फ़िरदौस ख़ान
नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए गठबंधन की केंद्र सरकार से पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ी हुई कीमतों को वापस लेने की मांग की है. गौरतलब है कि महंगाई के मुद्दे पर भाजपा देशव्यापी मुहिम चला रही है. पार्टी का दावा है कि मूल्यवृध्दि के विरुद्ध 25 मिलियन से भी अधिक लोगों के हस्ताक्षर पहले ही एकत्रित हो चुके हैं और 50 मिलियन से अधिक लोगों के हस्ताक्षर देशभर से और आगे एकत्रित किए जाएंगे। 21 अप्रैल के संसद कूच की तैयारियां भी जोर-शोर से चल रही हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता व सांसद प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि पहले, केन्द्रीय बजट और अब दिल्ली स्टेट के बजट ने लोगों की कमर तोड़कर रख दी है। केन्द्रीय बजट के द्वारा पैट्रोल, डीज़ल, उर्वरकों के मूल्य बढ़ाए गए, जिनका मुद्रास्फीति पर प्रपाती प्रभाव पड़ा और अन्य करों में भी वृध्दि हो गई। साथ ही सेवा कर ने भी आम आदमी पर भारी बोझ डाल दिया है। अब दिल्ली सरकार ने एक ही झटके में डीज़ल के मूल्य 2.67 रुपये प्रति लिटर और कुकिंग गैस के मूल्य 40 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ा दिए हैं। इसके कारण उन लोगों की कमर और बुरी तरह टूट जाएगी, जो तेजी से बढ़ती हुई कीमतों के कारण पहले से ही कठिनाई झेल रहे हैं। जब भी कीमतों पर चर्चा होती है तभी कांग्रेस पार्टी आमतौर पर राज्य सरकारों पर और खासतौर पर राजग पर आरोप लगाती है। भाजपा जानना चाहती है कि कांग्रेस अपने मुख्यमंत्रियों को सलाह क्यों नहीं दे रही है तथा कीमतों को नीचे क्यों नहीं ला रही है? भाजपा उक्त बजट प्रस्तावों की घोर निंदा करती है और इसके कारण आम आदमी पर बढ़े बोझ को तुरंत वापस लेने की मांग करती है।
उन्होंने कहा कि अब देश के लोगों ने महसूस कर लिया है कि मूल्यवृध्दि कांग्रेस की जन-विरोधी नीतियों का ही परिणाम है - चाहे वह आयात-निर्यात हो, राजकोषीय मामला हो, खाद्य स्टॉक का प्रबंधन हो तथा वायदा बाजार आदि के बारे में लिए गए निर्णय हों। थोक मूल्य सूचकांक दो अंकों में प्रवेश कर रहा है, खाद्य पदार्थों के मूल्य लगभग 16 प्रतिशत ऊंचे हो रहे हैं और राजकोषीय घाटा 7 प्रतिशत के आस-पास है। ये सभी बातें मूल्यों में और अधिक वृध्दि करने वाली हैं।

यह विडंबना ही है कि जहां धान पैदा करने वाले को 11 रुपये प्रति कि.ग्रा. की प्राप्ति हो रही है वहीं उपभोक्ता को इसके लिए 40 रुपये प्रति कि.ग्रा. चुकाने पड़ रहे हैं। इसका न्यायोचित मूल्य 16-20 रुपये प्रति कि.ग्रा. होना चाहिए। जिस चीनी का अब हम उपयोग कर रहे है, उसका उत्पादन गत वर्ष हुआ था। इसके लिए किसानों को 16 रुपये प्रति कि.ग्रा. प्राप्त हुए थे, जिसके लिए उपभोक्ता अब 45 रुपये प्रति कि.ग्रा. अदा कर रहा है। इस प्रकार कांग्रेस पार्टी के शासन में जनता को खुले आम लूटा जा रहा है। कांग्रेस पार्टी की सट्टेबाजों के साथ पूरी साठगांठ है।

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