नये साल का स्वागत करके, नूतन आस जगाने दो।
कल क्या होगा, कौन जानता, मन की प्यास बुझाने दो।।
क्या खोया, क्या पाया कल तक, अनुभव के संग ज्ञान यही।
इसी ज्ञान से कल हो रौशन, यह विश्वास बढ़ाने दो।।
जो न सोचा, हो जाता है, नहीं हारते वीर कभी।
सच्ची कोशिश, प्रतिफल अच्छा, बातें खास बताने दो।।
कल आएगा, बीता कल भी, नहीं किसी पर वश अपना।
अपने वश में वर्तमान बस, यह आभास कराने दो।।
जितने काँटे मिले सुमन को, बढ़ती है उतनी खुशबू।
खुद का परिचय संघर्षों से, यह एहसास कराने दो।।
-श्यामल सुमन
मर्ज़ बढ़ता गया ज्यों ज्यों दवा की
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*फ़िरदौस ख़ान*
भौतिकवादी संस्कृति ने जहां जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित किया है,
वहीं मनुष्य का स्वास्थ्य भी इससे न अछूता रहा हो तो इसमें हैरानी की को...

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