बतौर 1900 करोड़ रुपये दिए थे। इसमें अब 1200 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि दी जा रही है। प्रणब मुखर्जी ने वर्ष 2010-11 के लिए 16,500 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव किया है, ताकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक 31 मार्च, 2011 तक न्यूनतम 8 प्रतिशत टीयर-1 पूंजी हासिल कर सकें।

वर्ष 2006-07 में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का अंतिम पूंजीकरण किया गया था। अब क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को मजबूत बनाने हेतु वित्त मंत्री ने और पूंजी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव किया है ताकि इन बैंकों के पास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को वर्ध्दित ऋण प्रदान करने हेतु पर्याप्त पूंजी आधार हो।

वित्त मंत्री ने सदन को बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक निजी क्षेत्र के भागीदारों को कुछ अतिरिक्त बैंकिंग लाइसेंस देने पर विचार कर रहा है। इसके अतिरिक्त गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों पर भी विचार किया जा सकता है, बशर्ते वे भारतीय रिजर्व बैंक के पात्रता मानदंडों की पूर्ति करें।

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नई दिल्ली. वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने आज लोकसभा में वर्ष 2010-11 का आम बजट पेश करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र के समावेशी विकास को प्रोत्साहन देना, ग्रामीण आय को बढाना तथा खाद्य सुरक्षा बनाए रखना सरकार का प्रमुख केन्द्र बिन्दु है। इस क्षेत्र में विकास की गति बढाने के लिए सरकार चतुर्थ स्तरीय कार्ययोजना पर अमल करेगी, जिसमें 1. कृषि उत्पादन, 2. उत्पाद की बरबादी में कमी, 3 किसानों को ऋण सहायता, 4. खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र पर जोर देना शामिल है।

कार्ययोजना के पहले घटक में ग्राम सभाओं तथा किसान परिवारों के सक्रिय सहयोग से देश के पूर्वी क्षेत्र- बिहार, छत्तीसगढ, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल तथा उड़ीसा में हरित क्रांति का विस्तार करना है। वित्त मंत्री ने वर्ष 2010-11 के लिए इसके लिए 400 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने का प्रस्ताव किया है। वर्षा पोषित क्षेत्रों में 60,000 'दलहन और तेल बीज ग्राम' तथा जल संचयन, जल संभर प्रबंधन तथा मृदा स्थिति के लिए एकीकृत तंत्र की व्यवस्था करने का प्रस्ताव है । शुष्क भू-कृषि क्षेत्रों की उत्पादकता बढाने के लिए इस मद में 300 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम शुरू करने के लिए 200 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव किया गया है।

कार्ययोजना के दूसरे घटक के तहत भंडारण क्षमता में वृध्दि करने के लिए भारतीय खाद्य निगम के जरिये प्राइवेट पार्टियों से गोदाम किराये पर लेने की अवधि को पांच वर्ष से बढ़ाकर सात वर्ष किया जा रहा है।

कार्ययोजना के तीसरे घटक के तहत ऋण उपलब्धता बढ़ाने की योजना है। सरकार बैंकों के जरिये कृषि ऋण प्रवाह बढ़ाने के लक्ष्य पूरे कर रही है। वर्ष 2010-11 के लिए मौजूदा 3,25,000 करोड़ रुपये के कृषि ऋण को बढ़ाकर 3,75,000 करोड़ रुपये किया गया है। किसानों के लिए ऋण माफी और ऋण राहत योजना के तहत ऋण वापसी की अवधि को 31 दिसम्बर, 2009 से 6 महीने बढ़ाकर 30 जून, 2010 तक करने का प्रस्ताव है। देश के कुछ राज्यों में हाल के सूखे और अन्य भागों में आई भयंकर बाढ़ को देखते हुए ऋण वापसी की अवधि बढ़ाई गई है। फसल ऋणों की समय पर अदायगी करने वाले किसानों के लिए दी जा रही ब्याज में एक प्रतिशत की आर्थिक सहायता को बढ़ाकर 2 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इस प्रकार ऐसे किसानों को सिर्फ 5 प्रतिशत प्रति वर्ष ब्याज देना होगा।

कार्ययोजना के चौथे घटक के तहत आधारभूत संरचना उपलब्ध कराकर खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के विकास को गति प्रदान करना है। पहले से स्थापित 10 मेगा फूड पार्क परियोजनाओं के अतिरिक्त सरकार ने ऐसे पांच और पार्क स्थापित करने का निर्णय लिया है। बाजार योजना के लिए कृषि के भाग के रूप में विदेशी वाणिज्यिक उधार अब से कोल्ड स्टोरेज तथा कोल्ड रूम सुविधा के लिए उपलब्ध होंगे, जिनमें कृषि एवं सम्बध्द पार्क, समुद्री उत्पाद और मांस के परिरक्षण अथवा भंडारण हेतु फार्म लेबल प्री-कूलिंग शामिल होंगी।

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26 रबी अल-अव्वल, हिजरी सन् 1431, 11 मार्च, 2010 गुरुवार, तिथि संवत : चैत्र कृष्ण एकादशी, संवत् 2066, शाके 1931, रवि उत्तरायने, वसंत ऋतु. पापमोचनी एकादशी. सूर्योदय कालीन नक्षत्र : उत्तराषाढ़ा सायं 7.21 तक, पश्चात श्रवण नक्षत्र, परिघ योग तथा बालवकरण. ग्रह विचार : सूर्य-बुध, गुरु-कुंभ, शुक्र-मीन, केतु-मिथुन, मंगल-कर्क, शनि-कन्या, राहु-धनु तथा चंद्रमा-मकर राशि में. चौघड़िया मुहूर्त : प्रात: 6.39 से 8.09 तक शुभ, प्रात: 11.07 से 12.37 तक चंचल, दोपहर 12.37 से 2.06 तक लाभ, सायं 5.05 से 6.34 तक शुभ, सायं 6.34 से 8.05 तक अमृत, रात्रि 8.05 से 9.35 तक चंचल. राहुकाल : दोपहर 2.06 से 3.35 तक. शुभ अंक 8, शुभ रंग नीला

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